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प्रदेश में परेशानी में आए घसियारी योजना के लाभार्थी, जानिए क्या है वजह

घसियारी योजना के लाभार्थी परेशानी में आ गए हैं. दरअसल पिछले कई हफ्तों से इन पशुपालकों को चारा उपलब्ध ही नहीं कराया जा रहा है.

GHASYARI SCHEME
घसियारी योजना के लाभार्थी को नहीं मिल रहा चारा (Photo-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : January 8, 2026 at 6:48 AM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में पशुपालकों के हित में राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं. इन्हीं योजनाओं में से एक है घसियारी कल्याण योजना, जिसका उद्देश्य खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाओं को पशुओं के चारे के बोझ से राहत देना है. इस योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को पशु आहार और साइलेज उपलब्ध कराया जाता है, ताकि उन्हें जंगलों या दूरस्थ क्षेत्रों में घास काटने के लिए न जाना पड़े और घर पर ही पशुओं के लिए चारा मिल सके.

इस योजना की शुरुआत वर्ष 2023 में की गई थी, लेकिन शुरुआत से ही यह योजना विभिन्न कारणों से हिचकोले खाती रही है. अब एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में चारे की उपलब्धता को लेकर नई समस्या खड़ी हो गई है. कई पशुपालकों का कहना है कि उनके क्षेत्रों में लंबे समय से पशुओं का चारा नहीं पहुंचाया जा रहा है, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

परेशानी में आए घसियारी योजना के लाभार्थी (Video-ETV Bharat)

पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालकों की मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई हैं, क्योंकि वन विभाग लगातार लोगों को अपने मवेशियों को जंगलों में चरने के लिए न छोड़ने की अपील कर रहा है. विभाग का कहना है कि जंगलों में शिकारी वन्यजीवों का खतरा बढ़ गया है, जिससे मवेशियों के साथ-साथ उन्हें चराने जाने वाली महिलाओं की जान भी जोखिम में पड़ सकती है. बीते कुछ समय में महिलाओं पर वन्यजीवों के हमले के कई मामले सामने आ चुके हैं. ऐसे में पशुपालक असमंजस में हैं कि वे अपने पशुओं के लिए सुरक्षित रूप से चारे की व्यवस्था आखिर कहां से करें.

घसियारी योजना के तहत चारे की आपूर्ति रुकने की बड़ी वजह बजट का समय पर जारी न होना बताया जा रहा है. योजना के अंतर्गत साइलेज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को सौंपी गई थी, लेकिन लंबे समय तक भुगतान नहीं होने के कारण उस संस्था ने चारा आपूर्ति से साफ इंकार कर दिया. इसका सीधा असर पर्वतीय जिलों के पशुपालकों पर पड़ा.

आंकड़ों की बात करें तो उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों में हर महीने लगभग 3 हजार टन साइलेज भेजा जाता है. वहीं बड़े पैमाने पर व्यावसायिक पशुपालन करने वाले डेयरी फार्मरों के लिए अब कुछ नई शर्तें लागू की गई हैं. इसके तहत पांच पशुओं तक के पशुपालकों को ही सब्सिडी के तहत चारा मिलेगा. निर्धारित मात्रा से अधिक चारा लेने पर उन्हें व्यावसायिक दरों पर भुगतान करना होगा.

पशुपालकों की शिकायतों के बीच सहकारिता विभाग का कहना है कि अब बजट जारी कर दिया गया है और जल्द ही योजना को फिर से सुचारू कर दिया जाएगा. सहकारिता विभाग के डिप्टी रजिस्ट्रार आनंद शुक्ला के अनुसार, भुगतान न होने के कारण वेंडर ने चारा आपूर्ति रोक दी थी, लेकिन अब बजट मिलने के बाद सभी व्यवस्थाएं दोबारा दुरुस्त की जा रही हैं. विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में पशुपालकों को इस समस्या से राहत मिलेगी.

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