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उत्तराखंड में हनी मिशन को बढ़ावा देने की तैयारी, बनाई जा रही 'बी कीपिंग पॉलिसी', किसानों को मिलेगा लाभ

हनी मिशन को बढ़ावा देने के लिए तैयार हो रही है बी कीपिंग पॉलिसी, प्रदेश के शहद को ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के रूप में मिलेगा बढ़ावा.

UTTARAKHAND HONEY MISSION
उत्तराखंड में हनी मिशन को बढ़ावा देने की तैयारी (PHOTO-ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : February 24, 2026 at 9:41 AM IST

5 Min Read
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देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन के साथ ही शहद (हनी) उत्पादन के क्षेत्र में भी बड़ी संभावना है. उत्तराखंड देश में शहद उत्पादन के क्षेत्र में आठवें पायदान पर है. यही वजह है कि राज्य सरकार की ओर से प्रदेश में हनी मिशन के तहत शहद उत्पादन पर विशेष जोर दे रही है. इसके लिए अब राज्य में शहर का ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि इससे शहद उत्पादकों को अधिक से अधिक फायदा मिलने के साथ ही राज्य की हनी को बेहतर बाजार उपलब्ध हो सके. इसके लिए उद्यान विभाग बी कीपिंग पॉलिसी (Bee Keeping Policy) भी तैयार कर रही है. ताकि अधिक के अधिक किसानों को मौन (मधुमक्खी) पालन योजना से जोड़ते हुए उन्हें सब्सिडी समेत तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके.

उत्तराखंड सरकार प्रदेश में किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लगातार कदम बढ़ा रही है. इसके लिए सरकार की कोशिश है कि प्रदेश के छोटे किसान पारंपरिक खेती से हटकर फ्लोरीकल्चर (पुष्पकृषि), बी कीपिंग और ऑर्गेनिक फार्मिंग पर जोर दे. क्योंकि इससे किसानों को कम भूमि पर अच्छी इनकम का लाभ मिलेगा. वर्तमान समय में उत्तराखंड के शहद की डिमांड विश्व भर में है. यही कारण है कि राज्य सरकार प्रदेश में हनी उत्पादन को बढ़ावा देकर राज्य को ऑर्गेनिक शहद उत्पादन वाले राज्य में शामिल करना चाहती है. जिसे न सिर्फ उत्तराखंड राज्य को लाभ मिलेगा, बल्कि प्रदेश में शहद उत्पादन करने वाले किसानों को भी लाभ मिलेगा, साथ ही उनकी इनकम भी बढ़ेगी.

उत्तराखंड में हनी मिशन को बढ़ावा देने की तैयारी (VIDEO-ETV Bharat)

दूसरे राज्यों में जाएगी टीम: उत्तराखंड में मौन पालन के क्षेत्र में अभी फिलहाल कोई पॉलिसी नहीं है. ऐसे में राज्य सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि प्रदेश में एक ऐसी पॉलिसी तैयार की जाए, जिससे प्रदेश के छोटे किसान खासकर महिला किसानों को मौन पालन सेक्टर से जोड़ा जा सके. ऐसे में अब उत्तराखंड सरकार जिन राज्यों में बागवानी और मधुमक्खी पालन के क्षेत्र में बेहतर काम हो रहे हैं, उन राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस को जानने और अध्ययन के लिए अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की टीम को भेजने का निर्णय लिया है. ताकि अन्य राज्यों की पॉलिसी और प्रक्रियाओं के तहत उत्तराखंड राज्य में भी उसे लागू किया जा सके.

किसानों को मिल रही 40 फीसदी सब्सिडी: वर्तमान समय में मौन पालन योजना के तहत किसानों को 40 फीसदी सब्सिडी पर शहद उत्पादन के लिए बी कॉलोनी बॉक्स दिए जा रहे हैं. इसके अलावा, किसानों को मौन पालन संबंधित ट्रेनिंग के साथ ही रोजाना एक हजार रुपए का प्रोत्साहन रही दी जा रही है. प्रदेश के किसान, उद्यान विभाग के जरिए 1200 रुपए प्रति किलो दी दर से शहद बेच रहे हैं. ऐसे में राज्य सरकार मौन पालन को और अधिक बढ़ावा दिए जाने के साथ ही किसानों को और अधिक सुविधाएं उपलब्ध करा जाने को लेकर बी कीपिंग पॉलिसी तैयार कर रही है. जिसमें शहद उत्पादन से लेकर विपणन और शहर के प्रोसेसिंग स्टेज को भी शामिल किया जाएगा.

Uttarakhand Honey Mission
मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन की प्रक्रिया समझते सीएम धामी (PHOTO-ETV Bharat)

उत्तराखंड के शहद की विशिष्ट पहचान: ज्यादा जानकारी देते हुए उद्यान सचिव एसएन पांडे ने कहा कि उत्तराखंड के शहद की अपना एक विशिष्ट पहचान है. क्योंकि, शहद का उत्पादन कम भूमि या फिर बिना भूमि के भी किया जा सकता है. उत्तराखंड राज्य का शहद ऑर्गेनिक रूप से और स्वास्थ्य के लिहाज से मूल्यवान है. ऐसे में किसान खेती के साथ ही शहद का भी उत्पादन करे. ऐसे में उत्तराखंड राज्य में शहद के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बी कीपिंग पॉलिसी (Bee Keeping Policy) भी तैयार की है, जिसे जल्द ही लागू किया जाएगा. ताकि किसानों की आय शहद उत्पादन से भी बढ़ सके.

पूरे विश्व में हनी की काफी अधिक डिमांड है. राज्य सरकार ऑर्गेनिक प्रोडक्ट के उत्पाद को बढ़ावा दे रही है, क्योंकि ऑर्गेनिक प्रोडक्ट का एक प्रीमियम वैल्यू मिल रहा है. ऐसे में राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि प्रदेश में उत्पादित होने वाले शहद को ऑर्गेनिक सर्टिफाइड करके किसानों को आगे बेचने के लिए अवसर उपलब्ध कराए जाएं. ताकि उत्तराखंड के शहद को पूरे विश्व में ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन शहद के रूप में बेचा जा सके. इसके लिए उत्तराखंड में सीड एवं ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन बोर्ड है.
-एसएन पांडे, सचिव, उद्यान विभाग-

मंत्रिमंडल बैठक में रखी जाएगी पॉलिसी: साथ ही बताया कि बी कीपिंग पॉलिसी को तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है. जिसे जल्द ही मंत्रिमंडल के सम्मुख रखा जाएगा. इस पॉलिसी का मुख्य बिंदु यही होगा कि मौन पालन के लिए अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए. ताकि सीमांत और लघु कृषक, जिनके पास भूमि कम है और वो परंपरागत कृषि नहीं कर पा रहे हैं, उसके लिए एक मौन पालन एक विकल्प के रूप में जोड़ा जाएगा, इसके लिए पूरा एक वैल्यू चेन बनाया जाएगा. जिसमें शहद उत्पादन से लेकर शहद के विपरण और प्रोसेसिंग स्टेज को जोड़ा जाएगा.

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