कृषि शिक्षक भर्ती में बीएड अनिवार्य, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एकमुश्त छूट की मांग की खारिज
अभ्यर्थियों का कहना है कि वर्ष 2019 से लागू पात्रता व्यवस्था के तहत शिक्षक (कृषि) के पद के लिए B.Ed. अनिवार्य नहीं था.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 25, 2026 at 11:57 AM IST
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शिक्षक (कृषि) के पद पर भर्ती के लिए B.Ed. की अनिवार्य योग्यता में छूट देने की मांग को खारिज कर दिया है. जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की पात्रता शर्तें निर्धारित करना राज्य सरकार एवं सक्षम नियम बनाने वाले प्राधिकारी का क्षेत्र है. न्यायालय अनिवार्य योग्यता में अपनी ओर से छूट नहीं दे सकता.
मामले में 65 अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का रुख किया था. उनका कहना था कि वर्ष 2019 से लागू पात्रता व्यवस्था के तहत शिक्षक (कृषि) के पद के लिए B.Ed. अनिवार्य नहीं था. बाद में अशोकानंद पटेल बनाम State of Chhattisgarh एवं अन्य मामले में डिवीजन बेंच ने पूर्व में दी गई छूट को असंवैधानिक और अधिकारातीत घोषित करते हुए राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुरूप बीएड योग्यता शामिल करने का निर्देश दिया था.इसके बाद राज्य सरकार ने 13 फरवरी 2026 की अधिसूचना के माध्यम से B.Ed. को अनिवार्य योग्यता बना दिया.
अभ्यर्थियों ने मांगी थी राहत
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भर्ती का शॉर्ट विज्ञापन 28 जुलाई 2026 को जारी हुआ और आवेदन की अंतिम तिथि 2 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है. B.Ed. पाठ्यक्रम पूरा करने में लगभग दो शैक्षणिक वर्ष लगते हैं. ऐसे में जो अभ्यर्थी पूर्व नियमों के तहत पात्र थे, उन्हें नई योग्यता हासिल करने के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल सका. अभ्यर्थियों ने मांग की थी कि उन्हें वर्तमान भर्ती प्रक्रिया में B.Ed. के बिना शामिल होने की अनुमति दी जाए और चयन होने की स्थिति में निर्धारित समय के भीतर B.Ed. हासिल करने का अवसर दिया जाए.
राज्य ने किया विरोध
राज्य सरकार और छत्तीसगढ़ स्टाफ सिलेक्शन बोर्ड की ओर से इस मांग का विरोध किया गया. उनका कहना था कि अशोकानंद पटेल मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच पहले ही B.Ed. की आवश्यकता को स्पष्ट कर चुकी है. इसलिए वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित अनिवार्य योग्यता में न्यायालय द्वारा छूट देना उचित नहीं होगा.
कोर्ट ने कहा—योग्यता तय करना सरकार का अधिकार
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने B.Ed. की अनिवार्यता को ही चुनौती नहीं दी है. उनकी मांग केवल एकमुश्त राहत की थी. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब पूर्व में B.Ed. से दी गई छूट को डिवीजन बेंच द्वारा असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है और राज्य सरकार को NCTE Regulations, 2014 के अनुसार B.Ed. योग्यता निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है, तब वर्तमान नियमों के तहत निर्धारित योग्यता के बिना अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने का अधिकार नहीं मांग सकते.
अदालत ने कहा कि ऐसी छूट देना प्रभावी रूप से उस अनिवार्य योग्यता के लिए नया अपवाद तैयार करने के समान होगा, जो सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्धारित की गई है.
कोर्ट भर्ती की योग्यता में बदलाव नहीं कर सकता
हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पात्रता मानदंड, न्यूनतम योग्यताएं और सेवा नियम निर्धारित करना नियम बनाने वाले प्राधिकारी अथवा राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है. न्यायालय अपनी राय को राज्य सरकार द्वारा निर्धारित पात्रता शर्तों के स्थान पर नहीं रख सकता और न ही व्यक्तिगत अभ्यर्थियों को सुविधा देने के लिए अनिवार्य योग्यता को माफ कर सकता है. Article 226 के तहत न्यायिक समीक्षा का दायरा निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता, मनमानी, दुर्भावना या संवैधानिकता की जांच तक सीमित है.
अभ्यर्थियों की याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज
हाईकोर्ट ने अभ्यर्थियों द्वारा मांगी गई एक बार का संक्रमणकालीन छूट देने से इनकार कर दिया और याचिका को मोशन स्टेज पर ही खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि शिक्षक (कृषि)के पद के लिए वर्तमान नियमों के तहत B.Ed. अनिवार्य योग्यता है. केवल इस आधार पर कि अभ्यर्थी पूर्व नियमों के तहत पात्र थे, उन्हें नई अनिवार्य योग्यता से न्यायालय द्वारा एकमुश्त छूट नहीं दी जा सकती.

