उत्तरकाशी के सौड़ सांकरी गांव में दिखा लोक संस्कृति का खूबसूरत नजारा, ध्याणियों के आने से छायी रौनक
उत्तरकाशी के सौड़ सांकरी गांव में मैती ध्याणी मिलन कार्यक्रम, अपने मायके पहुंचीं दूर व्याही ध्याणियां, ध्याणियों ने आराध्य देवता सोमेश्वर महादेव का लिया आशीर्वाद

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : February 25, 2026 at 5:53 PM IST
उत्तरकाशी: इन दिनों दूरस्थ मोरी ब्लॉक के विभिन्न गांवों में देवगोती मेले की धूम चल रही है. मेले में लोक संस्कृति और आस्था का अनूठा समागम देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में सांकरी के सौड़ गांव में मैती ध्याणी मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया. जिसमें दूर दराज व्याही ध्याणियां (बेटियां) अपने मायके पहुंचीं. जहां ग्रामीणों ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया. वहीं, ध्याणियों ने अपने आराध्य देवता सोमेश्वर महादेव की डोली के साथ रासो और तांदी किया. इस दौरान लोकगीतों पर जमकर झूमीं.
दूर-दूर व्याही ध्याणियां पहुंचीं अपने मायके, सोमेश्वर देवता लिया आशीर्वाद: दरअसल, सौड़ सांकरी गांव में मैती ध्याणी मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. मेले में पंचगांई, अडोर, बडासु, सिंगतूर पट्टियों समेत अन्य गांवों में व्याही ध्याणियां अपने मायके सौड़ गांव पहुंची. जहां उन्होंने अपने आराध्य सोमेश्वर महाराज की विधि विधान से पूजा अर्चना की. साथ ही अपने आराध्य को चुनरी, श्रीफल समेत अन्य उपहार स्वरूप भेंट किया.
इस दौरान ध्याणियों ने अपने मायके वाले लोगों के साथ सोमेश्वर महाराज देवता की डोली के साथ तांदी लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी. वहीं, ध्याणियों ने अपने आराध्य सोमेश्वर महाराज से अपने और मायके के लोगों की खुशहाली के लिए मन्नतें मांगी. बता दें कि मोरी क्षेत्र में कई दिनों से सोमेश्वर महाराज का देवगोती मेला चल रहा है. मेले में ग्रामीण अपने आराध्य देवता सोमेश्वर महाराज के साथ रासो और तांदी गीतों के साथ ही ढोल दमाऊं की थाप पर जमकर झूम रहे हैं.

"सोमवार को सौड़ सांकरी में मेले के दौरान मैती ध्याणी मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें दूर दराज से बड़ी संख्या में ध्याणियां पहुंचीं. ध्यानियों ने अपने आराध्य देवता की विशेष पूजा अर्चना की. साथ ही देव डोलियों के साथ नृत्य किया. वहीं, ग्रामीणों की ओर से ध्याणियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया."- चैन सिंह रावत, ग्रामीण, सौड़ सांकरी
चैन सिंह रावत ने बताया कि सोमेश्वर महाराज का देवगोत मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत, लोक आस्था और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है. खास बात ये रही कि मेले में ध्याणियां पूरी तरह से पारंपरिक परिधान में नजर आईं. जिससे नजारा देखते ही बन रहा था. ग्रामीण समेत मेहमान आए लोग भी लोक संस्कृति के इस अनूठे समागम को देख अभिभूत हो गए.

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