BBAU का 11वां दीक्षांत समारोह; 8151 छात्रों को मिली उपाधि, रक्षा मंत्री बोले- शिक्षा से ज्यादा जरूरी चरित्र और किरदार
समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों 15 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : August 29, 2026 at 4:45 PM IST
|Updated : August 29, 2026 at 5:50 PM IST
लखनऊ : बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (BBAU) में शनिवार को 11वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विशिष्ट अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक शामिल हुए. समारोह में कुल 8,151 से अधिक छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल, सिल्वर मेडल, कांस्य पदक और उपाधियां प्रदान की गईं.
समारोह की शुरुआत में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि लखनऊ लगातार विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने ब्रह्मोस मिसाइल का जिक्र करते हुए कहा कि यह ऐसी घातक मिसाइल है, जिससे दुश्मनों का धूक धूक करता है. हमेशा आशंकित रहते हैं. उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे देश की प्रगति को करीब से समझें और देखें कि भारत किस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है.
रक्षा मंत्री ने डिप्टी सीएम की ली चुटकी : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी बात शुरू करने से पहले हल्के-फुल्के अंदाज में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठकी की ब्रह्मोस मिसाइल की बात पर चुटकी ली. कहा कि यह मंच शैक्षणिक संस्थान का है. रक्षा मंत्री ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर, स्वामी विवेकानंद और अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने हमेशा छात्रों को शिक्षा, आंदोलन और संगठन की राह पर चलने की प्रेरणा दी.
आंदोलन का अर्थ हिंसा करना नहीं : उन्होंने कहा, आंदोलन का अर्थ सड़कों पर उतरकर हिंसा करना कभी नहीं था. बाबा साहब ने स्वयं अपने जीवन में इन मूल्यों को उतारा था. उस दौर में जिस विद्यालय में वे पढ़ते थे, वहां उन्हें सबके इस्तेमाल वाले नल से पानी तक पीने की अनुमति नहीं थी, बावजूद इसके उन्होंने ठान लिया कि शिक्षा हासिल करके ही रहेंगे और आगे चलकर उस दौर के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई पूरी की.
संवैधानिक मूल्यों को अपनाना ही एकमात्र रास्ता : राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के विकास और बदलाव के लिए संवैधानिक मूल्यों को अपनाना ही एकमात्र रास्ता है, संवैधानिक तरीकों के बिना न विकास संभव है और न ही बदलाव. रक्षा मंत्री ने कहा कि विवेकानंद का मानना था कि यदि उन्हें राष्ट्र के प्रति समर्पित और सेवाभाव से काम करने वाले सौ युवा मिल जाएं, तो वे भारत की तकदीर बदल सकते हैं. उन्होंने छात्रों से सवाल किया कि आखिर वे सौ युवा इसी सभागार में मौजूद छात्रों में से क्यों नहीं हो सकते.
चरित्र और किरदार जरूरी : उन्होंने कहा कि शिक्षा से ज्यादा जरूरी किसी व्यक्ति का चरित्र और किरदार है. बाबा साहब के हवाले से उन्होंने कहा कि जिस शिक्षित व्यक्ति में मानवता और विनम्रता नहीं है, वह हिंसक पशु से भी अधिक भयावह होता है. इसलिए शिक्षा के साथ-साथ चरित्र, मानवता और विनम्रता सीखना भी उतना ही जरूरी है. उन्होंने कहा कि डिग्री तो केवल नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली कुंजी है, असली जीवन तो यहीं से शुरू होता है.
गोल्ड मेडलिस्ट छात्राओं ने साझा किए अपने अनुभव : समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों 15 छात्र-छात्राओं को गोल्ड मेडल प्रदान किया गया. ईटीवी भारत से बातचीत में मेधावी छात्रों ने अपनी सफलता की कहानियां साझा कीं.
बीएससी (साइंस टेक्नोलॉजी) में गोल्ड मेडल पाने वाली श्रुति कुमारी ने बताया कि उन्हें रिसर्च के क्षेत्र में वैज्ञानिक बनने की इच्छा है. जूलॉजी विभाग की प्रतिभा वर्मा ने भावुक होते हुए कहा कि वे अनुसूचित जाति से आती हैं और बाबा साहब भीमराव अंबेडकर उनके लिए आदर्श हैं. उन्होंने बताया कि उनके पिता एक निजी नौकरी करते थे और घर की आर्थिक स्थिति सामान्य होने के बावजूद माता-पिता और शिक्षकों के मार्गदर्शन से उन्हें यह मुकाम हासिल हुआ, जिसे उन्होंने अपने माता-पिता और गुरुजनों को समर्पित किया.
इतिहास विषय में मास्टर डिग्री की मेडलिस्ट शिवांगी ने कहा कि इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय उनके माता-पिता को जाता है, जो खुद ज्यादा पढ़-लिख नहीं पाए लेकिन हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी वह हासिल करे जो वे नहीं कर सके. उन्होंने बताया कि शिक्षकों के मार्गदर्शन से ही उन्हें अंदाजा हुआ कि वे मेडल की हकदार बन सकती हैं.
समाजशास्त्र में गोल्ड मेडल पाने वाले प्रताप सिंह ने अपने प्रोफेसरों और माता-पिता का आभार जताया, जिन्होंने हमेशा उन्हें प्रेरित किया. एमएससी में विश्वविद्यालय टॉप करने वाली जिज्ञासा ने बताया कि वे नियमित पढ़ाई करने की बजाय परीक्षा से दो-तीन दिन पहले गहन तैयारी करती हैं और यही रणनीति उनके लिए कारगर साबित हुई.
अरुणाचल प्रदेश की जागृति सिंह ने एमएससी में विश्वविद्यालय टॉप किया है. जागृति ने बताया कि उनके गृह राज्य में मौसमी आपदाओं के चलते अक्सर स्कूल बंद रहते थे और परीक्षा के लिए कई दिन पहले यात्रा करनी पड़ती थी. तमाम मुश्किलों के बावजूद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया. बीटेक (इंजीनियरिंग) में गोल्ड मेडल पाने वालीं अर्चना पाठक ने बताया कि उन्होंने अपने विभाग में सबसे अधिक अंक हासिल किए और पढ़ाई के लिए यूट्यूब का भी सहारा लिया, जबकि माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन ने इस सफर को आसान बनाया.
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