नक्सलवाद से लड़कर पर्यटन के मैप पर चमका बस्तर, धूड़मारास को UN ने बेस्ट पर्यटन स्थल चुना, तिरिया को भी मिला सम्मान
अकेले ढाई लाख से ज्यादा पर्यटक कांगेर वैली का दीदार कर चुके हैं. बस्तर में बैंबू राफ्टिंग का मजा भी पर्यटकों को लुभा रहा है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : December 31, 2025 at 7:59 PM IST
|Updated : December 31, 2025 at 9:12 PM IST
बस्तर: बस्तर सिर्फ नक्सली हिंसा और बम बारूद के लिए नहीं जाना जाता, बस्तर अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है. तेजी से खत्म हो रहे माओवाद के मद्देनजर बस्तर के टूरिस्ट प्लेस अब पर्यटकों से गुलजार होने लगे हैं. बस्तर की जिन घाटियों में कभी सन्नाटा पसरा होता था, वहां अब पर्यटकों की चलहकदमी सुनाई पड़ती है. बस्तर की इस बदलती पहचान से यहां के स्थानीय आदिवासी भी खुश हैं. जैसे जैसे पर्यटन बढ़ रहा है, वैसे वैसे रोजगार के साधन भी बढ़ रहे हैं. साल 2025 में बस्तर ने पर्यटकों को जमकर लुभाया.
नक्सलगढ़ से टूरिस्टगढ़ बनता बस्तर
साल 2025 बस्तर जिले के लिए पर्यटन के लिहाज से बेहद खास और ऐतिहासिक साबित हुआ है. प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति और बढ़ती सुविधाओं के चलते देश-विदेश से लाखों पर्यटक बस्तर पहुंचे.
ये पर्यटन केंद्र बने प्रमुख आकर्षण के केंद्र
- चित्रकोट जलप्रपात
- तीरथगढ़ जलप्रपात
- तामड़ा घूमर
- मेन्द्री घूमर
- कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान



हाट बाजार और सांस्कृतिक महोत्सव ने भी ध्यान खींचा
खास बात यह रही कि न सिर्फ बस्तर के पर्यटन स्थल पर्यटकों को लुभा रहे हैं बल्कि यहां की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय बाजार में भी पर्यटकों का ध्यान खींच रहे हैं. स्थानीय हाट-बाजार पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे. पूरे साल आयोजित किए जाने वाले सांस्कृतिक महोत्सवों और पर्यटन उत्सवों ने भी पर्यटकों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी की है. विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा देखने के लिए हर साल की तरह इस साल भी बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचे. पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या से वन विभाग और स्थानीय लोग काफी खुश हैं.
पर्यटन विभाग के मुताबिक साल 2025 में बस्तर आने वाले पर्यटकों की संख्या लाखों में दर्ज की गई है. अकेले कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान (Kanger Valley National Park) में ही नवंबर महीने तक 2 लाख 45 हजार पर्यटक आ चुके हैं. पर्यटकों के आने की पूरी संख्या 1 जनवरी 2026 को क्लियर होगी. कांगेर वैली के डीएफओ नवीन कुमार ने करीब 3 लाख पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद जताई है.
साल 2026 में पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र ग्रीन गुफा होगी. उन्होंने बताया कि पर्यटकों को स्थानीय पारंपरिक नृत्य धुरवा नाच, स्थानीय व्यंजन, सेल्फी प्वाइंट खूब भा रहे हैं-नवीन कुमार, डीएफओ, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान


तिरिया ग्राम को RRI ने सम्मानित किया, धूड़मारास पर्यटन स्थल को विश्वस्तर पर UN ने बेस्ट पर्यटन स्थल चुना
सबसे खास बात 2025 में बस्तर के लिए यह रही कि बस्तर जिले के तिरिया ग्राम को बेस्ट वन संसाधन एवं पर्यटन के रूप में विश्वस्तर पर RRI ने सम्मानित किया. साल 2024 में बस्तर में मौजूद धूड़मारास पर्यटन स्थल को विश्वस्तर पर UN ने बेस्ट पर्यटन स्थल के रूप में चयनित किया. इन उपलब्धियों से न सिर्फ बस्तर की पहचान एक शानदार टूरिस्ट प्लेस के रुप में हुई बल्कि जैव विविधता वाले संभाग के रुप में पहचान बनी.
बस्तर में है दुनिया का दूसरा नियाग्रा फॉल
बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने बताया कि नक्सलवाद की समाप्ति के लिए 2025 में लगातार कार्रवाई जारी है. बस्तर में पर्यटन और रोजगार की अपार संभावनाएं हैं. बस्तर के पर्यटन स्थलों को देखने के लिए काफी संख्या में देश विदेश से पर्यटक बस्तर पहुंच रहे हैं. जिनमें हांदावाड़ा जलप्रपात, नम्बी जलप्रपात, नीलम सरई जलप्रपात जो कि नक्सल प्रभावित इलाकों में मौजूद हैं. बस्तर आईजी ने पर्यटकों से अपील करते हुए कहा कि बस्तर काफी सुरक्षित है. सभी पर्यटक बस्तर आकर यहां के कल्चर, नैसर्गिक सौंदर्य, वातावरण जैसे अनेक चीजों को देखकर महसूस कर सकते हैं.


दुकानदार और पर्यटक दोनों खुश, रोड और रेल मार्ग से आ रहे पर्यटक
स्थानीय होटल व्यापारी जतिन जायसवाल ने बताया कि इन दिनों काफी संख्या में पर्यटक बस्तर पहुंच रहे हैं. इनमें ओडिशा, कोलकाता सहित महाराष्ट्र के पर्यटक यहां आ रहे हैं. आंध्र प्रदेश और हैदराबाद से जो बसें चल रही है. उसका भी फायदा दुकानदारों को मिल रहा है. साथ ही रेलवे कनेक्टिविटी और एयर कनेक्टिविटी का भी फायदा बस्तर और पर्यटकों को मिल रहा है.


सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और होम स्टे की सुविधा भी
बस्तर में बेहतर सड़क संपर्क, होम-स्टे सुविधा, गाइड व्यवस्था और सुरक्षा के मजबूत इंतजामों ने बस्तर को सुरक्षित और आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित किया है. यहां पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को भी सीधा लाभ मिला. होटल, होम-स्टे, टैक्सी, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में तेजी से इजाफा हुआ. जिससे ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए. बांस शिल्प, ढोकरा आर्ट और स्थानीय खान-पान को देशभर में पहचान मिली.

बदलाव की कहानी लिख रहा नक्सलगढ़
बस्तर अब सिर्फ विकास के संघर्ष की नहीं, बल्कि पर्यटन और संस्कृति की नई पहचान बन चुका है. स्थानीय लोगों ने भी यहां के पर्यटन स्थलों को विकसित करने में शासन की मदद की. प्रशासन और पर्यटन विभाग का कहना है कि आने वाले सालों में बस्तर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने का काम किया जाएगा.
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