ETV Bharat / state

शहीदों के सम्मान में 2700KM की साइकिल यात्रा, सुकमा से लद्दाख के लिए निकला दोरनापाल का युवा

लद्दाख तक की साइकिल यात्रा देशभक्ति की मिसाल है. शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और संकल्प से दी जाती है.

2700 km cycling journey
शहीदों के सम्मान में 2700KM की साइकिल यात्रा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
author img

By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 28, 2026 at 6:26 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

सुकमा: नक्सल प्रभावित बस्तर से इस बार एक अलग कहानी सामने आई है. दोरनापाल के युवा जगत मंडल ने देश के शहीदों को सम्मान देने के लिए 2700 किलोमीटर लंबी साइकिल यात्रा करने का संकल्प लिया है. उनका लक्ष्य है बस्तर से लद्दाख तक साइकिल चलाकर पहुंचना और शहीद जवानों को नमन करना.

सुकमा से लद्दाख के लिए साइकिल यात्रा पर निकला दोरनापाल का युवा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

यह यात्रा केवल श्रद्धा के लिए

जगत मंडल कहते हैं कि यह यात्रा किसी रिकॉर्ड या रोमांच के लिए नहीं है. यह शहीदों को याद करने की यात्रा है. वे बताते हैं कि अक्सर हम शहीदों को केवल 15 अगस्त और 26 जनवरी पर याद करते हैं, जबकि उनका बलिदान हर दिन याद रखने योग्य है.

देश की सीमाओं पर खड़े जवानों की वजह से ही हम सुरक्षित हैं. अगर हम उन्हें केवल दो दिन याद करें, तो यह उनके बलिदान के साथ न्याय नहीं होगा.- जगत मंडल, युवा साइकिल यात्री

छह महीने में कई राज्यों से होकर यात्रा

जगत मंडल करीब छह महीने तक यह यात्रा करेंगे. वह रास्ते में गांवों, कस्बों और शहरों में युवाओं से मिलेंगे. स्कूल और कॉलेजों में जाकर शहीदों के सम्मान और देशभक्ति का संदेश देंगे. उनका उद्देश्य केवल दूरी तय करना नहीं है, बल्कि लोगों के दिलों तक पहुँचना है.

कठिन रास्ते और मौसम की चुनौती

दोरनापाल से लद्दाख का सफर आसान नहीं है. घने जंगल, मैदानी इलाके और पहाड़ों की कठिन चढ़ाइयाँ, भीषण गर्मी, अचानक बदलता मौसम और सीमित संसाधन – ये सभी चुनौती जगत मंडल के लिए इंतजार कर रहे हैं. लेकिन उनका हौसला इन सब से बड़ा है.

गांव वालों ने दिया उत्साह

जब जगत मंडल अपने गांव से निकले, तो ग्रामीणों और युवाओं ने उन्हें विदा किया. बुजुर्गों ने आशीर्वाद दिया और बच्चे तिरंगा लहराकर उनका उत्साह बढ़ाया. उस समय गांव में भावनात्मक दृश्य था, जैसे पूरा गांव अपने बेटे को देश की सेवा के लिए भेज रहा हो.

लद्दाख में होगी श्रद्धांजलि

लद्दाख में, जहां देश की सीमाएं बर्फीली चोटियों के बीच सुरक्षित हैं और कई जवानों ने बलिदान दिया है, जगत मंडल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. यह यात्रा उनके लिए केवल शारीरिक परीक्षा नहीं, बल्कि आत्मिक साधना है.

बस्तर से सकारात्मक संदेश

बस्तर, जो लंबे समय तक नक्सल घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा, अब यहां के युवाओं की सकारात्मक पहल की कहानी लिख रहा है. जगत मंडल यह संदेश दे रहे हैं कि हिंसा की जगह अब राष्ट्रनिर्माण और देशभक्ति की राह चुनी जा सकती है.

युवाओं के लिए प्रेरणा

विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसी यात्राएं समाज में सकारात्मक ऊर्जा फैलाती हैं. यह युवाओं को देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की सीख देती हैं. जब कोई युवा सीमित साधनों में इतना बड़ा संकल्प लेता है, तो वह हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन जाता है.

देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं

जगत मंडल यह दिखाते हैं कि सच्ची श्रद्धांजलि केवल शब्दों से नहीं, बल्कि कर्म और समर्पण से दी जाती है. 2700 किलोमीटर की यह यात्रा दोरनापाल की मिट्टी से लेकर लद्दाख की बर्फीली वादियों तक भावनाओं का सेतु है.

नया संदेश, नई पहचान

जब जगत लद्दाख पहुंचेंगे, तो वह केवल साइकिल यात्री नहीं होंगे. वह बस्तर की नई पहचान का प्रतीक होंगे, जो संघर्ष से निकलकर संकल्प और सकारात्मकता की राह पर है. उनकी यात्रा आने वाले समय में कई युवाओं को प्रेरित करेगी कि वे भी समाज और देश के लिए कुछ करें.

नक्सलगढ़ से नॉलेज हब तक, दंतेवाड़ा में विज्ञान प्रदर्शनी बनी नई उम्मीद, विकास और शिक्षा बन रही बस्तर की पहचान
सुकमा में कांग्रेस ने किया कलेक्टरोरेट घेराव, मनरेगा बचाओ संग्राम की हुंकार, हरीश कवासी बोले- मनरेगा गरीबों की जीवनरेखा
नक्सलगढ़ सुकमा में बदलाव की नई इबारत, हथियार छोड़ अब 5जी से जुड़े 101 सरेंडर नक्सली, नई कहानी की शुरुआत