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नक्सलगढ़ रहे बस्तर में 1996 से शिक्षा की अलख जगा रहे बुधराम कश्यप, शिक्षा को बनाया मिशन

कभी घोर नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में अब कलम से शिक्षक बदलाव की नई कहानी लिख रहे हैं. सुनील कश्यप की रिपोर्ट

TEACHERS DAY SPACIAL
बुधराम कश्यप (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : September 2, 2026 at 8:02 PM IST

7 Min Read
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बस्तर: छत्तीसगढ़ के बस्तर की धरती ने ऐसे कई किरदार दिए हैं, जिन्होंने बिना किसी बड़े संसाधन के बदलाव की इबारत लिखी है. कभी नक्सल प्रभावित रहे जिलों में ऐसे शिक्षक भी हैं, जिन्होंने नक्सली दहशत के बावजूद आदिवासी बच्चों और उनके पालकों का मनोबल बढ़ाया और उन्हें शिक्षा से जोड़े रखा. नक्सलियों के डर के साए के बीच पिछले कई सालों से ये शिक्षक आदिवासी बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं. ये कहानी भी एक ऐसे ही शिक्षक की है, जिन्होंने अति नक्सल प्रभावित इलाके में शिक्षा को लेकर अपना पहला कदम रखा. उस दौर में गांव के बच्चे पांचवीं कक्षा तक भी नहीं पहुंच पाते थे. लेकिन शिक्षक ने बच्चों को सिर्फ पढ़ाया नहीं, बल्कि उनके सपनों को उड़ान भी दी.

1996 से बस्तर के लोगों को कर रहे साक्षर

अपनी जेब से बच्चों की फीस भरी, स्कूल ड्रेस और किताब-कॉपी खरीदकर दी और जो बच्चे पढ़ाई छोड़ रहे थे उन्हें वापस स्कूल तक पहुंचाया. 1996 में नक्सलगढ़ से शुरू हुआ, उनका यह सफर आज भी बस्तर के छिंदबहार में जारी है. इस शिक्षक का नाम है बुधराम कश्यप. वह बस्तर जिले के नेगानार गांव के निवासी हैं. हर दिन अपने घर से करीब 8 किलोमीटर दूर हायर सेकंडरी स्कूल छिंदबहार पहुंचते हैं.

बस्तर के बुधराम कश्यप का शिक्षा मिशन (ETV BHARAT)

स्कूल के छात्रों का कहना है कि बुधराम सर सबसे पहले स्कूल में आकर गाना गंवाते हैं. ये गाना सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं बल्कि खुद लिखे इस गीत से बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं. गीत की कुछ लाइन इस प्रकार है....

पढ़ा पढ़ा पढ़ा नोनी बाबू.... यानी लड़का लड़की सब पढ़ो

पढ़ा पढ़ा पढ़ा दादा दीदी... यानी दादा दीदी पढ़ो

माई पिला जमाय पढ़ा... मां बच्चा सब पढ़ो

छी पढ़ले काय मिरेदे बोलतो गोठ के छाड़ा- छींक आने पर कोई भी काम नहीं किया जाता है, ये सब बातें छोड़कर पढ़ो

इस गीत के साथ हर रोज बुधराम कश्यप की क्लास शुरू होती है. कठिन शब्दों को भी सरल तरीके से समझाते हैं. कई ऐसे बच्चे हैं, जिन्होंने अपनी समस्याओं के कारण पढ़ाई छोड़ने चाही, लेकिन बुधराम सर ने उनकी समस्याओं को अपना समझा और समस्या को दूर किया.

BASTAR TEACHER Budhram Kashyap
बुधराम कश्यप (ETV Bharat Chhattisgarh)

कई बच्चों की सहायता शिक्षक ने की है. चाहे फीस भरना हो, कॉपी किताबें की आवश्यकता हो या फिर ड्रेस जैसे आवश्यक चीजों की जरूरत हो. उन्हें वह पूरा करते हैं. इसके अलावा गीत संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी सिखाते हैं. अब उन्हें राज्यपाल से सम्मान मिल रहा है. यह काफी खुशी की बात है- स्टूडेंट

साथी शिक्षकों के लिए प्रेरणा है बुधराम कश्यप

साथी शिक्षक लुदर्शन कश्यप का कहना है कि साल 2014 से वह बुधराम कश्यप के साथ हैं. उनके सभी कार्यों को करीब से देख रहे हैं. स्कूल में उनकी एक्टिविटी काफी सराहनीय है. कुछ समय तक प्रिंसिपल के चार्ज में भी रहे. पेड़ पौधे लगाने में अच्छा योगदान है.

साल 2014 से लगातार देख रहे हैं. बच्चों से अच्छे संबंध हैं. गांव वालों से मेल मिलाप है. बेहतर रिजल्ट देते हैं. ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल से जोड़ते हैं. लोकगीत में भी बस्तर जिले में बड़ा नाम है. संगीत की शिक्षा भी ली है. हम सभी खुश हैं कि उन्हें पुरस्कार दिया जा रहा है- लुदर्शन कश्यप, साथी शिक्षक

बुधराम कश्यप काफी ईमानदार और कर्तव्यनिष्ट शिक्षक हैं. उनको जो भी काम दिया जाता है, उसे बखूबी ईमानदारी से करते हैं. आदिवासी गीत, कला के अच्छे प्रवक्ता और संरक्षक के रूप में भी उन्हें पाया है-दीपक घोष, प्राचार्य

घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र गाडमरास के स्कूल में मिली पहली पोस्टिंग

शिक्षक बुधराम कश्यप बताते हैं कि उनकी पहली पोस्टिंग प्राथमिक शाला गाडमरास में हुई थी, जो घोर नक्सल प्रभावित क्षेत्र रहा है. साल 1995-96 में बच्चे उस स्कूल में काफी कम आते थे. फिर बच्चों के माता पिता से संपर्क कर उन्हें स्कूल से जोड़ने का काम किया. वहां के बच्चे कभी 5वीं पास नहीं किये थे. बच्चों को 5वीं पास कराया. खेदकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में आगे बढ़ाया. डॉप आउट बच्चों और उनके पालकों को समझाया. घर घर जाकर बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया.

बुधराम कश्यप कहते हैं कि गाडमरास के कोहकावाड़ा, मांझीगुड़ा, चिड़पाल जैसे स्कूलों में पोस्टिंग हुई. वर्तमान में छिंदबहार स्कूल में पोस्टिंग है. शालात्यागी(ड्रॉप आउट) छात्रों के पालकों से संपर्क कर शिक्षा की मुख्यधारा में दोबारा लौटाने का काम किया जा रहा है. निर्धन, असहाय और अनाथ बच्चों के लिए आर्थिक सहायता भी की जाती है.

बच्चों को नवाचार के जरिए शिक्षा देने की कोशिश की जा रही है. बच्चों को कक्षा की शुरुआत में गीत गाकर उनका ध्यान केंद्रित करने के बाद पढ़ाई शुरू की जाती है-बुधराम कश्यप, शिक्षक

कई बार हो चुके हैं सम्मानित

बुधराम कश्यप को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए राष्ट्रीय भीमराव अंबेडकर फेलोशिप अवार्ड दिल्ली और छत्तीसगढ़ के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के हाथों सम्मान मिल चुका है. वहीं संभाग, जिला, ब्लॉक स्तर में कई सम्मान मिले हैं.

BASTAR TEACHER Budhram Kashyap
पत्नी के साथ बुधराम कश्यप (ETV Bharat Chhattisgarh)

शिक्षक दिवस पर राज्यपाल के हाथों सम्मान मिलने की जानकारी मिली है. यह काफी गौरव का क्षण है. यह सम्मान सभी मेरे बच्चों, मेरे शाला परिवार, पालकों, शिक्षक साथियों, जनप्रतिनिधियों, दरभा और पूरे बस्तर जिले का है-बुधराम कश्यप, शिक्षक

पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा स्कूल लेकर गए

शिक्षक की पत्नी उषा कश्यप का कहना है कि कई बच्चे कई कारणों से पढ़ाई छोड़ देते हैं. उन बच्चों और उनके परिजनों तक पहुंचकर उन्हें वापस शिक्षा के क्षेत्र में लौटाने का काम उनके पति पूरे समर्पण के साथ करते हैं. इनके प्रयास से काफी बच्चों का जीवन सुधर गया है. वे अब खुशी से पढ़ाई कर रहे हैं. इनसे जितना बनता है उतना कार्य करते हैं. सोचते हैं कि कोई भी बच्चे पढ़ाई से वंचित न रहें.

BASTAR TEACHER Budhram Kashyap
क्लास में बच्चों को पढ़ाते बुधराम कश्यप (ETV Bharat Chhattisgarh)

ड्रॉप आउट बच्चों को स्कूल से जोड़ते हैं. वे चाहते हैं कि बच्चे शिक्षा से वंचित न हों, लगातार प्रयास करते हैं-उषा कश्यप, शिक्षक की पत्नी

एक शिक्षक की असली पहचान सिर्फ इस बात से नहीं होती कि उसने कितने बच्चों को किताब पढ़ाई है. बल्कि इस बात से होती है कि उसने कितने बच्चों को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया है. बुधराम कश्यप ने बच्चों को शिक्षा, खेल और संस्कृति से जोड़ने की एक नई तस्वीर बनाई है. अब शिक्षक दिवस पर मिलने वाला श्रेष्ठ शिक्षक सम्मान उनके 31 साल के इसी समर्पण की कहानी को दर्शाता है.

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