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बस्तर के करपावंड में भूमि विवाद मामला: ग्रामीणों ने रखा पक्ष, निष्पक्ष जांच और फिर से सीमांकन की मांग

भूमि विवाद को एकतरफा तरीके से पेश करने का आरोप, ग्रामीणों ने कहा- राजस्व अभिलेखों में त्रुटि ठीक करने कई बार ज्ञापन सौंप चुके

Karpawand land dispute
बस्तर के करपावंड में भूमि विवाद, ग्रामीणों ने रखा पक्ष (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 26, 2026 at 11:51 AM IST

3 Min Read
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जगदलपुर: बस्तर जिले के करपावंड भूमि विवाद मामले में अब ग्रामीणों और सर्व आदिवासी समाज ने भी खुलकर अपना पक्ष रखा है. जिला पत्रकार संघ भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में ग्रामीणों ने दावा किया कि भूमि विवाद को एकतरफा तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है. उनका कहना है कि वे लंबे समय से राजस्व अभिलेखों में कथित त्रुटियों के सुधार और विवादित भूमि के निष्पक्ष सीमांकन की मांग करते आ रहे हैं. ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है.

बस्तर जिले के करपावंड भूमि विवाद मामले में सर्व आदिवासी समाज ने रखा पक्ष (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

क्या है मामला?

ग्रामीण बंशीधर ने बताया कि ग्रामीणों ने उस कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जिसमें खसरा क्रमांक 567/2 की भूमि पर कब्जा दिलाने के लिए राजस्व अमला और पुलिस बल पहुंचा था. उनका कहना है कि गांव के जिम्मेदार लोगों, पंचायत प्रतिनिधियों, कोटवार या पुजारी को कार्रवाई की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी. ग्रामीणों का दावा है कि यदि पहले सूचना देकर सभी पक्षों की मौजूदगी में सीमांकन और कार्रवाई की जाती तो विवाद की स्थिति उत्पन्न नहीं होती. क्योंकि जिस भूमि का सीमांकन करवाया जा रहा था. वह निजी भूमि नहीं थी. जिस भूमि पर करीब 50-60 वर्षों से ग्रामीण काबिज हैं.

Karpawand land dispute
ग्रामीणों ने कहा- राजस्व अभिलेखों में त्रुटि ठीक करने कई बार ज्ञापन सौंप चुके (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

कई बार सौंपा गया है ज्ञापन

सर्व आदिवासी युवा प्रभाग के सदस्य लखेश्वर बघेल ने कहा कि ग्राम करपावंड में बंदोबस्त के दौरान तैयार किए गए नक्शों और वर्तमान राजस्व अभिलेखों में कई विसंगतियां हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने और वर्तमान खसरों के बीच भूमि के रकबे और स्थिति को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. जिससे लगातार विवाद हो रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा जा चुका है.

जल्द सीमांकन की मांग

अब तक पूरी विवादित भूमि का निष्पक्ष सीमांकन नहीं कराया गया है. ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन जल्द से जल्द विवादित भूमि का सीमांकन कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे. गांव में शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए विवाद का स्थायी समाधान जरूरी है. ग्रामीणों ने बताया कि 15 जून को कलेक्टर बस्तर को सौंपे गए ज्ञापन में भी राजस्व अभिलेखों की जांच, कथित त्रुटियों के सुधार और विवादित भूमि के सीमांकन की मांग की गई थी.

हमारा उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि गांव में शांति बनाए रखते हुए भूमि विवाद का स्थायी समाधान निकालना है. पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए. विवादित भूमि का फिर से सीमांकन कर तथ्य सार्वजनिक किए जाएं. दोषियों पर कार्रवाई की जाए.- लखेश्वर कश्यप, आदिवासी समाज युवा प्रभाग सदस्य

Karpawand land dispute
भूमि विवाद को एकतरफा तरीके से पेश करने का आरोप (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

इधर न्यायालय के आदेश के पालन में संबंधित भूमि से कब्जा हटाकर वास्तविक स्वामी को अधिकार दिलाने की कार्रवाई की जा रही थी. राजस्व विभाग के अनुसार संबंधित पक्षों को नियमानुसार नोटिस जारी किए गए थे. लेकिन मौके पर विरोध और विवाद की स्थिति निर्मित हो गई. इसके बाद शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने, मारपीट और हुज्जतबाजी के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

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