बस्तर जल जीवन मिशन का अधूरा काम, ग्रामीणों के सामने पानी की समस्या, आंदोलन की दी चेतावनी
बस्तर के कुछ गांवों में पानी की समस्या हो गई है. जल जीवन मिशन का काम अधूरा होने से ऐसी नौबत आई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 23, 2026 at 9:44 PM IST
सुनील कश्यप,संवाददाता
बस्तर : अमृत मिशन योजना के तहत शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का सपना छत्तीसगढ़ के बस्तर में सपना ही रहने वाला है. क्योंकि लोगों तक पानी पहुंचाने का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है. इसलिए ग्रामीण पानी के लिए बेहद परेशान हैं. ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट दिन ब दिन गंभीर होता जा रहा है. गर्मी के मौसम में हालात और भी विकराल हो जाते हैं.
जल जीवन मिशन का काम अधूरा
बस्तर का केशलूर गांव इसी समस्या से दो चार हो रहा है. ग्रामीण तालाब में जानवरों के साथ नहाने और कपड़े धोने को मजबूर होते हैं. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन का कार्य वर्षों से अधूरा पड़ा होने से ग्रामीणों में गहरी नाराजगी है. पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू तो हुआ, लेकिन बीच में ही रोक दिया गया. सभी घरों में पानी सप्लाई के लिए नल का कनेक्शन लगाया गया. लेकिन पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है.

क्या है सरकारी विभाग के आंकड़े
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग जगदलपुर परिक्षेत्र से मिले सरकारी आंकड़ों के अनुसार बस्तर जिले में कुल 630 ग्राम में योजना स्वीकृत हैं. 241 ग्राम के कार्य पूर्ण है. 388 गांवों में काम की स्थिति प्रगतिरत है,जबकि एक गांव में काम शुरु ही नहीं हो सका है. हर घर जल प्रमाणित ग्रामों की संख्या में ( IMIS J-8 ) 64, ऑफलाइन 57, कुल- 121 ग्राम शामिल हैं. स्थानीय युवा शंकर कश्यप ने बताया कि पानी के लिए गांव के सभी वर्ग के लोग काफी परेशान हैं. पीने और दैनिक उपयोग के लिए समय पर पानी नहीं मिलता है.
हम नहाने के लिए तालाब का सहारा लेते हैं. जिसमें लोगों के डूबने का डर है. 2 वर्ष से पानी टंकी का निर्माण तो कराया गया है. लेकिन पानी सप्लाई का कार्य एक बार भी शुरू नहीं किया गया. गांव के लोग केवल ठेकेदार को ही जानते हैं जो निर्माण कार्य नहीं करवा रहा है, बाकि अन्य जिम्मेदारों को ग्रामीण नहीं जानते हैं. चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधियों के द्वारा पानी सप्लाई का कार्य करने की बात कही गई थी लेकिन आज तक पूरी नहीं हुई- शंकर कश्यप, स्थानीय

दैनिक जरुरतों के लिए भी नहीं मिलता पानी
स्थानीय महिला पार्वती कश्यप ने कहा कि ग्रामीण पानी के लिए काफी परेशान हैं. नहाने और पीने के लिए पानी नहीं मिलता है. गांव में हैंडपंप की भी सुविधा नही है. इसके अतिरिक्त ना ही सौर ऊर्जा नल उपलब्ध है. गांव के तालाब में मवेशी भी नहाते हैं और इंसान भी उसी पानी का इस्तेमाल अपने उपयोग के लिए करते हैं. जिससे बीमारी का खतरा भी बढ़ सकता है.

पानी की समस्या के लिए प्रशासन से भी कई बार गुहार लगाई गई. लेकिन उसका समाधान नहीं हो रहा है. पानी सप्लाई का कार्य अधूरा है- पार्वती कश्यप, स्थानीय
पानी की समस्या से काफी परेशान हैं. पानी के समाधान के लिए स्थानीय विधायक के पास भी गए थे,लेकिन समाधान नहीं हुआ. सौर ऊर्जा नल की भी मांग की गई. लेकिन मांगें भी पूरी नहीं हुई- भागवती गुप्ता,स्थानीय
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि भी मांगों को ऊपर तक नहीं पहुंचाते. पानी की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन के लिए मजबूर होंगे. ग्रामीणों की मांग है कि जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों की तत्काल समीक्षा कर पूरे किए हो, ताकि गर्मी के कठिन समय में उन्हें पेयजल के लिए भटकना न पड़े.
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