बड़वानी में पहली कृषि कैबिनेट बैठक, मोहन यादव सरकार ने मालवा-निमाड़ के लिए खोला खजाना
बड़वानी में हुई मध्य प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट बैठक, मालवा-निमाड़ के 7 जिलों पर फोकस, 16 योजनाओं पर होगा 27 हजार 746 करोड़ खर्च.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 3:05 PM IST
|Updated : March 2, 2026 at 3:17 PM IST
रिपोर्ट: ब्रिजेंद्र पटेरिया
बड़वानी/भोपाल: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रदेश की पहली कृषि कैबिनेट की बैठक बड़वानी के नागलवाड़ी के शिखरधाम में आयोजित की गई. कैबिनेट की बैठक में निमाड़ अंचल के 7 जिलों को केन्द्रित खेती और विकास योजनाओं को लेकर निर्णय लिए गए. बैठक में कृषि कल्याण के तहत 6 अलग-अलग विभागों की 16 योजनाओं पर निर्णय लिया गया. इस योजनाओं पर सरकार 27 हजार 746 करोड़ की राशि खर्च करेगी. कैबिनेट की बैठक में राज्य सरकार ने वरला और पानसेमल सिंचाई परियोजना को मंजूरी दी. इससे 38 हजार हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में सिंचाई का किसानों को लाभ मिलेगा.
कैबिनेट की बैठक में यह लिए गए निर्णय
नागलवाड़ी के प्रसिद्ध भीलटदेव मंदिर के तलहटी में कैबिनेट की बैठक के लिए 8 एकड़ के गार्डन में अस्थायी डोम तैयार किए गए. इसमें कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई. कैबिनेट की बैठक में कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल को छोड़ बाकी सभी मंत्री शामिल हुए. कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णयों की जानकारी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी.
सीएम मोहन यादव ने बताया कि "निमाड़ अंचल के अंदर खेती, बागबानी और फलोदयान के क्षेत्र में तरक्की हुई है. केन्द्र सरकार की मदद से सरदार सरोवर के डैम बनने के बाद सभी तरह की सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुई है और इसकी वजह से क्षेत्र हराभरा हुआ है. कैबिनेट की बैठक में 6 अलग-अलग विभागों की 16 योजनाओं में निर्णय लिए गए हैं. 27746 करोड़ का भार सरकार वहन करेगी. यह राशि किसान कल्याण के लिए खर्च की जाएगी.

विभागवार देखें तो कृषि कल्याण विभाग में 3502 करोड़ की राशि खर्च होगी. उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण की तीन योजनाओं पर 4264 करोड़ की राशि खर्च होगी. डेयरी एवं पशुपालन विभाग की 4 योजनाओं में 9 हजार 408 करोड़ की राशि खर्च होगी. मछुआ कल्याण की 2 योजनाओं पर 218.50 करोड़ राशि खर्च होगी. सहकारिता विभाग की 4 योजनाओं पर 8186 करोड़ की राशि खर्च होगी. नर्मदा घाटी विकास विभाग में 2068 राशि खर्च होगी.
कैबिनेट की बैठक में नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत वरला घाटी माइक्रो सिंचाई परियोजना के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई. 861 करोड़ की इस सिंचाई परियोजना से 15500 हेक्टेयर की सिंचाई होगी.
पान सेमल सिंचाई परियोजना में पान सेमल के 53 गांवों के 22500 हेक्टेयर की सिंचाई होगी. इस परियोजना पर 1208 करोड़ की राशि खर्च होगी.

निमाड़ क्षेत्र में केला, मिर्च, आम, सब्जियों का 30 हजार 660 हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है. क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग की भरपूर संभावनाएं हैं. इससे उद्यानिकी फसलों के उत्पादन में वृद्धि होगी. फूड मार्केटिंग को बढ़ावा देने, क्लस्टर विकास में अद्योसंरचना को बढ़ाने, कोल्ड स्टोरेज, ग्रेडिंग क्षमता को बढ़ाने बड़वानी के अंदर सभी तरह की फसलों के लिए आधुनिक सब्जी मंडी बनाई जाएगी.
बड़वानी में पाटी सूक्ष्म माइक्रो इरीगेशन सिंचाई परियोजना के तहत 5900 हेक्टेयर में सिंचाई का लाभ दिए जाने का निर्णय लिया गया. इससे फसल का उत्पादन बढ़ेगा.
बड़वानी में खेतिया के उपज मंडी को आदर्श उपज मंडी बनाया जाएगा. यहां कपास और मक्के को लाभ मिलेगा. 10 करोड़ की लागत से इसे विकसित किया जाएगा.
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निमाड़ के 25 किसानों को प्राकृतिक खेती का मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा. इन्हें प्रदेश के बाहर ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा. इसके बाद दूसरे क्षेत्र के किसानों को भी ट्रेनिंग के लिए भेजा जाएगा.
बड़वानी क्षेत्र के बीज निगम प्रक्षेप में 50 एकड़ क्षेत्र को आर्दश प्रक्षेप बनाया जाएगा. यहां उच्च गुणवत्ता का बीज केन्द्र बनाया जाएगा.

मछुआ कल्याण और नर्मदा सरोवर के डूब प्रभावित मछुआ के आजीविका को बढ़ाने के लिए 5 हजार केजों के माध्यम से हाइड्रोपोनिक्स, एक्वापोनिक्स फिस फार्मिंग इकोटूरिज्म को बढ़ावा देगी.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि कैबिनेट की बैठक में क्लस्टर और फूड प्रोसेसिंग इकाई की नीति को पांच साल के लिए स्वीकृति दी गई है."

