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सड़क, पानी और शिक्षा को तरस रहा निमाड़ का 'पेरिस', गड्ढा खोदकर झिरी से पेयजल निकाल रहे

बड़वानी जिले में स्थापना के 28 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं का अभाव, पानी-स्वास्थ्य-शिक्षा और रेल मार्ग आज भी बड़ी चुनौती.

barwani Water Crisis
पानी को तरसा बड़वानी जिला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : May 25, 2026 at 3:20 PM IST

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Updated : May 25, 2026 at 3:25 PM IST

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बड़वानी: मध्य प्रदेश के अंतिम छोर पर महाराष्ट्र सीमा से लगे बड़वानी जिले की स्थापना को 28 वर्ष पूरे हो चुके हैं. लेकिन आज भी जिले के ग्रामीण और पहाड़ी अंचलों में रहने वाले हजारों लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं. पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और रेल मार्ग जैसी आवश्यक सुविधाओं के अभाव ने जिले के विकास की गति को प्रभावित किया है. वर्षों से विकास के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत अब भी ग्रामीणों की परेशानियों को बयां करती नजर आती है.

बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा बड़वानी
कभी अपनी ऐतिहासिक पहचान, पुराने किलों और रियासतकालीन इमारतों के कारण 'निमाड़ का पेरिस' कहलाने वाला बड़वानी आज बुनियादी जरूरतों के संकट से जूझ रहा है. जिले के कई ऐतिहासिक भवन और किले जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं, जिनके संरक्षण को लेकर भी लंबे समय से मांग उठती रही है. दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोगों को पीने के साफ पानी के लिए कई किलोमीटर तक भटकना पड़ रहा है.

गड्ढा खोदकर झिरी से पेयजल निकालन रहे लोग (ETV Bharat)

गड्ढे खोदकर झिरी से निकाल रहे पानी
पाटी विकासखंड के खेरवानी, सेमलेट, पीपरकुंड, चेरवी और सागमाल जैसे पहाड़ी गांवों में आज भी लोग जमीन में गड्ढे खोदकर झिरी से पानी निकालने को मजबूर हैं. कई गांवों में दूषित नदी-नालों का पानी ही लोगों की प्यास बुझाने का सहारा बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि गर्मी के दिनों में हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं. सरकार की जल जीवन मिशन योजना के बावजूद कई गांवों तक नियमित और शुद्ध पेयजल नहीं पहुंच पाया है.

अस्पतालों में डॉक्टर को कमी
समाजसेवी अजीत जैन ने बताया कि, ''आजादी के सात दशक और जिले की स्थापना के 28 वर्षों बाद भी स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. जिला अस्पताल से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है. कई ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को उपचार के लिए घंटों का सफर तय करना पड़ता है. वहीं शिक्षा व्यवस्था भी बदहाल नजर आती है. कई सरकारी स्कूल अतिथि शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रहे हैं, जबकि अनेक स्कूलों में बिजली जैसी मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं है.

MP villagers fetch water from wells
मीलों चल कुएं से पेयजल निकालने की मजबूरी (ETV Bharat)

बारिश में सड़कें बन जाती हैं दलदल
ग्रामीण अंचलों में सड़क व्यवस्था भी बड़ी समस्या बनी हुई है. पहाड़ी इलाकों में कई गांव ऐसे हैं, जहां चार पहिया वाहन तक आसानी से नहीं पहुंच पाते. बरसात के दिनों में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है, जिससे ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और बाजार तक पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

Barwani
ऐतिहासिक भवनों की हालत हुई खस्ता (ETV Bharat)

अधिवक्ता शिवपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि, ''जिले की स्थापना के बाद से ही रेल लाइन की मांग सबसे प्रमुख मुद्दा रही है. लेकिन रेल सुविधा के अभाव में जिले का विकास प्रभावित हो रहा है.''

बड़वानी कृषि प्रधान जिला है. जहां केला, मिर्च, टमाटर और कपास जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं. यहां की कृषि उपज देश-विदेश तक पहुंचती है, लेकिन बेहतर परिवहन सुविधा नहीं होने से किसानों और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. अधिवक्ता शिवपाल सिंह सिसोदिया ने कहा कि ''विकास का विकेंद्रीकरण केवल शहरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि गांव-गांव तक सुविधाएं पहुंचना जरूरी है.''

water extracted by digging hole
बुनियादी जरूरतों से जूझ रहा बड़वानी (ETV Bharat)

मंत्री बोले-पेयजल के लिए कर रहे काम
वहीं. जिले में लगातार उठ रहे सवालों पर प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल ने कहा कि, ''सरकार पेयजल समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य कर रही है. हर मजरे, टोले और फलिये तक शुद्ध पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है और प्रशासन की टीमें लगातार धरातल पर काम कर रही हैं.'' इधर बड़वानी कलेक्टर जयति सिंह ने स्वीकार किया कि, जिले में डॉक्टरों और स्वास्थ्य स्टाफ की कमी है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाया जा सकें.''

28 साल पूरे होने के बाद भी बड़वानी जिले में मूलभूत सुविधाओं को लेकर उठ रहे सवाल यह दर्शाते हैं कि विकास की योजनाएं अभी भी ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाई हैं. जिले के लोग अब केवल घोषणाएं नहीं, बल्कि जमीन पर स्थायी समाधान और विकास की उम्मीद कर रहे हैं.

Last Updated : May 25, 2026 at 3:25 PM IST