बड़वानी में होली पर 831 साल पुरानी गाड़ा खिंचाई की परंपरा, बड़वे के हाथ लगते ही चल पड़ते हैं गाड़े
बड़वानी की ऐतिहासिक गाड़ा खिंचाई की परंपरा आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की है प्रतीक. ठीकरी, अंजड़ और नवलपुरा क्षेत्र में उत्साह.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 3, 2026 at 1:34 PM IST
|Updated : March 3, 2026 at 3:00 PM IST
रिपोर्ट: आदित्य शर्मा
बड़वानी: होली पर गोधूलि बेला में गाड़ा खिंचाई की ऐतिहासिक परंपरा बड़वानी में आज भी जारी है. 831 साल पुरानी गाड़ा खिंचाई की यह पुरानी परंपरा संत खांडेराव महाराज और फखरुद्दीन बाबा की स्मृति में आयोजित की जाती है. बुधवार 4 मार्च को धुलेंडी पर गोधूलि बेला में यह परंपरा ठीकरी, अंजड़ और नवलपुरा क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ आयोजित की जाएगी. विक्रम संवत 1252 से लगातार चली आ रही यह परंपरा आज भी क्षेत्र की आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है.
ठीकरी से होगी गाड़ा खिंचाई के आयोजन की शुरुआत
गाड़ा खिंचाई के आयोजन की शुरुआत पारंपरिक विधि-विधान के साथ ठीकरी से होगी. होली के एक दिन पहले रात में बाबा खांडेराव महाराज मंदिर से गाड़ों को गाड़ा मैदान लाया जाता है. धुलेंडी के दिन दोपहर दर्शन के पश्चात मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं. गोधूलि बेला में बड़वा एडू यादव के बाहर आने पर सारथी उन्हें कंधे पर बैठाकर गाड़ा मैदान तक ले जाते हैं.
इसके बाद मलिहार चौक पर पारंपरिक मकड़ी यंत्र घुमाने की रस्म अदा की जाती है. इसके बाद जैसे ही बड़वा चंदन की जोड़ी को कंधे पर धारण कर गाड़ों को स्पर्श करेंगे, रेल की तरह एक-दूसरे से बंधे भारी-भरकम गाड़े स्वतः चल पड़ेंगे. अंतिम गाड़े के तोरण पार करते ही गाड़ा खिंचाई की रस्म पूर्ण मानी ली जाती है.

अंजड़ में खींचे जाएंगे 7 गाड़े
अंजड़ में भी यह आयोजन बुधवार की शाम 6 बजे से बस स्टैंड क्षेत्र से प्रारंभ होगा. बड़वा संतोष धनगर यादव मोहल्ले से ढोल-नगाड़ों के साथ निकलकर हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन करेंगे और आशीर्वाद लेकर आयोजन स्थल पहुंचेंगे. बस स्टैंड से भोंगली नदी पुलिया तक 7 गाड़े खींचे जाएंगे. मकड़ी यंत्र घुमाने के बाद बड़वा का कंधा लगते ही गाड़े जयघोष के बीच चल पड़ेंगे. हर साल की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना है.

बड़वानी में होगा अलग माहौल
नवलपुरा क्षेत्र की बात करें तो यहां भी गाड़े खींचे जाने की परंपरा है. बड़वा राकेश यादव ने बताया कि "यहां गाड़ा खिंचाई के आयोजन का यह 20वां साल है. यहां लगभग 14 से 15 गाड़ों को एक साथ बांधकर हल्दी-कुमकुम से सजाया जाएगा. महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में गाड़ों पर सौभाग्य तिलक कर पूजन करेंगी."

बड़वा राकेश यादव खांडेराव-खांडेराव के जयघोष के साथ गाड़ों को स्पर्श करेंगे और कई टन वजनी गाड़े आगे बढ़ते नजर आएंगे. पूरे मार्ग पर रंगोली और गुलाल से सजावट की जाएगी. श्रद्धालु मार्ग के दोनों ओर और मकानों की छतों से इस अद्भुत दृश्य के साक्षी बनेंगे.
हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है गाड़ा खिंचाई परंपरा
यह परंपरा हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल भी मानी जाती है. मान्यता के अनुसार संत खांडेराव महाराज और उनके मित्र पीर मोईनुद्दीन चिश्ती वर्षों पूर्व भ्रमण करते हुए ठीकरी पहुंचे थे. उन्होंने ग्रामीणों को चमत्कार दिखाकर आपसी भाईचारे और गांव की उन्नति के लिए गाड़ा खिंचाई की परंपरा प्रारंभ करने का संदेश दिया था. तभी से यादव परिवार के बड़वा इस आयोजन का निर्वहन करते आ रहे हैं.
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सांस्कृतिक धरोहर की अनूठी मिसाल
गोधूलि बेला में बड़वा के कंधा लगते ही गाड़ों का चल पड़ना श्रद्धालुओं के लिए आस्था और चमत्कार का प्रतीक माना जाता है. सदियों से चली आ रही यह परंपरा सामाजिक समरसता, धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक धरोहर की अनूठी मिसाल है. 4 मार्च को एक बार फिर बड़वानी में हजारों लोगों की मौजूदगी में यह ऐतिहासिक दृश्य साकार होगा और गाड़ा खिंचाई की परंपरा पूरे श्रद्धाभाव के साथ निभाई जाएगी. इस आयोजन को लेकर नगर परिषद और पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा, पार्किंग, पेयजल और भीड़ प्रबंधन के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं.

