बड़वानी में मिर्च वाले वायरस का कहर, किसान खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने मजबूर
बड़वानी में मिर्च किसानों पर आई आफत, कीट-रोगों से पैदावार खराब, मंडी में नहीं मिल रही खरीद. अन्नदाताओं के सामने पूंजी जुटाने का संकट. रिपोर्ट-आदित्य-शर्मा.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 29, 2026 at 2:49 PM IST
बड़वानी: राजपुर क्षेत्र में मिर्च की फसल पर वायरस जनित बीमारी का कहर देखने को मिल रहा है. खेतों में लहलहाने वाली मिर्च की फसल अब किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती नजर आ रही है. कई खेतों में मिर्च के पौधों की पत्तियां सिकुड़ने लगी हैं, पौधों की पैदावार प्रभावित हो रही है और फलों का आकार भी सामान्य से काफी छोटा रह गया है. किसानों का कहना है कि ये येलो मोजेक वायरस समेत अन्य बीमारियों का प्रकोप है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है. बीमारी और कम उत्पादन के साथ मंडी में छोटी मिर्च का अपेक्षित भाव भी नहीं मिलने से किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है.
महीनों की मेहनत हुई बर्बाद
हालात इतने खराब बताए जा रहे हैं कि कई किसान तैयार खड़ी फसल को बचाने की कोशिश करने के बजाय उसे खेत से उखाड़कर फेंकने को मजबूर हैं. कुछ किसानों ने बीमारी से प्रभावित फसल पर रोटावेटर चलाकर खेत खाली कर दिया है, ताकि समय रहते अगली फसल की तैयारी की जा सके. किसानों का कहना है कि जिस फसल से अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, उसी फसल ने अब उन्हें भारी आर्थिक नुकसान में डाल दिया है.
अन्नदाताओं के सामने पूंजी जुटाने का संकट
राजपुर क्षेत्र के किसान रमेश शोभाराम कुशवाहा ने बताया, " मैंने करीब दो एकड़ जमीन में मिर्च की फसल लगाई थी. फसल पर एक लाख रु से अधिक की लागत आई, लेकिन वायरस के प्रकोप के बाद पूरी फसल खराब होने की स्थिति में पहुंच गई. किसान के सामने अब लागत की भरपाई करना तो दूर, आगे की खेती के लिए पूंजी जुटाने का भी संकट खड़ा हो गया है."

खड़ी फसल पर ट्रैक्टर चलाने को मजबूर
रमेश ने आगे बताया, "खेती में बीज, खाद, दवा, सिंचाई और मजदूरी सहित लगातार खर्च होता रहा, लेकिन बीमारी के कारण फसल अपेक्षित रूप से तैयार नहीं हो सकी. ऐसे में किसान के लिए खेत में खड़ी फसल को रखना भी नुकसान का सौदा साबित हो रहा है." वहीं एक अन्य किसान शुभम ने बताया, "मैंने करीब तीन एकड़ में मिर्च की फसल लगाई थी, इस फसल पर लगभग ढाई से तीन लाख रु खर्च हुए. शुरुआत में फसल अच्छी दिखाई दे रही थी और किसान को बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन वायरस के प्रकोप ने पूरी स्थिति बदल दी."
किसानों ने कलेजे पर पत्थर रख लिया कठिन फैसला
बीमारी बढ़ने के बाद पौधों की हालत लगातार खराब होती गई. फल छोटे रह गए और उत्पादन में भारी कमी आने लगी. आखिरकार किसान को खड़ी फसल पर रोटावेटर चलाने का फैसला लेना पड़ा. किसान के मुताबिक यह फैसला इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में लेना पड़ा है, क्योंकि खराब फसल को खेत में रखने से आगे की खेती भी प्रभावित होने का खतरा था.
उचित मुआवजे की मांग
बड़वानी में बड़े क्षेत्र में मिर्च की खेती होती है. इस साल करीब 20 हजार हेक्टेयर में मिर्च की फसल लगाए जाने की बात सामने आ रही है. ऐसे में अगर बीमारी का प्रकोप बड़े क्षेत्रों में फैल गया है तो किसानों को होने वाला आर्थिक नुकसान भी काफी बड़ा हो सकता है. ऐसे में किसानों ने नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों के उचित मुआवजे की मांग की है.
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मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
किसान संगठनों ने स्पष्ट किया है कि अगर शासन-प्रशासन की ओर से फसल का जल्द सर्वे शुरू नहीं किया गया और प्रभावित किसानों को राहत नहीं मिली तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है. अब किसानों की नजर शासन-प्रशासन पर टिकी हुई है. किसान चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द प्रभावित खेतों का सर्वे कराए, नुकसान का वास्तविक आकलन करें और पात्र किसानों को मुआवजा तथा फसल बीमा का लाभ दिलाए. अगर समय रहते सरकार ने मदद नहीं की तो मिर्च की फसल में हुए नुकसान का असर केवल इस सीजन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले कृषि सीजन में भी किसानों की आर्थिक स्थिति पर इसका असर पड़ सकता है.

