बड़वानी में भगोरिया हाट की धूम, पारंपरिक वेशभूषा में जमकर थिरके युवक-युवतियां
बड़वानी में धूमधाम से मनाया जा रहा भगोरिया हाट, दशहरा मैदान में उमड़ा जनसैलाब. पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए लोग.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : March 1, 2026 at 10:44 PM IST
बड़वानी: मध्य प्रदेश के बड़वानी में आदिवासी समाज का पारंपरिक और बहुप्रतीक्षित भगोरिया हाट पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है. 24 फरवरी को पलसूद से शुरू हुए इस सांस्कृतिक पर्व ने पूरे जिले को उत्सव के रंग में रंग दिया है. शनिवार को बड़वानी शहर के दशहरा मैदान में आयोजित भगोरिया हाट में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी. सुबह से ही मैदान और आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल का माहौल नजर आया.
आदिवासियों ने संस्कृति की झलक पेश की
दशहरा मैदान में चारों ओर रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक और युवतियां नजर आए. ढोल-मांदल की गूंज पर लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए. युवाओं ने पारंपरिक साफा-फेंटा बांधा तो युवतियों ने चांदी के आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार से अपनी संस्कृति की झलक पेश की. बुजुर्गों ने लोकगीत गाकर वातावरण को और भी जीवंत बना दिया. पूरा मैदान आदिवासी परंपराओं, संगीत और उल्लास से सराबोर दिखा.
परंपरा का पर्व भगोरिया
होली से पहले भगोरिया हाट मनाया जाने वाला आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है. यह केवल खरीद-फरोख्त का बाजार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण अवसर है. भगोरिया को प्रेम और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक भी माना जाता है. होलिका दहन तक अलग-अलग स्थानों पर हाट आयोजित होते हैं और इसके साथ ही पर्व का समापन होता है.

बाजार में दिखी विशेष रौनक
दशहरा मैदान में सजी दुकानों पर कृषि उत्पाद, वन उपज, महुआ, तेंदूपत्ता, स्थानीय हस्तशिल्प, घरेलू सामग्री, श्रृंगार की वस्तुएं और पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे. महिलाओं ने होली पूजन सामग्री की खरीदी की, वहीं बच्चों ने खिलौनों और मिठाइयों का आनंद लिया. त्योहार से एक सप्ताह पहले ही नए कपड़ों और आभूषणों की खरीदारी शुरू हो गई थी.

'आदिवासी संस्कृति को सहेजना हमारी जिम्मेदारी'
भगोरिया हाट आयोजन में जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की और लोगों को शुभकामनाएं दीं. पूर्व विधायक प्रतिनिधि विष्णु बंडे ने कहा, "भगोरिया हाट हमारी आदिवासी संस्कृति की पहचान है और इसे सहेजना सभी की जिम्मेदारी है." वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी दूधी राम ने बताया, "यह पर्व समाज को एकजुट रखने और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है."

- बागेश्वर धाम में 305 जोड़ों का विवाह, साधु-संतों ने दिया आशीर्वाद, 8 देशों के राजदूत थिरके
- अभिमन्यु ने इशिता संग लिए सात फेरे, बाबा रामदेव ने किया मंत्रोच्चार, जमकर थिरके मोहन यादव
भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा सुरक्षा, यातायात, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की गई. पूरे आयोजन के दौरान शांति और सुव्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात रहा. दशहरा मैदान में सजा भगोरिया हाट एक बार फिर जिले की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की झलक लेकर आया. आने वाले दिनों में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी उत्साह के साथ हाट आयोजित होंगे और होलिका दहन के साथ इस पारंपरिक पर्व का समापन होगा.

