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दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर बारनवापारा अभयारण्य में हुआ कैप्चर

छत्तीसगढ़ के वन्य जीव अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाने जाते हैं.

Courtesy Dr Dilip Verma photographer
दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 1, 2026 at 12:44 PM IST

5 Min Read
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बलौदा बाजार: वन्य अभयारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता और अनूठी पारिस्थितिकीय तंत्र के जाने जाते हैं. इसी वजह से ये राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति प्रेमियों का ध्यान ये वन्य अभयारण्य अपनी ओर आकर्षित करते हैं. इसी कड़ी में बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य ने साल के अंतिम दिनों में एक ऐसे ही ऐतिहासिक रिकॉर्ड दर्ज किया है, जिसने प्रदेश के वन्यजीव मानचित्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

दरअसल, बारनवापारा अभयारण्य में पहली बार दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर (Black-capped Kingfisher) देखा गया है, जिसकी पुष्टि भी की गई है. दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर को बारनवापारा में पहली बार देखा गया है. जानकारों की मानें तो छत्तीसगढ़ में दूसरी बार इस दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर का दीदार हुआ है.

बर्ड फोटोग्राफर दिलीप वर्मा का बयान (ETV BHARAT)

29 दिसंबर की सुबह, जब जंगल ने दिया दुर्लभ तोहफा

29 दिसंबर 2025 की सुबह बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य की हरियाली के बीच एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ. प्रकृति प्रेमी डॉ. दिलीप वर्मा ने अपने नियमित बर्ड वाचिंग के दौरान ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर को देखा. प्रकृति प्रेमी डॉ. दिलीप वर्मा ने तत्काल इस क्षण को अपने कैमरे में कैप्चर कर लिया. फील्ड फोटोग्राफिक साक्ष्यों के साथ विधिवत दस्तावेजों की मदद से इस बात की पुष्टि हुई की देखा गया पक्षी दुर्लभ किंगफिशर ही है. तस्वीरों और रिकॉर्ड के आधार पर विशेषज्ञों ने इसकी पहचान की पुष्टि की, जिससे यह दुर्भल पक्षी और उसकी तस्वीर वैज्ञानिक रूप से मान्य हुआ.

Courtesy Dr Dilip Verma photographer
दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर (ETV Bharat)


क्यों खास है ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का बारनवापारा में दिखना

ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर को पक्षी विज्ञान की दुनिया में एक दुर्लभ और विशिष्ट प्रजाति माना जाता है. यह पक्षी सामान्यतः तटीय क्षेत्रों जैसे मैंग्रोव वन, समुद्र या खारे पानी के आसपास के इलाकों पाया जाता है. ऐसे में आंतरिक भू-भाग में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य जैसे क्षेत्र में इसकी उपस्थिति कई महत्वपूर्ण संकेत देती है.

विशेषज्ञों के मुताबिक दुर्लभ किंगफिशर का पाया जाना इस बात का प्रमाण है कि अभयारण्य में जल-आधारित आवास (Wetland Habitat) मौजूद है. पारिस्थितिक संतुलन अनुकूल है और जैव विविधता लगातार समृद्ध हो रही है.

Courtesy Dr Dilip Verma photographer
दुर्लभ ब्लैक कैप्ड किंगफिशर (ETV Bharat)



छत्तीसगढ़ में दूसरी बार देखा गया किंगफिशर पक्षी, पहले कांगेर वैली में दिखाई दिया था

इससे पहले साल 2024 में ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का पहला पुष्ट रिकॉर्ड कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान से सामने आया था. वहां क्रोकोडाइल सर्वे के दौरान दर्ज किया गया था, जिसे छत्तीसगढ़ से इस प्रजाति का पहला प्रमाणित रिकॉर्ड माना गया. अब बारनवापारा अभयारण्य से मिला यह दूसरा रिकॉर्ड बताता है कि छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्र धीरे-धीरे दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों के लिए भी सुरक्षित आश्रय स्थल बन रहे हैं.


जलवायु परिवर्तन में आया बदलाव

डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा किंगफिशर पक्षी को कैमरे में कैप्चर किया जाना एक रिकार्ड मात्र नहीं है. वन विभाग और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, यह नई तस्वीर भविष्य के पक्षी-विविधता अध्ययन, संरक्षण रणनीति निर्माण, अभयारण्य प्रबंधन योजनाओं के लिए एक मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगा. इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन पर्यावरणीय परिस्थितियों में यह प्रजाति आंतरिक क्षेत्रों तक पहुंच रही है. जल स्रोतों और वन संरचना की भूमिका क्या है? जलवायु परिवर्तन और प्रवासी मार्गों में क्या बदलाव हो रहे हैं?


बारनवापारा अभयारण्य: जैव विविधता का उभरता केंद्र

बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य पहले से ही अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां तेंदुआ, भालू, गौर, कृष्णमृग, सांभर, जंगली सूअर जैसे वन्यजीव प्राकृतिक आवास में देखे जाते हैं. इसके साथ ही यह क्षेत्र 200 से अधिक पक्षी प्रजातियों का आश्रय स्थल भी है, जो इसे बर्ड वॉचर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए खास बनाता है. ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का नाम इस लिस्ट में जुड़ना इस सूची को और समृद्ध बनाएगा.



संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह दुर्लभ तस्वीर इस बात का भी संकेत है कि अभयारण्य में किए जा रहे संरक्षण प्रयास सही दिशा में काम कर रहे हैं. इंसानी हस्तक्षेप को नियंत्रित किया जा रहा है. जल स्रोतों और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखा जा रहा है. बारनवापारा में सुरक्षित और सतत इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है.


बर्डिंग संस्कृति को मिली नई ऊर्जा

बर्ड वाचिंग ने छत्तीसगढ़ में तेजी से उभर रही बर्डिंग संस्कृति को भी नई ऊर्जा दी है. स्थानीय बर्ड वाचर , फोटोग्राफर्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक प्रेरणादायक पल है, जो यह साबित करता है कि सही संरक्षण और जागरूकता से प्रदेश वैश्विक स्तर की जैव विविधता को संरक्षित कर सकता है.



अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर बारनवापारा की पहचान

ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर जैसी दुर्लभ प्रजाति का रिकॉर्ड बारनवापारा को केवल एक अभयारण्य नहीं, बल्कि शोध का केंद्र, बर्डिंग हॉटस्पॉट, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने योग्य प्राकृतिक स्थल के रूप में स्थापित करता है. आने वाले समय में यह बर्ड वाचिंग विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकता है, जिससे इको-टूरिज्म और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिलेगा.



प्रकृति का संदेश: संरक्षण ही भविष्य

बारनवापारा में मिला यह दुर्लभ पक्षी एक संदेश भी देता है. यह बताता है कि यदि जंगल, जल और जैव विविधता को सुरक्षित रखा जाए, तो प्रकृति खुद अपनी संपदा हमारे सामने प्रकट करती है.

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