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खैरागढ़ में दिखा अनोखा पक्षी तो लोगों ने गरुड़ समझकर की पूजा, वन विभाग की जांच में सच्चाई आई सामने

शेरगढ़ गांव में अनोखे पक्षी को गरुड़ समझा गया हालांकि वन विभाग की जांच में पता चला कि वह बार्न उल्लू का बच्चा है.

Garuda Bird Misunderstanding
खैरागढ़ में दिखा अनोखा पक्षी तो लोगों ने गरुड़ समझकर की पूजा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : January 2, 2026 at 8:38 PM IST

2 Min Read
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खैरागढ़: जिले के शेरगढ़ गांव में एक अनोखी घटना सामने आई. गांव के कर्मा भवन में एक अजीब सा पक्षी दिखाई दिया. उसे देखकर ग्रामीणों को लगा कि यह गरुड़ पक्षी है. देखते ही देखते लोगों में कौतूहल और आस्था का माहौल बन गया और ग्रामीणों ने इसे दैवी संकेत मानकर पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया.

वन विभाग की जांच में सामने आई सच्चाई: जब इस मामले की जानकारी वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों को मिली, तो उन्होंने मौके पर पहुंचकर जांच की. जांच में साफ हुआ कि जिसे गरुड़ समझा जा रहा था, वह कोई दिव्य या पौराणिक पक्षी नहीं बल्कि बार्न उल्लू का बच्चा था.

शेरगढ़ गांव में अनोखे पक्षी को गरुड़ समझा गया, वह बार्न उल्लू का बच्चा है. (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

बार्न उल्लू कैसा होता है?: विशेषज्ञों के अनुसार बार्न उल्लू का चेहरा गोल और सफेद होता है. इसकी आंखें बड़ी होती हैं और शरीर पर हल्के रोएं होते हैं. इन्हीं कारणों से पहली नजर में लोगों को यह गरुड़ जैसा दिखाई दे सकता है. असल में यह एक सामान्य उल्लू प्रजाति है, जो पर्यावरण के लिए बेहद उपयोगी मानी जाती है.

किसानों का मित्र है बार्न उल्लू: वन्यजीव जानकारों का कहना है कि बार्न उल्लू किसानों का सच्चा दोस्त होता है. यह चूहे और अन्य हानिकारक जीवों का शिकार करता है, जिससे फसलों को नुकसान कम होता है. यह पक्षी रात में सक्रिय रहता है और दिन के समय पुराने भवनों, गोदामों या शांत जगहों में छिपा रहता है. इसके बच्चे उड़ने से पहले जमीन या कोनों में दिखाई दे सकते हैं, जिससे लोगों को भ्रम हो जाता है.

Garuda Bird Misunderstanding
वन विभाग की जांच में सच्चाई आई सामने (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

अंधविश्वास से बचने की अपील: वन विभाग और विशेषज्ञों ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे ऐसे पक्षियों के साथ छेड़छाड़ न करें. बार्न उल्लू वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है और इसे नुकसान पहुंचाना कानूनी अपराध है. लोगों से कहा गया है कि अंधविश्वास के बजाय सही जानकारी और वैज्ञानिक सोच अपनाएं.

लोक आस्था और विज्ञान के बीच संतुलन जरूरी है. जानकारी की कमी से अंधविश्वास फैलता है, जबकि जागरूकता से न केवल वन्य जीवों की रक्षा होती है बल्कि पर्यावरण और जैव विविधता भी सुरक्षित रहती है.

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