Barmer Crude Oil Leak : जमीन से निकल रहा क्रूड ऑयल, हरीश चौधरी ने विधानसभा में उठाया मुद्दा
हरीश चौधरी ने विधानसभा में उठाया मंगला एवं ऐश्वर्या ऑयल फील्ड क्षेत्र में पर्यावरणीय संकट का गंभीर मुद्दा.

Published : February 26, 2026 at 4:10 PM IST
बाड़मेर: राजस्थान के बाड़मेर जिले के कवास में ऐश्वर्या ऑयल फील्ड के वेलपैड संख्या-8 के पास पिछले 4 दिनों से एक खेत में भारी मात्रा में क्रूड ऑयल निकल रहा है. कंपनी के कर्मचारी जुगाड़ी तरीके के एक गड्ढा खोदकर क्रूड ऑयल को टैंकर में भरकर ले जा रहे हैं, लेकिन यह क्रूड कहां से लीक हो रहा है, इस बात का पता नहीं चल पाया है. आरोप है कि इससे किसान का खेत खराब हो रहा है.
इधर बायतू विधायक हरीश चौधरी ने गुरुवार को विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से बाड़मेर जिले के मंगला ऑयल फील्ड एवं ऐश्वर्या ऑयल फील्ड क्षेत्र में लगातार हो रही ब्लास्टिंग, भूमि धंसाव, क्रूड ऑयल रिसाव एवं संभावित पर्यावरणीय संकट का अत्यंत गंभीर मुद्दा सदन के समक्ष उठाया.
विधायक चौधरी ने कहा कि बाड़मेर जिले के तेल उत्पादन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों के कारण स्थानीय ग्रामीणों, किसानों एवं सार्वजनिक ढांचों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है. विगत वर्षों से छीतर का पार, काऊखेड़ा, कवास सहित आसपास के गांवों में लगातार भू-कंपन, विस्फोट गतिविधियों एवं भूमि धंसाव की घटनाओं से आवासीय भवनों, विद्यालय परिसरों एवं स्वास्थ्य संस्थानों को नुकसान पहुंचने की शिकायतें मिलती रही हैं.
पढ़ें : पेट्रोल की खपत घटाएगी और गुणवत्ता बढ़ाएगी बाड़मेर इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों की नई तकनीक
कवास क्षेत्र में क्रूड ऑयल रिसाव ने बढ़ाई चिंता : उन्होंने बताया कि 24 फरवरी 2026 को कवास स्थित ऐश्वर्या ऑयल फील्ड के वेलपैड-8 के समीप एक कृषक की भूमि में अचानक दरार उत्पन्न होने के बाद कच्चे तेल का रिसाव शुरू हो गया, जो 48 घंटे से अधिक समय तक पूर्ण रूप से नियंत्रित नहीं किया जा सका. उन्होंने कहा कि तेल के बहाव को रोकने के लिए लगभग 100 मीटर लंबी अस्थायी नाली बनाकर तेल को मोड़ा गया और वैक्यूम टैंकरों के माध्यम से संग्रहण किया गया. हालांकि, एहतियातन उत्पादन बंद किया गया, लेकिन रिसाव के वास्तविक स्रोत की तत्काल पहचान नहीं हो पाना सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है.
पढ़ें : हनुमानगढ़ में एथेनॉल फैक्ट्री पर बवाल, क्यों भड़का इतना बड़ा संघर्ष ? समझें पूरा मामला
ग्रामीण ढांचे, कृषि भूमि एवं जल स्रोतों पर खतरा : विधायक हरीश चौधरी ने सदन को अवगत कराया कि क्षेत्र में निरंतर ब्लास्टिंग एवं तेल उत्पादन गतिविधियों के कारण कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होने की आशंका, भूजल एवं पेयजल स्रोतों के प्रदूषण का खतरा, आवासीय भवनों में दरारें एवं संरचनात्मक क्षति, ग्रामीणों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष जोखिम जैसी गंभीर परिस्थितियां उत्पन्न हो रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व में कराए गए सर्वे एवं जांचों की रिपोर्ट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे स्थानीय जनता में अविश्वास एवं चिंता बढ़ रही है.
सदन में रखी गईं प्रमुख मांगें : स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से विधायक चौधरी ने सरकार से मांग की कि अब तक किए गए सभी सर्वेक्षण एवं जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए. हालिया घटनाओं की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय वैज्ञानिक जांच कराई जाए. मृदा, भूजल एवं पर्यावरणीय प्रभाव का तृतीय-पक्ष ऑडिट कराया जाए. पाइपलाइन, वेलपैड एवं ब्लास्टिंग प्रक्रियाओं की नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य की जाए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शामिल कर क्षेत्रीय निगरानी समिति गठित की जाए. प्रभावित किसानों एवं नागरिकों को पारदर्शी एवं समयबद्ध मुआवजा दिया जाए. सुरक्षा मानकों की समीक्षा पूर्ण होने तक विस्फोट गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई जाए.

