ETV Bharat / state

Barmer Protest : नर्सिंगकर्मी उतरे सड़कों पर, आर पार की लड़ाई का किया ऐलान, जानिए पूरा मामला...

बाड़मेर जिला अस्पताल में सेवाएं समाप्त होने के विरोध में कलेक्टर कार्यालय के आगे किया प्रदर्शन. जानिए नर्सिंग कर्मचारियों का मुद्दा...

Protest in Barmer
सड़कों पर उतरे नर्सिंगकर्मी (ETV Bharat Barmer)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : June 30, 2026 at 4:14 PM IST

5 Min Read
Choose ETV Bharat

बाड़मेर: जिला अस्पताल परिसर में पिछले 23 दिनों से धरने पर बैठे नर्सिंग कर्मचारियो ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के आगे जबरदस्त तरीके से प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा. इससे पहले नर्सिंग कर्मचारी हाथों में तख्तियां-बैनर लेकर जिला अस्पताल से रैली के रूप में रवाना हुए जो कि शहर के अहिंसा सर्किल सेवा सदन होते हुए कलेक्ट कार्यालय पहुंचे. नर्सिंग कर्मचारी के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस की ओर से कलेक्ट्रेट कार्यालय के आगे बेरिकेड्स लगाकर पुलिस बल तैनात किया गया.

यहां पर नर्सिंग कर्मचारी ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया. इसके बाद नर्सिंग कर्मचारी का प्रतिनिधि मंडल कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और जिला कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. कलेक्टर कार्यालय से बाहर निकले प्रतिनिधिमंडल ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि कलेक्टर ने हमारी बात को सही ढंग से नहीं सुना. इस दौरान नर्सिंग कर्मचारी को संबोधित करते हुए नर्सिंग ऑफिसर जसवंत सिंह योद्धा ने कहा कि प्रशासन ने हमारी बात को सही तरीके से नहीं सुना है, जिसके चलते नर्सिंग कर्मचारी में भारी है. उन्होंने कहा कि जल्द ही हमारी कमेटी निर्णय लेकर आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा.

किसने क्या कहा, सुनिए... (ETV Bharat Barmer)

नर्सिंग ऑफिसर दिलीप त्रिवेदी ने बताया कि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए चाहे कोरोना जैसी महामारी हो या ऑपरेशन सिंदूर के समय भी सफेद कोर्ट आर्मी के रूप में जिले के दूरस्थ क्षेत्र में स्वास्थ्य सैनिकों के रूप में जिला चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए दिन और रात मेहनत कर रहे थे, लेकिन अचानक बिना किसी सूचना के राजस्थान सरकार के एक आदेश ने हमारी सेवाएं समाप्त करते हुए बेरोजगार कर दिया.

उन्होंने कहा कि हमने 4-5 सालों तक बाड़मेर के लोगो की सेवाएं की है, इसलिए कहीं न कहीं हमारी भावनाएं उनसे जुड़ी हुई हैं, जिसके चलते आज बाड़मेर का आमजन भी हमारे साथ जुड़ा और हमने कलेक्ट्रेट के आगे प्रदर्शन किया. उन्होंने कहा कि 23 दिनों से हमारी किसी ने बात नहीं सुनी. उम्मीद थी कि नई कलेक्टर मैडम अपने कार्यों के प्रति संवेदनशील और काफी सक्रिय हैं तो नर्सेज की भी आवाज सुनेंगी, लेकिन उन्होंने हमारी बात सुनान उचित नहीं समझा. जबकि हम उनके समक्ष अपनी बात रखना चाहते थे कि हमारी क्या कुछ मांगें हैं. उन्होंने हमारे ज्ञापन को लिया और कहा कि इस संबंध में बात करुंगी.

पढ़ें : राजकीय जिला अस्पताल में 100 नर्सिंग कर्मचारियों को हटाने पर बढ़ा विवाद, अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे नर्सिंग कर्मी

दिलीप त्रिवेदी ने कहा कि दो गुटों में झगड़ा हो जाने में किसी की मौत हो जाती है तो सरकार तुरंत मुआवजे की घोषणा कर देती है, लेकिन सेवाएं समाप्त हो जाने से जयपुर के हमारे साथी दीपक ने आहत होकर अपनी जान दी है. उसके लिए सरकार मुआवजे की घोषणा क्यों नहीं कर रही है. उन्होंने बताया कि सरकार और प्रशासन से बात करने के लिए हमें जितने प्रयास करने थे, वह कर चुके हैं, लेकिन 23 दिन हो गए हैं, हमारी वाजिब बातों को सुना नहीं गया. उन्होंने कहा कि अब आर पार की लड़ाई होगी. जब तक जीतेंगे नहीं, तब तक उठेंगे नहीं.

यह है पूर मामला : बाड़मेर राजकीय जिला अस्पताल में पिछले 3 से 5 वर्षों से सेवाएं दे रहे लगभग 100 नर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से हटाए जाने का मामला लगातार चर्चा और विवाद का विषय बना हुआ है. प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक अस्पताल में सेवाएं देने के बावजूद उन्हें बिना कोई स्पष्ट कारण बताए कार्यमुक्त कर दिया गया. जिससे उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.

कर्मचारियों के अनुसार अस्पताल प्रशासन द्वारा चरणबद्ध तरीके से आदेश जारी किए गए. पहला आदेश दिनांक 21 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/940, दूसरा आदेश 29 मई 2026 को आदेश क्रमांक 2026/984 तथा तीसरा आदेश 2 जून 2026 को आदेश क्रमांक 2026/1003 के तहत जारी किया गया. कर्मचारियों का दावा है कि इन आदेशों के माध्यम से लगभग 100 नर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से पृथक कर दिया गया.

प्रभावित कर्मचारियों का कहना है कि हटाए गए कर्मचारियों में से लगभग 10से 15 कर्मचारियों को समय-समय पर जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज स्तर पर उत्कृष्ट एवं सराहनीय सेवाओं के लिए सम्मानित किया जा चुका है. वहीं, 2 से 4 नर्सिंग कर्मचारियों को जिला प्रशासन द्वारा जिला स्तर पर सम्मानित किया गया है. कर्मचारियों का कहना है कि कोविड काल सहित विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं में इन कर्मचारियों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था और अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से संचालित करने में अहम भूमिका निभाई थी.

यह हैं प्रमुख मांगें :

  1. स्वर्गीय श्री दीपक के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा एवं उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी दी जाए.
  2. हटाए गए प्रदेश के समस्त प्लेसमेंट नर्सेज की सेवा तुरन्त प्रभाव से सेवा बहाल की जाए.
  3. कार्यरत संविदा प्लेसमेंट नर्सेज को भविष्य में नर्सेज भर्ती में पूर्व की भांति मेरिट एवं बोनस से नियमित किया जाए.
  4. भविष्य में प्लेसमेंट के माध्यम से संविदा निविदा नर्सेज भर्ती पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगाया जाए.