मोबाइल की लत से बिगड़ रही युवाओं की सेहत, Digital Detox अपनाने की सलाह
मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल मानसिक और शारीरिक समस्याओं की वजह बनता जा रहा है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 11:57 AM IST
बरेली : डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. बच्चे, युवा, महिलाएं सभी इसका खूब उपयोग कर रहे हैं, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा उपयोग लोगों को मानसिक और शारीरिक बीमारियां दे रहा है. लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव पड़ता है, साथ ही मानसिक थकान भी बढ़ती है. इन्हीं तमाम समस्याओं से बचने के लिए बेरली के लाइफ आर्ट एक्सपर्ट और इनर स्माइल केयर ग्रुप के निदेशक विशेष कुमार ने ईटीवी भारत से कुछ तथ्य और बातें साझा कीं. विशेष कुमार पिछले 25 वर्षों से ऊर्जा विज्ञान के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं. पढ़ें विस्तृत खबर...
विशेष कुमार का कहना है कि मोबाइल का अधिक उपयोग व्यक्ति की आंतरिक ऊर्जा को कमजोर करता है. बच्चों में रचनात्मकता कम हो रही है, क्योंकि वे खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों की बजाय मोबाइल पर ज्यादा समय बिता रहे हैं. इससे एकाग्रता भी घट रही है और चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है. युवा देर रात तक सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी नींद पूरी नहीं हो पाती और वे तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं से घिर जाते हैं. लगातार मोबाइल उपयोग से महिलाओं में मानसिक थकान और असंतुलन बढ़ रहा है.
क्या है डिजिटल डिटॉक्स : विशेष कुमार के अनुसार जैसे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आराम और संतुलित आहार जरूरी है. वैसे ही दिमाग और ऊर्जा को संतुलित रखने के लिए डिजिटल डिटॉक्स जरूरी है. लगातार स्क्रीन देखने से हमारी ‘प्राण ऊर्जा’ कमजोर होती है. इसलिए समय-समय पर मोबाइल और अन्य गैजेट्स से दूरी बनाना जरूरी है. तकनीक हमारी सुविधा के लिए है, लेकिन उसे आदत या लत नहीं बनने देना चाहिए. संतुलित उपयोग और समय-समय पर डिजिटल डिटॉक्स अपनाकर ही स्वस्थ, सकारात्मक और ऊर्जावान जीवन जिया जा सकता है.
मोबाइल की लत से ऐसे पाएं छुटकारा : सुबह उठते ही कम से कम एक घंटे तक मोबाइल न देखें और इस समय को खुद के लिए रखें. दिन में कुछ समय ध्यान या मौन में बिताने से मानसिक शांति मिलती है. घास पर नंगे पैर चलना भी शरीर को प्रकृति से जोड़ता है और तनाव कम करने में मदद करता है. घर में भोजन की मेज और शयनकक्ष को गैजेट फ्री रखने से पारिवारिक संवाद बढ़ता है और दिमाग को भी आराम मिलता है. यदि कभी तनाव महसूस हो तो गहरी सांस लेने का अभ्यास तुरंत राहत दे सकता है.
यह भी पढ़ें : क्या आपका बच्चा भी मोबाइल गेम्स एडिक्ट है? कैसे पहचानें, क्या हैं बचाव के उपाय

