सार्वजनिक स्थानों पर नमाज...बरेली के मौलाना ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया; सपा सांसद बोले- सुप्रीम कोर्ट का रास्ता खुला
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि अदालत का फैसला पूरी तरह सही है. यह इस्लाम की शरीयत के मुताबिक भी है.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : May 3, 2026 at 8:43 AM IST
बरेली/संभल: ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन किया है. वहीं, संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कहा कि कोर्ट के फैसले का स्वागत है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर हर समुदाय का हक है.
पहले जानें बरेली के मौलाना ने क्या कहा: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि अदालत का फैसला पूरी तरह सही है. यह इस्लाम की शरीयत के मुताबिक भी है. मौलाना रजवी ने साफ कहा कि इस्लाम में ऐसी जगह इबादत करने की इजाजत नहीं है, जहां किसी तरह का विवाद हो या लोगों को दिक्कत हो. सड़क, चौराहे या पार्क में नमाज पढ़ने से लोगों के आने-जाने में परेशानी होती है.
कई बार एम्बुलेंस जैसी जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होती हैं, जबकि इस्लाम का मूल सिद्धांत यही है कि किसी के अमल से दूसरे को तकलीफ न पहुंचे. उन्होंने कहा कि नमाज सुकून और एकाग्रता की इबादत है, इसलिए इसे शोर-शराबे या भीड़भाड़ वाली जगहों पर नहीं पढ़ना चाहिए. बेहतर है कि लोग घर, मस्जिद, मदरसा या किसी सुरक्षित और निजी स्थान पर ही नमाज अदा करें.
युवाओं के वीडियो ट्रेंड पर नाराजगी: मौलाना ने खासतौर पर युवाओं के नए ट्रेंड पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि आजकल कुछ नौजवान पब्लिक प्लेस जैसे रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म या सड़क पर नमाज पढ़कर उसका वीडियो बनाते हैं और सोशल मीडिया पर वायरल करते हैं.
यह इबादत की गरिमा के खिलाफ है. उन्होंने कहा कि नमाज दिखावे के लिए नहीं होती, बल्कि यह बेहद पवित्र इबादत है. इसकी नुमाइश करना सही नहीं है. सिर्फ चर्चा में आने या फेमस होने के लिए ऐसा करना गलत है.
मौलाना ने यह भी कहा कि कुछ युवाओं को सही तरीके से वजू करना भी नहीं आता, लेकिन वह वीडियो बनाने में ज्यादा ध्यान देते हैं. उन्होंने अपील की कि युवा नमाज की अहमियत को समझें और इसकी पवित्रता को बनाए रखें.
अब जानें सपा सांसद ने क्या कहा: संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने कोर्ट के आदेश का सम्मान करने की बात तो कही, लेकिन साथ ही अपने हक की लड़ाई जारी रखने का संकेत भी दे दिया. सपा सांसद ने कहा कि माननीय न्यायालय का आदेश है, तो हम सभी उसका सम्मान करते हैं और पालन भी करते हैं. उन्होंने साफ तौर पर यह भी जोड़ा कि सार्वजनिक जगह किसी एक वर्ग की नहीं होती, बल्कि उस पर हर समुदाय का समान अधिकार होता है.
उन्होंने कहा कि हम ये नहीं कह रहे कि सिर्फ हम ही उस जगह का इस्तेमाल करें… दूसरे लोग भी उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. सांसद बर्क ने कहा कि अगर किसी पक्ष को हाईकोर्ट के फैसले से असहमति है, तो वह कानूनी तरीके से आगे बढ़ सकता है. अगर ज़रूरत पड़ेगी तो लोग सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं.
जब उनसे यह सवाल किया गया कि अगर परंपरा के खिलाफ कुछ होता है तो राज्य सरकार कार्रवाई कर सकती है? तो उन्होंने जवाब दिया कि हम न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि हम सहमत या असहमत हो सकते हैं. अपनी बात ऊपरी अदालत में रख सकते हैं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जगह का मतलब ही है कि वह सभी वर्गों के इस्तेमाल में आए.
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