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बाराबंकी में साइबर ठगी के दो मामले दर्ज; म्यूल अकाउंट और APK फाइल के जरिये ठगों ने हड़पे लाखों रुपये

साइबर थाना प्रभारी संजीव यादव ने बताया कि मुकदमे दर्ज कर साइबर ठगों की तलाश की जा रही है.

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सब इंस्पेक्टर इफलाक अहमद खान के नेतृत्व में हुई जांच. (Photo Credit: ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : January 9, 2026 at 9:54 PM IST

5 Min Read
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बाराबंकी: जिले में गुरुवार को साइबर ठगी के दो मामले दर्ज किए गए हैं. पहले मामले में साइबर ठगों ने फेडरल बैंक में म्यूल अकाउंट बनाकर यूपी के गौतमबुद्ध नगर और आंध्रप्रदेश के तीन लोगों से करीब 04 लाख रुपये ठग लिए थी. वहीं दूसरे मामले में एक ठग ने अपने को बैंक कर्मचारी बताकर एपीके फाइल के जरिये एक महिला के खाते से 07 लाख 25 हजार रुपये ठग लिए. बाराबंकी साइबर थाने के सब इंस्पेक्टर इफलाक अहमद खान के नेतृत्व में टीम ने बाराबंकी के फेडरल बैंक के एक खाते की जांच की तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ.

फेडरल बैंक के खाते की जांच में हुआ खुलासा: यह खाता नगर कोतवाली के लखपेड़ाबाग स्थित आनंद विहार स्कूल के पास रहने वाले हर्षित सिंह का था. इस म्यूल अकाउंट से गौतमबुद्धनगर जिले के तहसील बिसराख निवासी विवेक के खाते से 09 जनवरी 2024 को एक लाख 30 हजार एक सौ रुपये, 29 जनवरी 2024 को आंध्रप्रदेश के तहसील नादयाल निवासी राजकुमार के खाते से 02 लाख 48 हजार 226 रुपये और 06 जनवरी 2024 को आंध्रप्रदेश के ही इलूरू निवासी जयप्रकाश के खाते से 03 लाख 88 हजार 326 रुपये की ऑनलाइन ठगी की गई थी.

हर्षित सिंह को 8100 रुपये कमीशन मिला: आरोपी हर्षित सिंह ने अपने खाते का एक्सेस बदोसराय थाने के कोटवाधाम निवासी अपने दोस्त आदर्श वर्मा को दिया था. उसने विभिन्न तारीखों में इसके लिए उससे 8100 रुपये कमीशन के रुप में लिया था. यह कमीशन उसने अपने भारतीय स्टेट बैंक के खाते से निकाला था. जांच में यह भी पाया गया कि हर्षित सिंह से आदर्श वर्मा ने उसका फेडरल बैंक का एटीएम कार्ड और पासबुक ले लिया था.

आदर्श वर्मा ने हर्षित के खाते में नंबर बदलवाया: इसके बाद आदर्श वर्मा ने हर्षित वर्मा के फेडरल बैंक के खाते में मोबाइल नम्बर बदलकर उसे पंजीकृत करा लिया. यह पंजीकरण पश्चिमी बंगाल के किसी निरंजन मालाकार के नाम दर्ज है. उसके बाद आदर्श वर्मा और दर्ज मोबाइल नम्बर के व्यक्ति निरंजन मालाकार ने कूट रचना कर यूपीआई अकाउंट बनाया और उसके जरिये कई पीड़ितों से साइबर ठगी की.

कॉल डिटेल रिपोर्ट से मिली अहम जानकारी: पुलिस टीम ने सीडीआर की भी जांच की जिसमें पाया गया कि आदर्श वर्मा द्वारा अपने मोबाइल नम्बर से बैंक में बाद में पंजीकृत कराए गए मोबाइल नम्बर पर कई बार बात भी की गई. जिससे यह साबित होता है कि हर्षित सिंह, आदर्श वर्मा और निरंजन मालाकार ने साइबर क्राइम किया गया. जांच के बाद साइबर थाने के सब इंस्पेक्टर इफलाक अहमद खान ने नगर कोतवाली में तीनों साइबर ठगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया. साइबर थाना प्रभारी संजीव यादव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर आरोपियों की तलाश की जा रही है.

महिला हुई साइबर ठगी का शिकार: इसी तरह एपीके फाइल के जरिये साइबर ठगों ने एक महिला के इंडसइंड बैंक के खाते से 07 लाख 25 हजार रुपये निकाल लिए थे. शुक्रवार को बाराबंकी रिजर्व पुलिस लाइंस की रहने वाली रीता ने इस मामले को लेकर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया. पीड़िता के मुताबिक 31 दिसम्बर 2025 को वह अपने इंडसइंड बैंक के खाते की नेट बैंकिंग सेवा इंस्टाल कर रही थी. करीब 09 बजे उसके मोबाइल नम्बर पर एक अज्ञात व्यक्ति ने एक नम्बर से काल किया था.

साइबर ठग ने खुद को बैंक कर्मचारी बताया: काल करने वाले व्यक्ति ने खुद को बैंक का कर्मचारी बताते हुए कहा कि आप नेट बैंकिंग सेवा इंस्टाल कर रही हैं. पीड़िता ने जब हां कहा, तब उस अज्ञात व्यक्ति ने पीड़िता से बैंक खाते में लिंक मोबाइल नम्बर पूछा तो उसने बैंक खाते से लिंक मोबाइल नम्बर बता दिया. इसके बाद उस अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप के जरिये पीड़िता को एक लिंक एपीके फाइल भेजी और उसे इंंस्टॉल करने को कहा.

साइबर ठगों ने बैंक खाते से निकाले 7.25 लाख रुपये: इसके बाद उस अज्ञात व्यक्ति ने महिला के इंडसइंड बैंक खाते से 31 दिसम्बर 2025 को रात 09 बजे आईएमपीएस के माध्यम से 01 लाख 28 हजार रुपये और तीन बार 01 लाख 99 हजार रुपये यानी कि कुल 07 लाख 25 हजार रुपये निकाल लिए. अचानक से इस तरह पीड़िता के साथ हुई साइबर ठगी से वह सदमे में आ गई और उसने साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया. साइबर थाना प्रभारी संजीव यादव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर साइबर ठग की तलाश की जा रही है.

क्या है म्यूल अकाउंट: मनी म्यूल अकाउंट एक ऐसा खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर क्रिमिनल अवैध रूप से अर्जित मनी को वैध बनाने के लिए करते हैं. इसके खाता धारक को मनी म्यूल कहते हैं.


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