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बंधा मातौर महोत्सव, तालाब में उतरेंगे हजारों लोग, ओडिशा के मेहमान भी होंगे शामिल, जानिए क्या होगा खास

कोंडागांव में मातौर तालाब महोत्सव का आयोजन हो रहा है. यह महोत्सव काफी दिलचस्प होता है. पढ़िए पूरी रिपोर्ट

Bandha Mataur Pond Festival
बंधा मातौर तालाब मोहत्सव (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 21, 2026 at 8:30 PM IST

3 Min Read
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कोंडागांव: छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले में 23 मई को मातौर तालाब महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है. तीन साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर इस ऐतिहासिक लोक परंपरा को जीवंत किया जाएगा. जिले भर के हजारों लोग इस अनूठे सामूहिक मछली पकड़ने के उत्सव में एकजुट होंगे.

क्या है बंधा मातौर त्यौहार?

यह छत्तीसगढ़ के बस्तर-कोंडागांव अंचल की एक प्राचीन आदिवासी परंपरा है, जो "गांव का तालाब और गांव का उत्सव" की सामूहिक भावना पर आधारित है. बरकई गांव में प्रतिवर्ष मार्च-अप्रैल में यहाँ के प्रमुख देव भंगाराम के सम्मान में मड़ई का आयोजन होता है. इस मड़ई का प्रभाव बारह गांवों तक फैला है, इसीलिए इसे बरहपाली की मड़ई भी कहा जाता है. इसी मड़ई उत्सव के अंतर्गत तालाब महोत्सव यानी बंधा मातौर का आयोजन होता है, जिसमें सभी जातियों और समुदायों के लोग एकसाथ तालाब में उतरकर मछलियां पकड़ते हैं.

कोंडागांव का अनोखा त्यौहार (ETV BHARAT)

बंधा मातौर आयोजन की खास बातें

आयोजक समिति के सदस्य मिलन कुमार पाण्डे ने बताया कि इस कार्यक्रम में कोंडागांव जिले के किसी भी गांव का नागरिक भाग ले सकता है. प्रवेश शुल्क ₹200 से शुरू होगा, जो मछली पकड़ने के साधन के अनुसार अलग-अलग निर्धारित किया गया है. जाली, सौंकी, चगोड़ी जैसे उपकरण लाने वालों के लिए अलग टिकट दरें रखी गई हैं. वहीं जो लोग केवल हाथ से मछली पकड़ना चाहते हैं, उनके लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रहेगा. सुरक्षा की दृष्टि से 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों का तालाब में उतरने पर रोक रहेगी.

परंपरा का रहस्यमयी पहलू

इस उत्सव की सबसे रोचक और चर्चित परंपरा मालगुजार की विशेष भूमिका से जुड़ी है. आयोजन में मालगुजार को विशेष रूप से बुलाकर लाया जाता है. जब तालाब किनारे विशेष धुन बजाई जाती है, तो मछलियां स्वयं ही उछलने और छलांग लगाने लगती हैं. दो-तीन बार मछली पकड़ने के बाद जैसे ही मालगुजार अपनी उंगली पानी में डालते हैं, मछलियां अचानक छुप जाती हैं. यह अनोखी परंपरा इस महोत्सव को रहस्यमयी और आकर्षक बनाती है और दूर-दूर से लोगों को यहां खींच लाती है.

दो राज्यों की साझी भागीदारी

वर्ष 2023 में हुए पिछले आयोजन में न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पड़ोसी राज्य ओडिशा के लोग भी बड़ी संख्या में शामिल हुए थे. इस बार भी ओडिशा के लोगों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है. तालाब किनारे मनोरंजन और उत्सवी माहौल रहेगा, जिससे यह केवल मछली पकड़ने का आयोजन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक महापर्व का रूप ले लेता है.

परंपरा की मूल आत्मा आज भी जीवित

बरकई गांव की यह मड़ई और बंधा मातौर की परंपरा आज भी अपने पुरातन स्वरूप में जीवित है. यहां अभी तक व्यावसायिक मनोरंजन और बाजारवाद का उतना दखल नहीं हुआ है. यह उत्सव सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विरासत और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का जीवंत प्रतीक है. आयोजक समिति ने सभी लोगों से इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भाग लेने और इसे सफल बनाने में सहयोग की अपील की है.

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