बनारस रेल इंजन कारखाने को लगातार दूसरी बार मिला IRIS का सिल्वर ग्रेड सर्टिफिकेट
मुख्य डिजाइन इंजीनियर (डीजल) प्रवीण कुमार ने इस उपलब्धि को सभी बरेका कर्मचारियों के अथक परिश्रम और समर्पण का परिणाम बताया.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 3:05 PM IST
वाराणसी: बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) को यूरोपियन स्टैंडर्ड की प्रतिष्ठित संस्था UNIFE द्वारा इंटरनेशनल रेलवे इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (IRIS) के अंतर्गत, आईएसओ का नवीनतम स्टैंडर्ड आईएसओ 22163 का सिल्वर ग्रेड प्रमाण-पत्र मिला है. यह प्रमाण-पत्र बरेका को लगातार दूसरी बार दिया गया है. यह उपलब्धि बरेका के लिए गौरव का विषय है. बरेका को बीते साल भी आईआरआईएस सिल्वर ग्रेड प्रमाण-पत्र मिला था. इस साल फिर से रिकॉर्ड समय में इस प्रमाण-पत्र को प्राप्त कर बरेका ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है.
इलेक्ट्रिक इंजन की मांग बढ़ने की संभावना: बनारस रेल इंजन कारखाना भारत की पहली रेलवे लोकोमोटिव निर्माण इकाई है, जिसे यह प्रतिष्ठित प्रमाण-पत्र मिला है. आईआरआईएस प्रमाण-पत्र के मिलने से बरेका के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल इंजनों के साथ-साथ विद्युत इंजनों की मांग में भी वृद्धि होने की संभावना है. वाराणसी रेलवे के मुताबिक, आईआरआईएस प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए निर्धारित दस उच्च गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना अनिवार्य होता है, जिन्हें बरेका ने रिकॉर्ड समय में सफलतापूर्वक पूरा किया है.
बरेका ने अपने नाम की महत्वपूर्ण उपलब्धि: रेलवे उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए UNIFE ने बंगलुरु स्थित डीक्यूएस सर्टिफिकेशन को ऑडिट एजेंसी के रूप में नियुक्त किया था. रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि डीक्यूएस की टीम ने बरेका में लगातार सात दिनों तक गहन ऑडिट किया, जिसके बाद उसने बरेका को इस प्रमाण-पत्र के लिए योग्य मानते हुए UNIFE को संस्तुति भेजी. बरेका को बीते साल भी आईआरआईएस सिल्वर ग्रेड प्रमाण-पत्र मिला था.
महाप्रबंधक सोमेश कुमार ने किया गाइड: इस साल फिर से रिकॉर्ड समय में इस प्रमाण-पत्र को प्राप्त कर बरेका ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है. अधिकारियों ने बताया कि महाप्रबंधक सोमेश कुमार के कुशल नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में यह सफलता मिली है, जिसमें सभी बरेकाकर्मियों का सराहनीय योगदान रहा है. मुख्य अभिकल्प इंजीनियर (डीजल) प्रवीण कुमार ने इसे सभी बरेकाकर्मियों के अथक परिश्रम और समर्पण का परिणाम बताया.
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया: इससे पहले बनारस रेल इंजन कारखाना ने लोकोमोटिव निर्माण के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराया है. बरेका द्वारा निर्मित स्वदेशी 3300 हॉर्स पावर एसी–एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की छठी इकाई को 15 दिसंबर, 2025 को मोज़ाम्बिक के लिए सफलतापूर्वक रवाना किया गया था.
10 इंजन निर्यात करने का ऑर्डर मिला: यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है कि बरेका को मोज़ाम्बिक के लिए 3300 हॉर्स पावर एसी–एसी डीजल-इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के कुल 10 इंजन निर्यात करने का ऑर्डर मिला है. इन लोकोमोटिवों की आपूर्ति एम/एस राइट्स (RITES) के माध्यम से 10 लोकोमोटिवों के निर्माण एवं निर्यात के अनुबंध के अंतर्गत की जा रही है.
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