राजस्थान की पहली जहरमुक्त ग्राम पंचायत की ओर अग्रसर बामनवास कांकर, 800 किसानों ने जैविक खेती की ली शपथ
वर्ष 2026 तक बीकानेर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़ और भीलवाड़ा की करीब 300 ग्राम पंचायतों को पूरी तरह जैविक बनाने का लक्ष्य रखा गया है.


Published : January 2, 2026 at 10:30 PM IST
|Updated : January 3, 2026 at 9:06 AM IST
कोटपूतली-बहरोड़: जिले की ग्राम पंचायत बामनवास कांकर राज्य की पहली पूर्ण जहरमुक्त पंचायत बनने की ओर अग्रसर हो गई है. इस उपलब्धि पर शुक्रवार को किसान सेवा केंद्र कोटपूतली और कोफेड संस्था की ओर से गांव में विशेष शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें ग्रामीणों को जैविक प्रमाण पत्र वितरित किए गए. कार्यक्रम के दौरान करीब 1500 हेक्टेयर में खेती करने वाले लगभग 800 किसानों ने शपथ ली कि वे अब पूरी तरह जैविक खेती अपनाएंगे और गांव में किसी भी प्रकार के पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं करेंगे.
ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी मील का पत्थर साबित होगी. कार्यक्रम में सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग, युवा और बच्चे मौजूद रहे. इस दौरान पूरी पंचायत ने रासायनिक खेती और पशुपालन के विरुद्ध प्रतिज्ञा लेते हुए जैविक खेती, जैविक पशुपालन और पर्यावरण-संवेदनशील भूमि प्रबंधन को अपनाने का संकल्प लिया.
किसान सेवा केंद्र कोटपूतली के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एंड चीफ डॉ सुशील कुमार शर्मा ने बताया कि जहरमुक्त पंचायत कार्यक्रम का प्रथम चरण सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में देश और समाज को प्राकृतिक और जैविक खेती की सबसे अधिक आवश्यकता है, जिस पर केंद्र और राज्य सरकारें भी जोर दे रही हैं. डॉ. शर्मा ने बताया कि कृषि सेवा केंद्र बानसूर भी प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है. कार्यक्रम में किसानों को भारत सरकार की नई योजना वीवीपी जीरामजी के लाभों की जानकारी दी गई, जिसे लेकर किसानों ने उत्साह दिखाया. उन्होंने कहा कि जहरमुक्त और रसायन मुक्त खेती आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सुरक्षित जीवन देने में अहम भूमिका निभाएगी.
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जन आंदोलन की दिशा में बढ़ती मुहिम: कोफेड (कोफार्मिन फेडरेशन ऑफ ऑर्गेनिक सोसायटीज़ एंड प्रोड्यूसर कंपनियां) के संस्थापक जितेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन है. जब पूरी ग्राम पंचायत जैविक खेती और पशुपालन को अपनाती है, तो वह पूरे देश के लिए मिसाल बन जाती है. बामनवास कांकर ने यह साबित कर दिया है कि जब समुदाय स्वयं बदलाव की जिम्मेदारी लेता है, तो टिकाऊ और लाभकारी कृषि संभव हो जाती है. उन्होंने बताया कि राजस्थान की यह पहली पंचायत है, जो पूरी तरह जहरमुक्त बनी है. वर्ष 2026 तक बीकानेर, अलवर, कोटपूतली-बहरोड़ और भीलवाड़ा जिलों की करीब 300 ग्राम पंचायतों को पूरी तरह जैविक बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
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पर्यावरण और किसानों दोनों को लाभ: जितेंद्र शेखावत ने बताया कि जैविक पद्धतियों से मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है, नमी धारण क्षमता बढ़ती है और भूजल को रासायनिक प्रदूषण से बचाया जा सकता है. बामनवास कांकर पंचायत की करीब 1500 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को जैविक प्रमाणन कार्यक्रम के तहत शामिल किया गया है. साथ ही 6 हजार से अधिक पशुओं का भी पंजीकरण किया गया है. यह पंचायत उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत की उन चुनिंदा ग्राम पंचायतों में शामिल हो गई है, जहां भूमि और पशुधन दोनों का जैविक प्रमाणन एक साथ किया गया है.
2014 से टिकाऊ खेती के मॉडल पर काम: कोफेड संस्था के जितेंद्र शेखावत ने बताया कि वर्ष 2014 में टिकाऊ खेती के मॉडल पर काम शुरू किया गया था, जिसे अंतर-सरकारी संस्था आर्दो के 34 सदस्य देशों से मान्यता मिली है. शेखाावत जैविक कृषि इनपुट निर्माण और कम लागत वाली जैविक कृषि पद्धतियों के विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य कर रहे हैं. उन्होंने नामीबिया में कम लागत वाली जैविक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कृषि क्षेत्र की चुनौतियों के समाधान पर शोध रिपोर्ट भी तैयार की है.


