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साइबर ठगों के हौसले पस्त करेगा बलौदाबाजार पुलिस का डिजिटल सुरक्षा चक्र

बलौदाबाजार पुलिस में ASP अभिषेक सिंह ने 'POLICE' का मूलमंत्र सोशल मीडिया पर साझा किया.

BALODABAZAR POLICE
बलौदाबाजार पुलिस (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : May 27, 2026 at 9:43 AM IST

10 Min Read
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बलौदाबाजार: साइबर अपराधी हर दिन नए नए पैंतरे अपनाकर सीधे साधे और मासूम लोगों को अपनी ठगी का शिकार बना रहे हैं. कभी वे डराकर, कभी लालच देकर तो कभी तकनीकी अज्ञानता का फायदा उठाकर लोगों के बैंक खातों को खाली कर रहे हैं. इस बढ़ते खतरे को भांपते हुए और लोगों को एक अभेद्य सुरक्षा कवच देने के लिए बिलासपुर पुलिस (Bilaspur Police, CG) ने एक बेहद ही अनूठा और प्रभावी जागरूकता अभियान शुरू किया है.

'POLICE' कीवर्ड सायबर फ्रॉड से बचाएगा

इसी कड़ी में बलौदाबाजार पुलिस के अधिकारी ASP अभिषेक सिंह ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए एक विशेष इंफोग्राफिक पोस्टर साझा किया है, जो इंटरनेट की दुनिया में तेजी से वायरल हो रहा है. इस पोस्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें अंग्रेजी के शब्द 'POLICE' के हर एक अक्षर का उपयोग करके साइबर अपराध से बचने के छह सबसे महत्वपूर्ण और व्यावहारिक नियम समझाए गए हैं. पुलिस का मानना है कि यदि आम लोग इस 'POLICE' कीवर्ड (Key Word) को अपने दिमाग में बैठा लें और इसके नियमों का कड़ाई से पालन करें, तो साइबर अपराधियों के सारे मंसूबे मिट्टी में मिल जाएंगे.

BALODABAZAR POLICE
POLICE का मूलमंत्र (ETV Bharat Chhattisgarh)

'POLICE' कीवर्ड का विस्तृत और व्यावहारिक विश्लेषण

P - Password (पासवर्ड की गोपनीयता: सुरक्षा की पहली कतार)


​"किसी को भी अपना Password न बताएं"

डिजिटल सुरक्षा की शुरुआत आपके पासवर्ड से ही होती है. चाहे वह आपकी ई-मेल आईडी हो, सोशल मीडिया अकाउंट हो, नेट बैंकिंग हो या आपका मोबाइल लॉक— पासवर्ड ही वह ताला है जो आपके डेटा को सुरक्षित रखता है.

अपराधियों का पैंतरा: साइबर ठग अक्सर तकनीकी सहायता अधिकारी, बैंक कर्मचारी या किसी जानी-मानी कंपनी का प्रतिनिधि बनकर आपसे बात करते हैं. वे बातों-बातों में आपके खातों की जांच करने या उसे ब्लॉक होने से बचाने के नाम पर आपका पासवर्ड पूछने का प्रयास करते हैं.

बचाव के उपाय: हमेशा याद रखें कि दुनिया का कोई भी प्रतिष्ठित बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी आपसे आपका पासवर्ड नहीं मांगता. इसके अतिरिक्त, अपने पासवर्ड को हमेशा मजबूत (Strong) रखें, जिसमें अंग्रेजी के बड़े और छोटे अक्षर, नंबर और स्पेशल कैरेक्टर (@, #, $, आदि) शामिल हों. कभी भी अपना नाम, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर पासवर्ड के रूप में न रखें, क्योंकि अपराधी सबसे पहले इन्हीं का अनुमान लगाते हैं.

O - OTP (वन टाइम पासवर्ड: वित्तीय तिजोरी की अंतिम चाबी)

​"किसी को भी OTP शेयर न करें" ​OTP यानी One Time Password

आपके डिजिटल लेन-देन की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. जब तक आप यह कोड दर्ज नहीं करते, तब तक आपके खाते से पैसे नहीं कट सकते या कोई नया डिजिटल बदलाव नहीं हो सकता.

​अपराधियों का पैंतरा: ठग अक्सर पीड़ितों को डराते हैं कि उनका एटीएम कार्ड ब्लॉक होने वाला है या उनका सिम कार्ड बंद होने वाला है.इस डर के माहौल में वे पीड़ित के मोबाइल पर एक ओटीपी भेजते हैं और उसे बताने को कहते हैं. जैसे ही पीड़ित घबराहट में वह ओटीपी साझा करता है, उसके खाते से पैसे साफ हो जाते हैं.

​बचाव के उपाय: बिलासपुर पुलिस स्पष्ट संदेश देती है कि ओटीपी किसी को भी, यहाँ तक कि खुद को बैंक मैनेजर बताने वाले व्यक्ति को भी, कभी साझा न करें. ओटीपी साझा करने का सीधा अर्थ है अपनी तिजोरी की चाबी चोर के हाथ में सौंप देना.

​L - Link (संदिग्ध और अनजान लिंक: डिजिटल जाल)

किसी भी अनजाने Link को ओपन न करें

​इंटरनेट पर 'फिशिंग' (Phishing) के जरिए ठगी करने का यह सबसे पुराना और प्रभावी हथकंडा है. इसमें अपराधी आपको लुभावने या डराने वाले लिंक भेजते हैं.

​अपराधियों का पैंतरा: व्हाट्सएप, एसएमएस या ई-मेल पर अक्सर ऐसे मैसेज आते हैं कि "आपको 5 लाख रुपये की लॉटरी लगी है, दावा करने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें" या "आपका बिजली बिल अपडेट नहीं है, कनेक्शन काटने से बचने के लिए इस लिंक पर जाकर भुगतान करें", जैसे ही कोई व्यक्ति इन लिंक्स पर क्लिक करता है, उसके मोबाइल में कोई मैलवेयर (वायरस) डाउनलोड हो जाता है या वह एक फर्जी वेबसाइट पर पहुंच जाता है, जहाँ उसकी बैंकिंग जानकारियां चोरी कर ली जाती हैं.

​बचाव के उपाय: कभी भी किसी अनजान स्रोत से आए लिंक पर क्लिक न करें. अगर कोई जरूरी मैसेज है भी, तो संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ही जांच करें.

I - Identity (पहचान और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा) ​

अपनी Identity सोशल मीडिया में शेयर न करें, जैसे आधार कार्ड, वोटर ID, बैंक पासबुक, पासपोर्ट आदि

​आज के दौर में 'डेटा' ही सबसे बड़ी संपत्ति है। हमारी व्यक्तिगत पहचान से जुड़े दस्तावेज अपराधियों के लिए बहुत मूल्यवान होते हैं.


अपराधियों का पैंतरा: सोशल मीडिया (फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप) पर लोग अक्सर अपनी यात्राओं, टिकटों या नए दस्तावेजों की तस्वीरें उत्साह में आकर साझा कर देते हैं. अपराधी इन तस्वीरों से आधार नंबर, पासपोर्ट नंबर या बैंक खाता संख्या जैसी संवेदनशील जानकारियां चुरा लेते हैं. इसके बाद वे इन जानकारियों का उपयोग करके आपके नाम पर फर्जी सिम कार्ड ले सकते हैं, फर्जी लोन उठा सकते हैं या किसी अन्य गंभीर अपराध में आपकी पहचान का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं.

​बचाव के उपाय: अपने महत्वपूर्ण पहचान पत्रों को कभी भी सार्वजनिक प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट न करें. अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा 'प्राइवेट' या 'फ्रेंड्स ओनली' पर रखें.

​C - Careful (सावधानी और सतर्कता का दृष्टिकोण)

"हमेशा Careful रहें, पैसा डबल करने, बिना ब्याज लोन, ऑनलाइन सट्टा आदि के चक्कर में न पड़ें

यह सूत्र सीधे तौर पर मानव मनोविज्ञान और लालच की प्रवृत्ति से जुड़ा हुआ है. साइबर अपराधी जानते हैं कि इंसान को कम समय में ज्यादा पैसा कमाने या आसानी से लोन पाने की चाहत होती है.

अपराधियों का पैंतरा: इंटरनेट पर ऐसे विज्ञापनों की बाढ़ आई हुई है जो दावा करते हैं कि "21 दिन में पैसा डबल", "बिना किसी गारंटी और बिना ब्याज के 5 लाख का पर्सनल लोन" या "ऑनलाइन गेमिंग/सट्टे के जरिए रातों-रात करोड़पति बनें". इन ऐप्स को डाउनलोड करने के बाद लोगों से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर पैसे ऐंठे जाते हैं, और लोन ऐप्स के मामले में तो लोगों का पर्सनल डेटा चोरी करके उन्हें ब्लैकमेल तक किया जाता है.

​बचाव के उपाय: हमेशा 'केयरफुल' यानी सावधान रहें. यह कड़वा सच याद रखें कि मेहनत के बिना और रातों-रात वैध तरीके से अमीर बनने का कोई रास्ता नहीं है. किसी भी वित्तीय निवेश से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच सेबी (SEBI) या आरबीआई (RBI) के नियमों के तहत जरूर कर लें.

E - Emergency (आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई)

​"फिर भी Emergency हो तो 1930 में Call करें, नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर थाना में रिपोर्ट करें" ​यह 'POLICE' कीवर्ड का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा चक्र है, जो ठगी का शिकार होने के बाद उठाए जाने वाले कदम को बताता है

​व्यावहारिक मार्गदर्शिका: यदि तमाम सावधानियों के बावजूद मानवीय भूल या तकनीकी चालाकी के कारण आप किसी साइबर फ्रॉड का शिकार हो जाते हैं और आपके खाते से पैसे कट जाते हैं, तो घबराने या अवसाद में जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. ऐसे समय में बिलासपुर पुलिस आपको त्वरित सहायता का विकल्प देती है. आपको बिना समय गंवाए भारत सरकार द्वारा जारी राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए. इसके अलावा आप अपने नजदीकी थाने या जिला मुख्यालय स्थित साइबर सेल/साइबर थाने में जाकर लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

'गोल्डन ऑवर' (Golden Hour) का महत्व: समय पर कार्रवाई से वापस मिल सकता है पैसा

​बलौदाबाजार पुलिस और साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर ठगी के मामलों में "गोल्डन ऑवर" यानी घटना के तुरंत बाद का पहला एक से दो घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है.​जब कोई अपराधी आपके खाते से पैसे निकालता है, तो वह तुरंत उन पैसों को नकद नहीं निकाल पाता. वह उन पैसों को अलग-अलग डिजिटल वॉलेट्स, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स (गिफ्ट वाउचर खरीदने के लिए) या अन्य बैंकों के खातों में ट्रांसफर करता है. यदि पीड़ित व्यक्ति घटना के तुरंत बाद (1 से 2 घंटे के भीतर) 1930 नंबर पर कॉल करके अपनी शिकायत दर्ज करा देता है, तो राष्ट्रीय साइबर पोर्टल तुरंत उस ट्रांजैक्शन आईडी को ट्रैक करता है और अपराधियों के उन बैंक खातों या वॉलेट्स को फ्रीज (Freezed) कर देता है. इससे पैसा ठगों के पास पहुंचने से पहले ही बीच में रुक जाता है और पीड़ित को उसका पैसा वापस मिलने की संभावना 90 प्रतिशत तक बढ़ जाती है. इसलिए, देरी न करें.

आधुनिक साइबर अपराध के नए रूप: जिनसे बचना बेहद जरूरी

​बलौदाबाजार पुलिस के इस अभियान का एक मुख्य उद्देश्य जनता को उन नए ट्रेंड्स के प्रति भी सचेत करना है जिनका इस्तेमाल आजकल बड़े पैमाने पर हो रहा है:

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest)

इसमें अपराधी वीडियो कॉल (व्हाट्सएप/स्काइप) के जरिए खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताते हैं. वे पीड़ित को डराते हैं कि उनके नाम पर आए पार्सल में ड्रग्स या हथियार मिले हैं और उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. लोक-लाज के डर से पीड़ित कैमरे के सामने ही उनके निर्देशों का पालन करता है और लाखों रुपये ट्रांसफर कर देता है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई नियम नहीं है और पुलिस कभी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती.

​लोन ऐप स्कैम (Loan App Scam)

प्ले स्टोर या बाहरी लिंक्स से छोटे और बिना गारंटी वाले लोन देने वाले ऐप्स डाउनलोड करवाए जाते हैं.लोन देने के बहाने ये ऐप्स आपके फोन की गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट का एक्सेस ले लेते हैं. बाद में पीड़ित की तस्वीरों को एडिट (मॉर्फ) करके उनके रिश्तेदारों को भेजने की धमकी दी जाती है और जबरन वसूली की जाती है. ​

पार्ट-टाइम जॉब/टास्क फ्रॉड:

टेलीग्राम या व्हाट्सएप पर मैसेज आते हैं कि घर बैठे यूट्यूब वीडियो लाइक करें या होटल को रेटिंग दें और रोज के 3000 से 5000 रुपये कमाएं.शुरू में वे कुछ पैसे मुनाफे के रूप में देते हैं और बाद में 'क्रिप्टो ट्रेडिंग' या 'वीआईपी टास्क' के नाम पर लाखों रुपये निवेश कराकर गायब हो जाते हैं.

पोस्टर के अंत में बलौदाबाजार पुलिस का सोशल मीडिया हैंडल (@BALODABAZARPOLICECEG) और हेल्पलाइन नंबर 1930 बड़े अक्षरों में अंकित है. किसी भी तरह का सायबर फ्रॉड पर होने पर तुरंत इस नंबर पर संपर्क करें.

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