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बलौदाबाजार पंचायत उपचुनाव : कुकुरडीह में मतदान संपन्न, रोजगार और शिक्षा पर मतदाताओं ने दिया जोर

बलौदाबाजार में त्रिस्तरीय पंचायत उप निर्वाचन के लिए मतदान जारी है. कुकुरडीह में सुबह से ही मतदाताओं की भारी भीड़ देखने को मिली.

voters gathered in Kukurdi panchayat
कुकुरडीह में मतदाताओं की उमड़ी भीड़ (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 1, 2026 at 1:10 PM IST

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Updated : June 1, 2026 at 2:15 PM IST

7 Min Read
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बलौदाबाजार : त्रिस्तरीय पंचायत उप-निर्वाचन 2026 के तहत सरपंच और पंच के रिक्त पदों को भरने के लिए मतदान प्रक्रिया चल रही है. लोकतंत्र के इस उत्सव में ग्रामीण बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. ग्राम पंचायत कुकुरडीह से भारी उत्साह की खबरें आ रही हैं, यहां सुबह से ही लोग मतदान केंद्रों पर लंबी कतार में लगकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं.

जिस गांव ने चुनाव का बहिष्कार किया था, वही बना लोकतंत्र का केंद्र

कुकुरडीह ग्राम पंचायत इस बार केवल चुनावी मुकाबले के कारण नहीं, बल्कि अपने राजनीतिक इतिहास के कारण भी चर्चा में है. ये वही गांव है जिसने पिछले पंचायत चुनाव में मतदान का बहिष्कार कर दिया था. उस समय ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मतदाता सूची को लेकर विवाद खड़ा हो गया था. ग्रामीणों का आरोप था कि सावरा समुदाय के करीब 250 से अधिक लोगों को ग्राम पंचायत की मतदाता सूची में शामिल किया गया है, जबकि वे मूल रूप से नगर पालिका क्षेत्र से जुड़े हुए हैं. इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव में हिस्सा लेने से इंकार कर दिया था और मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई थी.

रोजगार और शिक्षा पर मतदाताओं ने दिया जोर (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

हालांकि बाद में प्रशासनिक प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान सावरा समुदाय के मतदाताओं के नाम नगर पालिका क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल कर दिए गए. इसके बाद लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान हुआ और गांव के लोगों ने पंचायत चुनाव में हिस्सा लेने की सहमति दी. यही वजह है कि इस बार कुकुरडीह का मतदान केवल एक चुनाव नहीं बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में ग्रामीणों की वापसी के रूप में भी देखा जा रहा है.

voters gathered in Kukurdi panchayat
कुकुरडीह में मतदाताओं की उमड़ी भीड़ (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

महिलाओं की प्राथमिकता: नशामुक्त गांव और बेहतर शिक्षा

मतदान केंद्र पर पहुंची महिलाओं ने ETV भारत से बातचीत में गांव के विकास को लेकर अपनी अपेक्षाएं साझा कीं. महिलाओं का कहना है कि गांव का विकास केवल सड़क और भवन बनाने से नहीं होगा, बल्कि सामाजिक बदलाव भी जरूरी है. कई महिला मतदाताओं ने कहा कि गांव में नशे की समस्या बढ़ रही है.उनका मानना है कि नया जनप्रतिनिधि नशामुक्त वातावरण बनाने की दिशा में काम करे ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके. एक महिला मतदाता ने कहा कि गांव में शिक्षा की सुविधाएं भी सीमित हैं. वर्तमान में कुकुरडीह में केवल आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई की व्यवस्था है. इसके बाद बच्चों को आगे की शिक्षा के लिए दूसरे गांव या शहर जाना पड़ता है.

यदि गांव में ही बारहवीं तक स्कूल की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों को बड़ी राहत मिलेगी तथा विशेष रूप से बेटियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी- महिला मतदाता


युवाओं और पुरुष मतदाताओं की उम्मीदें भी अलग

पुरुष मतदाताओं का फोकस रोजगार और बुनियादी विकास पर अधिक दिखाई दिया.मतदान केंद्र पर मौजूद कई युवाओं और ग्रामीणों ने कहा कि पंचायत स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की जरूरत है. उनका कहना था कि गांव के अधिकांश युवा रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं. यदि पंचायत स्तर पर स्वरोजगार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन हो तो युवाओं को गांव में ही अवसर मिल सकते हैं. ग्रामीणों ने यह भी उम्मीद जताई कि नया सरपंच केवल चुनावी वादों तक सीमित न रहे, बल्कि गांव के विकास के लिए ठोस पहल करे.

कुकुरडीह में मतदाताओं की उमड़ी भीड़ (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

किन उम्मीदवारों के बीच कड़ा मुकाबला

कुकुरडीह ग्राम पंचायत में इस बार सरपंच पद के लिए मुकाबला बेहद रोचक माना जा रहा है. सरपंच पद के लिए पांच प्रत्याशी मैदान में हैं.

* डोमार सिंह साहू
* गंगा साहू
* किशन साहू
* रामभरोस यादव
* विनय वर्मा

वहीं पंचायत के 9 पंच पदों के लिए 18 उम्मीदवार चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. गांव के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार मुकाबला काफी करीबी हो सकता है क्योंकि सभी प्रत्याशी अलग-अलग सामाजिक वर्गों और मतदाता समूहों को साधने में जुटे हुए हैं.

1482 मतदाता तय करेंगे गांव की दिशा

कुकुरडीह ग्राम पंचायत में कुल 1482 मतदाता पंजीकृत हैं. यही मतदाता अगले पांच वर्षों के लिए गांव की नेतृत्व व्यवस्था तय करेंगे.यदि जातीय समीकरण की बात करें तो गांव में सबसे अधिक मतदाता ध्रुव समाज से जुड़े हुए हैं. इसके बाद सतनामी समाज के मतदाताओं की संख्या प्रमुख है. यही कारण है कि चुनावी रणनीतियों में सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. हालांकि मतदान केंद्रों पर मतदाताओं से बातचीत के दौरान यह भी देखने को मिला कि इस बार कई लोग जातीय समीकरणों से अधिक विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कर रहे हैं.


सुरक्षा के कड़े इंतजाम

कुकुरडीह में चुनाव को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क दिखाई दिया. पूर्व में हुए विवाद और संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यहां विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है.मतदान केंद्र और उसके आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है.सुरक्षा कर्मी लगातार मतदान प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं.प्रशासन की ओर से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मतदान केंद्र परिसर में अनावश्यक भीड़ एकत्र न हो. मतदान के बाद मतदाताओं को केंद्र परिसर से बाहर किया जा रहा है ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके.


प्रशासन को मतदान बढ़ने की उम्मीद

मतदान प्रक्रिया का निरीक्षण करने पहुंचे नायब तहसीलदार हमेश साहू ने बताया कि मतदान पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है.सभी मतदान केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है.

सुबह से ही मतदाताओं में उत्साह देखा जा रहा है और उम्मीद है कि दोपहर बाद मतदान प्रतिशत में और वृद्धि होगी- हमेश साहू, नायब तहसीलदार

30 पदों के लिए 73 उम्मीदवार मैदान में

​कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में चुनाव की सभी तैयारियां पूरी की गई हैं. जिले में कुल 30 पदों पर उपचुनाव हो रहा है, जिसमें 3 पद सरपंच और 27 पद पंच के हैं. इन पदों के लिए कुल 73 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

​सरपंच पद: 3 पदों के लिए 11 उम्मीदवार

​पंच पद: 27 पदों के लिए 62 उम्मीदवार

लोकतंत्र के प्रति बढ़ा भरोसा

कुकुरडीह की कहानी केवल एक पंचायत चुनाव की कहानी नहीं है.यह उस गांव की कहानी है जिसने कभी चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार किया था और आज उसी गांव में महिलाएं सुबह से कतार में खड़ी होकर मतदान कर रही हैं. मतदाता सूची विवाद के समाधान के बाद जिस तरह ग्रामीण लोकतांत्रिक प्रक्रिया में वापस लौटे हैं, वह प्रशासन और लोकतंत्र दोनों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है. अब सभी की नजर मतदान समाप्त होने के बाद आने वाले परिणामों पर रहेगी. लेकिन एक बात साफ है कि कुकुरडीह के लोगों ने इस बार मतदान के माध्यम से यह संदेश जरूर दे दिया है कि गांव के विकास की दिशा अब वोट की ताकत से तय होगी.

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Last Updated : June 1, 2026 at 2:15 PM IST