बलौदाबाजार में गुपचुप ठेला संचालक की हत्या, तीन दोषियों को आजीवन कारावास की सजा, जिला अदालत का फैसला
बलौदाबाजार जिला अदालत ने गुपचुप संचालक के मर्डर केस में फैसला सुनाया है. तीन दोषियों को उम्र कैद की सजा मिली है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : May 3, 2026 at 8:02 PM IST
बलौदाबाजार: छत्तीसगढ़ के बलौदाबजार जिले में एक गुपचुप ठेला संचालक की हत्या कर दी गई थी. यह हत्या लवन नगर में हुई थी. इस केस में बलौदाबाजार जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है. इस घटना के तीन दोषियों को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा अदालत ने सुनाई है.
साल 2024 की घटना
घटना 20 सितंबर 2024 के रात की है. विजय साहू, जो लवन नगर में गुपचुप का ठेला लगाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था, उस रात घर से घरेलू सामान लेने निकला था. करीब 8 बजे वह अहिल्दा मोड़ के पास पहुंचा ही था कि स्कूटी पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आरोपियों ने आते ही विजय साहू को घेर लिया और पुरानी रंजिश को लेकर विवाद शुरू कर दिया. कुछ ही मिनटों में बहस ने हिंसक रूप ले लिया और आरोपियों ने चाकू निकालकर विजय साहू पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया.
हमले में विजय साहू की मौत
हमला इतना अचानक और तेज था कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी वार कर चुके थे. घायल अवस्था में विजय साहू को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया.
पिता ने दर्ज कराया केस
मृतक के पिता बनवारी साहू ने पुलिस थाना लवन में रिपोर्ट दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या से संबंधित धाराओं में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की.मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की. आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया और पूछताछ शुरू की गई. जांच के दौरान पुलिस ने सबूत जुटाए. गवाहों के बयान दर्ज किए और घटनाक्रम को तकनीकी सबूतों से जोड़ा. तत्कालीन थाना प्रभारी शशांक सिंह के नेतृत्व में पूरी जांच की गई, उन्होंने बेहतर विवेचना तैयार किया.
कोर्ट में पेश हुए पुख्ता सबूत
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया. मामले की सुनवाई द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालय बलौदाबाजार में हुई, जहां सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मामला मजबूत साबित हुआ. शासन की ओर से विशेष अपर लोक अभियोजक अमिय अग्रवाल ने पैरवी की और प्रभावी तरीके से पक्ष रखा.
अदालत ने दोषियों को सुनाई सजा
मामले की सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से हमला किया और हत्या की. संजया रात्रे ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. चंद्रशेखर उर्फ शेखर और देवेंद्र साहू को विभिन्न धाराओं में आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा मिली. इनके अलावा राहुल साहू को भी हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

केस की जांच करने वाले अधिकारी ने क्या कहा ?
केस की विवेचना करने वाले तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक शशांक सिंह ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर तत्काल जांच शुरू की. घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर सबूत एकत्रित किए गए और आसपास मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए गए. उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में ही यह स्पष्ट हो गया था कि मामला पुरानी रंजिश से जुड़ा हुआ है. इसके बाद संदिग्धों की पहचान कर उनकी तलाश शुरू की गई और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
निरीक्षक शशांक सिंह के अनुसार, विवेचना के दौरान तकनीकी साक्ष्यों के साथ-साथ प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को आपस में जोड़ा गया, जिससे पूरे घटनाक्रम की कड़ी स्पष्ट हो सकी. उन्होंने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में घटना में प्रयुक्त हथियार के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसके आधार पर आगे की जांच को मजबूत किया गया. विवेचना अधिकारी ने कहा कि केस की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर विस्तृत जांच की गई. उसके बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश किया गया. जिसके आधार पर दोषियों को सजा मिल सकी है. अदालत के फैसले ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम उठाया है.

