खरीफ सीजन में खाद बीज की कालाबाजारी पर सख्ती, जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल गठित
बलौदाबाजार प्रशासन ने खरीफ सीजन में खास तैयारियां की है, कृषि उप संचालक दीपक कुमार नायक ने ETV भारत को जानकारी दी.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : June 3, 2026 at 10:23 AM IST
|Updated : June 3, 2026 at 10:32 AM IST
बलौदाबाजार: खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन ने किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है. एक ओर जहां उर्वरक और बीज की कालाबाजारी, जमाखोरी और गुणवत्ता पर निगरानी रखने के लिए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया गया है, वहीं दूसरी ओर किसानों और आम लोगों की शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए 1076 सीएम हेल्पलाइन और शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) को प्रभावी ढंग से लागू करने की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं. कलेक्टर कुलदीप शर्मा के मार्गदर्शन में लिए गए इन दोनों महत्वपूर्ण निर्णयों को प्रशासनिक व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितैषी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.
खाद-बीज की कालाबाजारी रोकने प्रशासन का बड़ा कदम
हर वर्ष खरीफ सीजन में किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ता है. कई बार ज्यादा कीमत पर बिक्री, कृत्रिम कमी, जमाखोरी और गुणवत्ता संबंधी शिकायतें सामने आती हैं. इसी को देखते हुए जिला प्रशासन ने इस बार पहले से ही सख्ती बरतते हुए जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल का गठन किया है.
कृषि उप संचालक दीपक कुमार नायक ने ETV भारत को बताया कि उड़नदस्ता दल में सहायक संचालक कृषि नारद कुमार भारद्वाज को नोडल अधिकारी बनाया गया है. दल में सहकारिता निरीक्षक देवेन्द्र नेताम, पर्यवेक्षक तेजनाथ साहू, प्रोग्रामर नरेन्द्र वर्मा, वाहन चालक कुमार भारद्वाज और भृत्य शंकर लाल साहू को शामिल किया गया है. यह टीम जिले के सहकारी और निजी उर्वरक एवं बीज विक्रय केंद्रों का औचक निरीक्षण करेगी. जांच के दौरान यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
दुकानों में स्टॉक और पॉस मशीन का होगा मिलान
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि केवल कागजी रिकॉर्ड के आधार पर काम नहीं चलेगा. उड़नदस्ता दल उर्वरक विक्रय केंद्रों में उपलब्ध वास्तविक स्टॉक और पॉस मशीन में दर्ज स्टॉक का मिलान करेगा. यदि दोनों आंकड़ों में अंतर पाया जाता है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. इससे फर्जी बिक्री, स्टॉक छिपाने और कालाबाजारी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है.
ज्यादा कीमत वसूलने वालों पर भी होगी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसानों को निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद बेचने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा. दल, किसानों से भी फीडबैक लेगा और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच करेगा. यदि कोई विक्रेता अधिक दर पर खाद बेचता पाया गया तो उसके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
भाटापारा रैक पॉइंट से वितरण पर रहेगी नजर
जिले में खाद की आपूर्ति का प्रमुख केंद्र भाटापारा रैक पॉइंट है. प्रशासन ने यहां से प्राप्त होने वाले उर्वरकों की मात्रा और उनके वितरण की निगरानी की भी जिम्मेदारी उड़नदस्ता दल को सौंपी है. दल यह सुनिश्चित करेगा कि जिले को आबंटित खाद की पूरी मात्रा प्राप्त हो और डबल लॉक में भंडारित उर्वरकों को आवश्यकता के अनुसार सहकारी समितियों तक पहुंचाया जाए. साथ ही किसानों तक खाद का समय पर वितरण भी सुनिश्चित किया जाएगा ताकि बुवाई के समय किसी प्रकार की समस्या न आए.
कृषि के अलावा उपयोग पर भी निगरानी
प्रशासन ने उर्वरकों के गैर कृषि उपयोग पर भी नजर रखने का फैसला किया है. जानकारी के अनुसार कुछ स्थानों पर अनुदान प्राप्त उर्वरकों का उपयोग पशु आहार निर्माण, रेजिन और प्लाईवुड उद्योग जैसे गैर कृषि कार्यों में किए जाने की शिकायतें मिलती रही हैं. इसी को देखते हुए उद्योग विभाग से संबंधित इकाइयों की सूची प्राप्त कर निरीक्षण किया जाएगा. यदि कहीं कृषि उपयोग के लिए उपलब्ध कराए गए उर्वरकों का दुरुपयोग पाया गया तो संबंधित संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए किसानों को किया जाएगा प्रेरित
कृषि विभाग केवल निगरानी तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि किसानों को जागरूक भी करेगा. उड़नदस्ता दल किसानों को वैकल्पिक और संतुलित उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करेगा. साथ ही इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अनुशंसित उर्वरक समूहों के उपयोग संबंधी जानकारी भी किसानों को दी जाएगी.कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है.
1076 सीएम हेल्पलाइन से शिकायतों का होगा त्वरित समाधान
खाद-बीज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ जिला प्रशासन ने शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए भी तैयारी तेज कर दी है. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप राज्य में 1076 सीएम हेल्पलाइन शुरू की जा रही है. इसी संबंध में कलेक्टर कुलदीप शर्मा की अध्यक्षता में जिला और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण में अधिकारियों को शिकायत प्रबंधन प्रणाली (सीएमएस) और हेल्पलाइन के संचालन की विस्तृत जानकारी दी गई.
शिकायतों को मिलेगा 12 अंकों का यूनिक नंबर
सीएम हेल्पलाइन की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि प्रत्येक शिकायत को 12 अंकों का विशिष्ट टोकन नंबर दिया जाएगा. इस नंबर के माध्यम से शिकायतकर्ता अपनी शिकायत की स्थिति हर चरण में ट्रैक कर सकेगा. इससे शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और लोगों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
पांच स्तंभों पर आधारित होगी नई व्यवस्था
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को बताया गया कि सीएम हेल्पलाइन पांच प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी—
- शिकायत ट्रैकिंग
- समयबद्ध निवारण
- नागरिक फीडबैक
- पारदर्शिता एवं जवाबदेही
- प्रभावी निगरानी
इन पांचों तत्वों को ध्यान में रखते हुए शिकायतों का निराकरण किया जाएगा.
तय समय में समाधान नहीं तो पहुंचेगी ऊपर
नई व्यवस्था में समय सीमा का विशेष ध्यान रखा गया है. यदि किसी अधिकारी द्वारा निर्धारित अवधि में शिकायत का समाधान नहीं किया जाता है तो वह शिकायत स्वतः अगले उच्च स्तर के अधिकारी के पास पहुंच जाएगी. इस व्यवस्था से लापरवाही पर अंकुश लगेगा और अधिकारियों की जवाबदेही बढ़ेगी.
शिकायत दर्ज कराने के चार माध्यम
राज्य सरकार ने नागरिकों को शिकायत दर्ज कराने के लिए चार अलग-अलग विकल्प दिए हैं। नागरिक—
- 1076 हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर सकते हैं
- ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं
- व्हाट्सएप माध्यम से शिकायत भेज सकते हैं
- मुख्यमंत्री के समक्ष व्यक्तिगत रूप से आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं
इसके अलावा जो लोग आवेदन लिखने में सक्षम नहीं हैं, उनके लिए कॉल बैक सुविधा भी उपलब्ध रहेगी. केवल कॉल बैक का अनुरोध करेंगे और संबंधित टीम उनसे संपर्क कर शिकायत दर्ज करेगी.
मोबाइल ऐप से भी मिलेगी सुविधा
नागरिकों की सुविधा के लिए सीएम हेल्पलाइन 1076 मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर और एप्पल स्टोर पर उपलब्ध रहेगा. इसके माध्यम से शिकायत दर्ज करना, स्थिति देखना और फीडबैक देना आसान होगा.

