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वायरल वीडियो के बाद भाटापारा में अविनाश इंडस्ट्रीज के ‘युवराज पोहा’ पर सवाल, बिना सफाई के पैकिंग, हाइजीन पर सवाल

फैक्ट्री में पोहा की पैकिंग का वीडियो सामने आने के बाद सफाई और उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.

BALODABAZAR POHA VIRAL VIDEO
फैक्ट्री में पोहा की पैकिंग का वीडियो सामने आने के बाद गुणवत्ता पर सवाल (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : February 18, 2026 at 6:05 PM IST

4 Min Read
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बलौदाबाजार: जिले के भाटापारा क्षेत्र में स्थित अविनाश इंडस्ट्रीज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. दावा किया जा रहा है कि यहां ‘युवराज पोहा’ नाम से तैयार होने वाले पोहे की पैकिंग सही तरीके से नहीं की जा रही है और ना ही वहां साफ-सफाई है. वीडियो सामने आने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है.

वीडियो में क्या दिख रहा है?

वायरल वीडियो में कुछ कर्मचारी खुले पोहे को बड़े ढेर या टब से उठाकर सीधे पैकेट में भरते नजर आ रहे हैं. हाइजीन को लेकर कर्मचारियों ने ग्लव्स, मास्क या हेयर कैप जैसा कुछ भी नहीं पहना हैं. पैकिंग स्थल भी साफ-सुथरा नहीं दिख रहा और पोहे के ढेर पर ही कर्मचारी खुद बैठे दिख रहे हैं. पूरी प्रक्रिया हाथ से (मैन्युअल) होती दिखाई दे रही है. इसे देखकर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस तरह पैक किया गया खाद्य पदार्थ सुरक्षित हो सकता है?

वायरल वीडियो के बाद भाटापारा में अविनाश इंडस्ट्रीज के ‘युवराज पोहा’ पर सवाल (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

उपभोक्ताओं में नाराजगी

कई लोगों ने लिखा कि वे रोज पैक्ड पोहा खरीदते हैं और उन्हें भरोसा होता है कि यह स्वच्छ वातावरण में तैयार हुआ होगा. कुछ यूजर्स ने कहा कि इस तरह की लापरवाही से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.

हाइजीन क्यों है जरूरी?

खाद्य पदार्थों की पैकिंग के दौरान साफ-सफाई बेहद जरूरी होती है. ग्लव्स और हेयर कैप संक्रमण से बचाते हैं. साफ फर्श और उपकरण बैक्टीरिया के खतरे को कम करते हैं. स्वच्छ वातावरण से उत्पाद की गुणवत्ता बनी रहती है. विशेषज्ञों के अनुसार, अगर हाइजीन का ध्यान नहीं रखा जाए तो खाने की चीजों में हानिकारक जीवाणु पनप सकते हैं.

पैकेजिंग चमकदार, लेकिन सवाल बरकरार

‘युवराज पोहा’ बाजार में आकर्षक पैकेजिंग के साथ बेचा जाता है. बाहरी लुक देखकर उपभोक्ता गुणवत्ता का अंदाजा लगाते हैं. लेकिन वायरल वीडियो के बाद लोग कह रहे हैं कि सिर्फ पैकेट का डिजाइन ही सब कुछ नहीं होता, असली मायने निर्माण और पैकिंग प्रक्रिया के होते हैं.

FSSAI से जांच की मांग

कई लोगों ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) से मामले की जांच की मांग की है. लोगों का कहना है कि फैक्ट्री का निरीक्षण किया जाए और अगर नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो सख्त कार्रवाई की जाए.

प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल

ऐसे मामलों में स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है. समय-समय पर औचक निरीक्षण जरूरी है. सैंपल जांच और लाइसेंस की निगरानी आवश्यक है. अगर वीडियो सही पाया जाता है, तो संबंधित इकाई पर जुर्माना या उत्पादन रोकने जैसी कार्रवाई हो सकती है.

संचालक ने दी सफाई

वहीं इंडस्ट्रीज के संचालक रुपेश ने कहा कि ये वीडियो पुराना हो सकता है. साथ ही उनका मानना है कि कर्मचारी खुद को वायरल करने के लिए ऐसा किए होंगे. अगर शिकायत आती है तो माल वापस मंगाया जाएगा.

आगे निगरानी और ज्यादा रखेंगे, CCTV लगाने के साथ मैनेजर भी रखेंगे. लापरवाही की जानकारी हमें नहीं है, हो सकता है मजदूरों ने मीडिया में आने के लिए ऐसा किया हो- रुपेश किंगलानी, संचालक

उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह

  • पैक्ड फूड खरीदते समय FSSAI लाइसेंस नंबर जरूर देखें.
  • निर्माण और समाप्ति तिथि जांचें.
  • उत्पाद को लेकर संदेह हो तो शिकायत दर्ज कराएं.

यह मामला खाद्य उद्योग के लिए भी एक चेतावनी है कि स्वच्छता और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता.

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