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जलकैना देव स्थल को मुक्त कराने की मांग तेज, बालोद में आदिवासियों का ‘जातरा’ निकला, पुलिस से झड़प

जलकैना की पुकार: जब अपनी ही धरती पर 'बंधक' बने आदिवासियों के देव, तो जंगलों से गूंजी 'जातरा' की हुंकार

Jalkaina Devsthal dispute
बालोद में आदिवासियों का ‘जातरा’ निकला, पुलिस से झड़प (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 22, 2026 at 12:55 PM IST

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बालोद: जलकैना देव स्थल को लेकर आदिवासी लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. आदिवासी समाज का कहना है कि उनका पारंपरिक देव स्थल वर्षों से विवाद में है और प्रशासन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दे रहा है. इस बीच डोंडीलोहारा के लोहारा ब्लॉक में 20 जून को हजारों आदिवासी एक बड़े ‘जातरा’ में शामिल हुए.

यह आयोजन जलकैना देव स्थल को मुक्त कराने और अपनी संस्कृति व आस्था की रक्षा के लिए किया गया. लेकिन इस दौरान एक ऐसा मंजर भी आया जब देवस्थल जा रहे सामाजिक जातरा से सेवा अर्जी का सामान प्रशासन ने छीन लिया, जिसे लेकर जमकर झड़प भी हुई.

जलकैना देव स्थल को मुक्त कराने की मांग तेज (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

क्या है पूरा विवाद?

सर्व आदिवासी समाज का आरोप है कि बाबा बालक दास के आश्रम ने संरक्षित वन भूमि पर कब्जा कर लिया है. समाज का कहना है कि उनके पारंपरिक जलकैना देव स्थल को आश्रम की चारदीवारी के भीतर कर दिया गया है, जिससे आदिवासी अपने धार्मिक अनुष्ठान स्वतंत्र रूप से नहीं कर पा रहे हैं. कई महीनों तक प्रशासन से शिकायत करने के बावजूद समाधान नहीं निकलने पर समाज ने अपनी परंपरा के अनुसार ‘जातरा’ आयोजित करने का फैसला किया.

Jalkaina Devsthal dispute
डोंडीलोहारा के लोहारा ब्लॉक में कई आदिवासी एक बड़े ‘जातरा’ में शामिल हुए (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में हुआ आयोजन

20 जून की सुबह तुएगोंदी के जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया. आदिवासी संगठनों का आरोप है कि पुलिस आश्रम की सुरक्षा के लिए तैनात थी. आदिवासी समाज का यह भी आरोप है कि कुछ पत्रकारों को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने से रोका गया.

सेवा अर्जी को लेकर हुई झड़प

आदिवासी समाज के लोगों का कहना है कि जब वे पारंपरिक पूजा सामग्री और ‘सेवा अर्जी’ लेकर जलकैना देव स्थल की ओर जा रहे थे, तब प्रशासन और पुलिस ने उनकी सामग्री जब्त कर ली. इस घटना के बाद कुछ युवाओं और पुलिस के बीच झड़प हुई. हालांकि, समाज के बुजुर्गों और पदाधिकारियों ने स्थिति को संभाला और माहौल को शांत किया.

Jalkaina Devsthal dispute
पारंपरिक वाद्ययंत्र और समाज के आस्था से जुड़ी पवित्र सामग्रियां लेकर जुटे आदिवासी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

24 घंटे तक चला पूजा-अनुष्ठान

हजारों श्रद्धालुओं ने लगभग 24 घंटे तक पारंपरिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान किए. समाज के नियमों के कारण कई धार्मिक प्रक्रियाओं की तस्वीरें और वीडियो नहीं बनाए गए. पूजा समाप्त होने के बाद सभी देवी-देवताओं को सम्मानपूर्वक उनके मूल स्थलों पर वापस ले जाया गया.

कई संगठनों ने दिया समर्थन

जलकैना देव स्थल की मुक्ति की मांग को कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला है. इनमें सर्व आदिवासी समाज, कांग्रेस पार्टी, जन मुक्ति मोर्चा, छत्तीसगढ़ स्वाभिमान मंच और भीम आर्मी शामिल हैं. इन संगठनों का आरोप है कि प्रशासन की हालिया बुलडोजर कार्रवाई केवल दिखावा थी और स्थायी समाधान तभी संभव है, जब आदिवासियों को उनका देव स्थल वापस मिले.

आदिवासी नेताओं ने क्या कहा?

खुद मुख्यमंत्री ने हमारी संस्कृति को समझा था और कहा था कि इसे रोकना नहीं चाहिए, फिर ये स्थानीय अधिकारी हमारी आस्था के दुश्मन क्यों बने हुए हैं?- विनोद नागवंशी, सर्व आदिवासी समाज

यह हमारी जमीनों और भगवान को बचाने की लड़ाई है. हम पीछे नहीं हटेंगे- सुभाष परते, युवा प्रभाग अध्यक्ष

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जलकैना देव स्थल को मुक्त कराने की मांग तेज (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

सर्व आदिवासी समाज के नेताओं का कहना है कि यह आंदोलन उनकी आस्था, संस्कृति और जमीन से जुड़ा हुआ है. समाज के कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को आगे बढ़ाते रहेंगे और जलकैना देव स्थल की मुक्ति तक संघर्ष जारी रहेगा.

‘जातरा’ खत्म हो चुकी है, लेकिन जलकैना देव स्थल को लेकर विवाद अभी भी बना हुआ है. एक तरफ समाज के लोगों ने आगे बड़े कदम उठाने की चेतावनी दे डाली है. अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है.

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