बालोद के इस गांव में चुगली पर बैन, अगर चुगली की और विवाद हुआ तो लगेगा 5 हजार जुर्माना
मेढ़का गांव अनोखे फैसले के चलते सुर्खियों में बना हुआ है. यहां चुगली करने के साथ ही शराब पीकर विवाद करने पर भी प्रतिबंध है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 21, 2026 at 8:59 PM IST
बालोद से दानवीर साहू की रिपोर्ट
बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के एक गांव में लिए गए फैसले ने सबका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है. मामला मेड़की गांव का है, जहां चुगली करने पर बैन लगाया गया है. इतना ही नहीं चुगली करते पाए जाने पर या शिकायत और सबूत मिलने पर 5 हजार रुपए तक का दंड भी लगा है.
क्यों लिया गया यह फैसला?
यहां ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से अनोखा फैसला लिया है. समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि गांव में कई बार छोटे-छोटे झगड़े चुगली की वजह से बड़े विवाद में बदल गए. अक्सर चुगली करने वाला बच जाता है, लेकिन दो पक्षों में तनाव और मारपीट की स्थिति बन जाती है. हाल ही में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसकी जड़ चुगली को माना गया. इसके बाद गुरुवार को बैठक हुई और सभी की सहमति से यह सख्त निर्णय लिया गया.

कई ऐसे लोग रहते हैं जो एक-दूसरे को लेकर लड़ाकर अपना मजे लेते हैं. हाथा-पाई की नौबत भी आ जाती है इसलिए चुगली पर जुर्माना लगाने जैसे फैसले लिए गए हैं- विश्वकांत भारद्वाज, पंच प्रतिनिधि
कोई चुगली करते पाया जाता है या शिकायत मिलती है तो उनसे 5000 रुपए लिया जाएगा. शराब को लेकर भी ऐसा ही फैसला है- दिनेश साहू, कोषाध्यक्ष
लोगों ने भी किया स्वागत
यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया है. इस वजह से चुगली को लेकर गांव में लिए इस फैसले के बाद से गांव में काफी सुधार आया है और ग्रामीण इस पूरे फैसले का स्वागत कर रहे हैं.
चौक-चौराहे पर बैठकर चुगली करना सख्त मना किए हैं. इससे गांववासी एकता की डोर में बंधे रहेंगे- छबील राम साहू, ग्रामीण
हम भी मीटिंग में थे, जो भी नियम बनाया गया है वो बहुत अच्छा है, इससे लोग गलत काम करने में थोड़ा डरेंगे, पीकर हल्ला करने जैसी घटना कम होगी- भूखन लाल श्रीवास्तव, बुजुर्ग ग्रामीण
5 साल पहले लिया था नशा मुक्ति का फैसला
ग्राम के कोषाध्यक्ष दिनेश साहू ने बताया कि गांव में 5 साल पहले भी नशे के खिलाफ बड़ा कदम उठाया गया था. गांव में शराब बेचने वालों पर 10,000 रुपये का जुर्माना तय किया गया. सार्वजनिक जगह पर शराब पीकर हंगामा करने पर 11,000 रुपये का दंड रखा गया.
शराब बेचने वालों की जानकारी देने वाले को 1,000 रुपये का इनाम देने का भी फैसला लिया गया. इन फैसलों के बाद गांव में काफी सुधार देखा गया. नशा ऐसी कुसंगति है जो सब तबाह कर देता है. गांव का माहौल भी खराब होता है. इसलिए गांव की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए ये फैसले लिए गए हैं.

गांव में बढ़ा शांति का माहौल
ग्रामीणों का कहना है कि यह फैसला किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव की भलाई के लिए लिया गया है. बुजुर्गों का मानना है कि पहले गांव में आपसी भरोसा ज्यादा मजबूत था, लेकिन अब अफवाहों और सोशल मीडिया की वजह से गलतफहमियां तेजी से फैलती हैं. नए नियम से उम्मीद है कि चुगली और भड़काव कम होगा. लोग जिम्मेदारी से बात करेंगे. साथ ही गांव में शांति और सद्भाव बना रहेगा.

क्या बनेगा यह आदर्श गांव?
बालोद जिले के इस अनोखे फैसले ने पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश का ध्यान आकर्षित किया है. अब देखना होगा कि आने वाले समय में इस फैसले का कितना सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. फिलहाल, ग्राम मेड़की आसपास के क्षेत्रों के लिए एक आदर्श गांव के रूप में उभरता नजर आ रहा है.

