बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ बनाना लक्ष्य: चाइल्ड मैरिज में शामिल होने वाले रिश्तेदार, पुजारी, टेंट संचालक, कुक को सजा का प्रावधान: वर्णिका शर्मा
सरगुजा में जहां पहले बाल विवाह की दर 73-75 प्रतिशत तक थी, वह घटकर 25-30 पर आ गई है. प्रवीण कुमार सिंह की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 2, 2026 at 8:46 PM IST
|Updated : July 2, 2026 at 9:01 PM IST
रायपुर: बाल विवाह करवाना एक कानूनी और सामाजिक अपराध है. इस अपराध में दोषी पाए जाने पर सख्त सजा का प्रावधान है. कानून के मुताबिक 18 साल से कम उम्र की लड़की और 21 साल से कम उम्र के लड़के की शादी कानून अपराध की श्रेणी में आता है. भारत में यह कुप्रथा मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जो बच्चों के शारीरिक, मानसिक और शैक्षिक विकास को को प्रभावित करती है. बावजूद इसके आज चोरी छिपे इस तरह के अपराध को अंजाम दिया जा रहा है. सभ्य समाज ये मानता है कि शादी जीवन का एक अहम पड़ाव है. लेकिन जब यही शादी बचपन की दहलीज पर ही करा दी जाए तो यह परंपरा नहीं बल्कि एक गंभीर अपराध साबित होती है.
बाल विवाह को लेकर कानून सख्त है, जागरूकता अभियान लगातार चल रहे हैं, फिर भी हर साल बाल विवाह के मामले सामने आते हैं. हालांकि छत्तीसगढ़ में पहले की अपेक्षा वर्तमान में बाल विवाह के मामलों में काफी कमी आई है. ऐसे में आखिर कौन हैं जो बच्चों का बचपन छीन रहा हैं ? क्या गरीबी, सामाजिक सोच और परंपराएं आज भी कानून से ज्यादा मजबूत हैं. छत्तीसगढ़ में इस चुनौती से निपटने के लिए राज्य बाल संरक्षण आयोग कितनी प्रभावी भूमिका निभा रहा है, इन्हीं अहम सवालों के जवाब जानने के लिए ईटीवी भारत की टीम ने राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा से खास बातचीत की.
सवाल: छत्तीसगढ़ में बाल विवाह की क्या स्थिति है ?
जवाब: छत्तीसगढ़ में बाल विवाह रोकने के लिए पहले से ही व्यापक तैयारी की गई थी. राज्य बाल संरक्षण आयोग के माध्यम से प्रदेश स्तरीय बैठकें आयोजित की गईं, जिनमें स्पष्ट रणनीति तय की गई. जिला प्रशासन, महिला एवं बाल विकास विभाग, नगरीय निकायों और अन्य विभागों ने समन्वित रूप से कार्रवाई की. इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं, पहले की तुलना में बाल विवाह के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है.
सवाल सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले किन जिलों से आ रहे हैं, इसकी क्या वजह है ?
जवाब: सीमावर्ती राज्यों से लगे जिलों में बाल विवाह की दर अपेक्षाकृत अधिक देखी गई है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सरगुजा संभाग में पहले अधिक मामले सामने आते थे, लेकिन इस बार वहां भी काफी गिरावट दर्ज की गई है.
सवाल: बाल विवाह की वजह क्या है ?
जवाब: अक्षय तृतीया में बिना मुहूर्त देखे विवाह करने की परंपरा के कारण ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में इस दिन बड़ी संख्या में बाल विवाह होते थे. पहले जब प्रशासनिक टीमें पहुंचती थीं तो लोग कुछ समय के लिए विवाह रोक देते थे, लेकिन बाद में दूसरी जगह जाकर शादी करवा देते थे, क्योंकि पूरी तैयारी पहले से हो चुकी होती थी.
सवाल: अब अक्षय तृतीया पर किस तरह की तैयारी की जाती है ?
जवाब: अब लगभग 15 दिन पहले से तैयारी शुरू कर दी जाती है. सभी जिलों में बैठकों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 से जुड़े पोस्टर, बैनर और प्रचार सामग्री स्थानीय भाषा और बोली में उपलब्ध हो. साथ ही ग्राम सभाओं, धार्मिक आयोजनों और सामुदायिक बैठकों में लोगों को लगातार जागरूक किया जाता है.
सवाल: जब पहले टीम जाती थी तो लोगों को क्या समझाती थी ?
जवाब: पहले अधिकारियों द्वारा लोगों को यह बताया जाता था कि बाल विवाह से बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है. कम उम्र में विवाह उनकी स्वाभाविक विकास प्रक्रिया को रोक देता है और उनके भविष्य पर गंभीर असर डालता है.
सवाल: क्या बाल विवाह में शामिल सभी लोगों को सजा हो सकती है ?
जवाब: हाँ, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत केवल विवाह कराने वाले या माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल सभी लोग दंड के पात्र हैं. इसमें रिश्तेदार, पुजारी, टेंट संचालक, भोजन बनाने वाले और अन्य सहयोगी भी शामिल हो सकते हैं. ऐसे मामलों में 2 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है.
सवाल: जो इस विवाह में शामिल होते हैं, उन्हें तो सिर्फ विवाह की जानकारी होती है, उनका क्या दोष होता है ?
जवाब: अधिनियम में सभी के लिए समान दंड का प्रावधान है. इसी जानकारी का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया और मुनादी कराई जाती है. सोशल मीडिया और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों को जागरूक किया जाता है, जिसके साकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं. हम छात्रों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भी मदद लेते हैं.
सवाल: शादी के कार्ड में उम्र नहीं लिखी होती है. ऐसे में शादी में शामिल होने वाला कैसे सजा का भागीदार हो सकता है ?
जवाब: एक जागरूक नागरिक होने के नाते सभी की जिम्मेदारी है कि कम उम्र के बच्चों के विवाह में शामिल न हों. टेंट संचालकों, बाजा वालों, कैटरर्स और अन्य सेवा प्रदाताओं से भी कहा गया है कि वे किसी भी शादी की बुकिंग लेने से पहले वर-वधू की आयु की पुष्टि करें और उसके बाद ही अपनी सेवाएं दें.
सवाल: बाल विवाह रोकने के लिए राज्य सरकार कौन-कौन से अभियान चला रही है ?
जवाब: छत्तीसगढ़ सरकार ने 10 मार्च 2024 से बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान शुरू किया. इसके बाद भारत सरकार ने 27 नवंबर 2024 को "बाल विवाह मुक्त भारत" अभियान की घोषणा की. इस तरह छत्तीसगढ़ से शुरू हुई पहल राष्ट्रीय स्तर तक पहुंची. अब राज्य और केंद्र सरकार मिलकर बाल विवाह पर प्रभावी रोक लगाने के लिए संयुक्त प्रयास कर रहे हैं. इस मॉडल को नेपाल में भी अपनाया गया है.
सवाल: जब राज्य सरकार को बाल विवाह की सूचना मिलती है तो पुलिस, बाल संरक्षण आयोग और अन्य विभाग किस तरह कार्रवाई करते हैं ?
जवाब: सामान्य दिनों में भी संबंधित टीमें सक्रिय रहती हैं, लेकिन संवेदनशील अवधि में डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर (DCPO) विशेष रूप से अलर्ट रहते हैं. महिला एवं बाल विकास विभाग के सामाजिक कार्यकर्ता, पुलिस के बाल कल्याण अधिकारी और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है. जैसे ही 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन पर सूचना मिलती है, तत्काल संयुक्त कार्रवाई की जाती है.
सवाल: क्या आप किसी ऐसी घटना का उल्लेख कर सकती हैं, जहां समय रहते बाल विवाह रोका गया हो ?
जवाब: इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हमारे पास है. बैगा जनजाति की दो बच्चियों का फोन आयोग के पास आया था. उन्होंने बताया कि उनका बाल विवाह कराया जा रहा है. सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू कर बाल विवाह रुकवाया गया.
सवाल: कई जगहों पर मांगलिक भवन, सामुदायिक भवन और पंचायत भवनों में शादियां होती हैं, क्या वहां भी अलर्ट जारी किया जाता है ?
जवाब: इन सभी स्थानों के लिए विशेष अनुशंसा की गई है. जब भी विवाह के लिए भवन आरक्षित किया जाए, तब यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन बच्चों का विवाह हो रहा है उनकी आयु वैधानिक है या नहीं इसका पता लगाना चाहिए.
सवाल: कई बार बुकिंग के दौरान आयु की जानकारी नहीं दी जाती, ऐसे में क्या किया जाए ?
जवाब: बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है. इसे रोकने के लिए पूरे समाज को साथ आना होगा. जहां भी संभव हो, संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए ताकि किसी बच्चे का जीवन जोखिम में न पड़े.
सवाल: बाल विवाह रोकने के लिए बाल संरक्षण आयोग के पास क्या-क्या अधिकार हैं ?
जवाब: आयोग अपनी धाराओं 13, 14 और 15 के तहत पूरी तरह सक्रिय है. हमारा उद्देश्य बच्चों के जीवन, सुरक्षा, विकास और सहभागिता के अधिकारों की रक्षा करना है. सबसे बड़ी चुनौती जागरूकता को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है.
सवाल: क्या इस तरह का कोई विशेष अभियान चलाया गया है ?
जवाब: बीजापुर में स्थानीय गोंडी भाषा में पत्रक, नुक्कड़ नाटक और जनजागरूकता अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम मिले हैं. वहीं कांकेर में 'मेरी आवाज सुनो' अभियान के तहत बाल विवाह से बचाई गई बेटियों ने गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया है.
सवाल: क्या कहा जा सकता है कि बाल विवाह रोकने के लिए आपका सूचना तंत्र अब मजबूत हो गया है ?
जवाब: हर क्षेत्र में एक जैसी रणनीति काम नहीं करती. स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अभियान चलाना पड़ता है. हमारा प्रयास है कि जागरूकता सुदूर वनांचलों तक पहुंचे.
सवाल: यदि अभी तत्काल बाल विवाह की सूचना मिलती है तो आपका अगला कदम क्या होता है ?
जवाब: सूचना 1098 हेल्पलाइन या स्वप्रेरणा से मिलते ही तत्काल टीम गठित कर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जाता है. इसके बाद बच्ची और उसके अभिभावकों को बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, जहां दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई होती है.
सवाल: जब आप बाल विवाह रोकने जाते हैं तो किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है ?
जवाब: कई जगह लोगों की भावनाएं जुड़ी होती हैं, इसलिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है. हमारा मानना है कि विवाह वाले दिन रोकने से ज्यादा जरूरी पहले से जागरूकता फैलाना है. अच्छी बात यह है कि अब समाज के कई लोग इस अभियान में हमारा साथ दे रहे हैं.
सवाल: प्रदेश में बाल विवाह के संज्ञान में आने की क्या स्थिति है ?
जवाब: इस बार आयोग तक आने वाली सूचनाओं में 4.80 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लोग और बच्चे स्वयं आयोग को फोन कर रहे हैं। रोके गए मामलों में 3.32 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कुछ मामलों में लोकेशन बदलने जैसी वजहों से तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी, लेकिन बाद में उन पर भी कार्रवाई की गई।
सवाल: बाल विवाह में किन-किन कानूनों के तहत कार्रवाई हो सकती है ?
जवाब: यदि बच्ची नाबालिग है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के साथ-साथ POCSO एक्ट भी लागू हो सकता है. इसमें कड़ी सजा का प्रावधान है, इसलिए कानून को हल्के में नहीं लेना चाहिए.
सवाल: बाल विवाह से जुड़े और क्या आंकड़े हैं ?
जवाब: रोके गए मामलों में वृद्धि हुई है, कुछ ही मामलों में लोकेशन बदलने के कारण तत्काल कार्रवाई नहीं हो सकी. सरगुजा में जहां पहले बाल विवाह की दर 73-75 प्रतिशत तक थी, वह इस बार घटकर लगभग 25-30 प्रतिशत रह गई है।
सवाल: क्या बाल विवाह की मुख्य वजह गरीबी, अशिक्षा या सामाजिक परंपराएं हैं ?
जवाब: हाल के अनुभव बताते हैं कि कई जगह शिक्षा की कमी और स्कूलों की दूरी बड़ी वजह है. कई परिवार आर्थिक कारणों से दो बेटियों की शादी एक साथ कर देते हैं, जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती है.
सवाल: क्या कभी ऐसा हुआ है कि बाल विवाह रोकने पर समाज के लोग परंपरा का हवाला देकर विरोध करने लगे ?
जवाब: सुदूर वनांचलों में कई बार लोग कहते हैं कि उनकी परंपरा में कम उम्र में ही विवाह होता है. ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण होता है कि आप संवेदनशीलता और ईमानदारी से उन्हें समझा सकें.
सवाल: जब लोग परंपराओं का हवाला देते हैं तो आप क्या करते हैं ?
जवाब: शहर से दूर दराज की बस्तियों में लोगों को बच्चों के अधिकारों और कानून की जानकारी ही नहीं होती. ऐसे में पहले विश्वास बनाना और जागरूकता फैलाना सबसे जरूरी होता है.
सवाल: क्या वर्तमान कानून पर्याप्त हैं या उनमें बदलाव की जरूरत है ?
जवाब: केवल विवाह वाले दिन रोक देना पर्याप्त नहीं है. पूरे वर्ष जागरूकता अभियान चलाना होगा. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ के लक्ष्य की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है.
सवाल: क्या आपने भी बाल विवाह रोकने के लिए कोई लक्ष्य तय किया है ?
जवाब: आयोग अपनी सभी वैधानिक शक्तियों के साथ बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है. हमारा लक्ष्य बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में लगातार काम करना है.
सवाल: ईटीवी भारत के माध्यम से बाल विवाह रोकने के लिए आप बच्चों, उनके माता-पिता और समाज के लोगों से क्या अपील करना चाहेंगी ?
जवाब: मैं यह अपील केवल राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष होने के नाते नहीं, बल्कि एक मां, एक महिला और एक बहन होने के नाते कर रही हूं. मैं सभी से करबद्ध विनम्र निवेदन करती हूं कि हमारे बच्चों का जीवन बहुत कोमल और अनमोल है. यही बच्चे भारत के उज्ज्वल भविष्य की नींव हैं. हमारे प्रधानमंत्री ने विकसित भारत 2047 का जो संकल्प रखा है, वह हमारे या आपके कंधों पर नहीं, बल्कि इन बच्चों के कंधों पर टिका है. इसलिए कृपया बच्चों के जीवन जीने के अधिकार से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें. उन्हें अपने सपनों के साथ हंसते-खेलते आगे बढ़ने का अवसर दें.
यदि आपके आसपास कहीं भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा होती दिखाई दे, तो मूकदर्शक न बनें. वहीं से झांसी की रानी और वीर शिवाजी की तरह साहस दिखाइए और इस बाल विवाह रूपी दानव को समाप्त करने के लिए आगे आइए, यही समाज और देश के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
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