तीन दिनों तक संगीत से गूंजेगा ग्वालियर, बैजू बावरा महोत्सव की शुरुआत, दिग्गज संगीतज्ञ देंगे प्रस्तुतियां
17 से 19 फरवरी तक राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में आयोजन, पद्मश्री सम्मानित संगीत कलाकार हुए शामिल

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : February 17, 2026 at 7:04 PM IST
|Updated : February 17, 2026 at 7:12 PM IST
ग्वालियर : तानसेन समारोह के बाद अब ग्वालियर में द्रुपद संगीत के एक और दिग्गज के सम्मान में तीन दिवसीय एक बड़ा आयोजन होने जा रहा है. मंगलवार से ग्वालियर में बैजू बावरा महोत्सव आयोजित होगा, जिसमें पद्मश्री सम्मानित संगीत कलाकार शामिल होने जा रहे हैं. ये कार्यक्रम मध्यप्रदेश के राजा मानसिंह तोमर संगीत व कला विश्वविद्यालय द्वारा ऑर्गेनाइज किया जा रहा है.
17 से 19 फरवरी तक होगा आयोजन
ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय द्वारा तीन दिवसीय बैजू बावरा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है. इसकी जानकारी देते हुए संगीत विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने बताया, '' यूनिवर्सिटी एक संगीत से जुड़ी संस्था के मिलकर ग्वालियर में तीन दिवसीय बैजू बावरा महोत्सव का आयोजन करने जा रहा है. जो मंगलवार 17 फरवरी से शुरू होगा और 19 फरवरी तक चलेगा.''

ग्वालियर है ध्रुपद शैली का जनक
कुलगुरु ने बताया, " गायन की ध्रुपद शैली में ग्वालियर को विशेष पहचान दिलाने वाले मध्यकालीन इतिहास के महान संगीतज्ञ बैजू बावरा के नाम से सभी परिचित हैं, उन्हीं बैजू के सम्मान में राजा मानसिंह तोमर संगीत व कला विश्वविद्यालय द्वारा अनूठा प्रयास किया जा रहा है. ध्रुपद संगीत की एक परिष्कृत शैली है जो ग्वालियर में शुरू हुई. महाराजा मानसिंह तोमर के द्वारा इस शैली को परिष्कृत किया गया था. उन्होंने अपने पूर्वज राजा रहे डूरेन्द्र सिंह जिन्होंने विष्णुपद शैली बनाई थी जो ग्वालियरी भाषा में थी, उसी शैली को राजा मानसिंह ने परिष्कृत कर ध्रुपद शैली को बनाया था.
महाराजा मानसिंह ने ही दी थी बैजू को नायक उपाधि
प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने बताया, '' राजा मानसिंह ही वह व्यक्ति थे जिन्होंने जाना कि, ग्वालियर के पास चंदेरी में बैजू हैं, जो ध्रुपद शैली के विशिष्ठ ज्ञाता हैं, इसलिए राजा मानसिंह उन्हें ग्वालियर लेकर आए और उन्हें नायक बैजू की उपाधि दी. महाराजा मानसिंह ने ध्रुपद संगीत के लिए एक अध्यानशाला भी बनाई थी, जिसके गुरु नायक बैजू बावरा रहे. लेकिन संगीत के क्षेत्र से जुड़े लोगों को छोड़ दिया जाए तो आज लोग तानसेन को ज्यादा जानते हैं. उन्हें बैजू बावरा के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है. इसलिए ये एक प्रयास है कि, लोग इस तरह के आयोजन के जटिए उनके बारे में ज्यादा जान सकेंगे.

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इस तीन दिवसीय समारोह की शुरुआत में मुख्य ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय दरभंगा बिहार की संकायाध्यक्ष प्रो. लावण्या कीर्ति सिंह 'काव्या' की मौजूदगी रही, जो भारतीय ज्ञान परंपरा ध्रुपद गायन शैली का परंपरागत व वर्तमान स्वरूप' विषय पर वक्तव्य दे रही हैं. कार्यक्रम का समापन 19 फरवरी को होगा.
कार्यक्रम में ये प्रसिद्ध कलाकार शामिल
कार्यक्रम में दिल्ली से आने वाले पद्मश्री सम्मानित उस्ताद वासिफुद्दीन डागर, पंडित मोहन श्याम शर्मा, प्रयागराज से डॉ. विशाल जैन, वाराणसी से पद्मश्री पं. ऋत्विक सान्याल, सुरबहार वादक डॉ. श्याम रस्तोगी, पखावज संगति जगत नारायण शर्मा, जयवंत गायकवाड़, ग्वालियर से आदित्य शर्मा, आदित्य दीप समेत अन्य स्थानीय युवा संगीतकार भी प्रस्तुतियां देंगे.

