कोश्यारी का पत्नी प्रेम! दिवंगत अर्धांगिनी की याद में बनाया मंदिर, 89 साल की उम्र में रोज करते हैं मूर्ति की पूजा
आम इंसान पत्नी के लिए ताजमहल तो नहीं बनवा सकता है, लेकिन प्यार को जिंदा रखने के लिए जो बना पड़ता है, वो करता है.

By ETV Bharat Uttarakhand Team
Published : April 27, 2026 at 2:02 PM IST
|Updated : April 27, 2026 at 2:24 PM IST
बागेश्वर: उत्तराखंड से एक अनोखा मामला सामने आया है. यहां एक बुजुर्ग व्यक्ति ने अपनी पत्नी की यादों को जिंदा रखने के लिए घर में उनका मंदिर बनवा दिया. इतना ही नहीं बुजुर्ग रोज सुबह-शाम पत्नी की मूर्ति की पूजा भी करते हैं.
प्यार का ये अनोखा मामला उत्तराखंड के बागेश्वर जिले का है. कपकोट क्षेत्र के फरसाली वल्ली तिलघर गांव के रहने वाले 89 साल के पूर्व सैनिक केदार सिंह कोश्यारी ने अपनी दिवंगत पत्नी लक्ष्मी देवी की याद में घर में मंदिर बनवाया है.
केदार सिंह कोश्यारी ने बताया कि वे रोज सुबह-शाम उनकी मूर्ति की आरती करते हैं और उनसे बातें भी करते हैं. केदार सिंह कोश्यारी और लक्ष्मी देवी का साथ वर्ष 1962 में शुरू हुआ था. जीवन के तमाम उतार-चढ़ाव के बीच दोनों का रिश्ता हमेशा मजबूत बना रहा. केदार सिंह देश सेना में अरुणाचल प्रदेश की सीमाओं पर भी तैनात रहे, लेकिन ये दूरी भी इस रिश्ते को कमजोर नहीं कर सकी.

केदार सिंह कोश्यारी ने बताया कि सात दिसंबर 2019 को एक शादी समारोह के दौरान लक्ष्मी देवी का अचानक निधन हो गया. पत्नी के अचानक चले जाने से केदार सिंह भीतर से टूट गए, लेकिन उन्होंने अपने प्रेम को बिछोह में खत्म नहीं होने दिया. पत्नी की मौत के बाद भी केदार सिंह कोश्यारी का प्यार कम नहीं हुआ. यही कारण है कि केदार सिंह कोश्यारी ने घर में अपनी पत्नी की मंदिर बनवाया, जिसकी वो सुबह-शाम पूजा-अर्चना करते हैं.
केदार सिंह ने साल 2020 में पत्नी लक्ष्मी देवी की आदमकद मूर्ति बनवाई थी और उसे अपने घर में स्थापित कराया. यह मूर्ति उनके लिए सिर्फ पत्थर की प्रतिमा नहीं, बल्कि जीवनसाथी के साथ होने का एहसास है. केदार सिंह आज भी उसी श्रद्धा और अपनत्व से पत्नी की सेवा करते हैं, जैसे वह जीवित हों. वे सुबह-शाम आरती करते हैं, उनसे बातें करते हैं और अपनी दिनचर्या साझा करते हैं.

केदार सिंह की कोई संतान नहीं है, वे अपने भाई के परिवार के साथ रहते हैं, जो उनकी देखभाल करता है, लेकिन उनके जीवन का सबसे बड़ा सहारा आज भी पत्नी लक्ष्मी देवी की यादें हैं. तेज रफ्तार और बदलते दौर में यह कहानी बताती है कि सच्चा प्रेम समय, दूरी और मृत्यु से भी बड़ा होता है. बुजुर्ग दम्पति की यह प्यार की कहानी एक चर्चा का विषय बना हुआ है.
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