बेटी पढ़ाओ का सच: बिहार के इस स्कूल में सालों से फिजिक्स-बायोलॉजी के शिक्षक गायब, लैब बनी शोपीस
बगहा के सरकारी स्कूल में 188 विज्ञान छात्राओं की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे, प्रयोगशाला बनी शोपीस हुई है. दिलीप कुमार की रिपोर्ट

Published : August 17, 2026 at 7:10 PM IST
प.चंपारण(बगहा): बिहार सरकार ने हाल ही में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में हाईटेक सुधार का दावा करते हुए कई नई पहल और नवाचार की शुरुआत की है. सरकार लाइव क्लासेस, AI पढ़ाई और मुफ्त JEE-NEET कोचिंग की शुरुआत कर शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन लाने के दावे कर रही है. लेकिन बिहार के पश्चिम चंपारण स्थित बगहा में सहकारी प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय पटखौली की तस्वीर इन सरकारी दावों की हकीकत से बिल्कुल उलट है.
मूलभूत शिक्षा के लिए संघर्ष: बिहार सरकार बेटियों को विज्ञान शिक्षा से जोड़ने, मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ाने तथा सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे करती है. 'बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ अभियान' के जरिए बेटियों को शिक्षा के प्रति जागरुक भी किया जा रहा है, लेकिन बगहा स्थित सहकारी प्रोजेक्ट बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय पटखौली में 11वीं-12वीं की बच्चियों को मूलभूत शिक्षा के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है.
188 छात्राओं के लिए एक शिक्षक: दरअसल यहां 11वीं और 12वीं विज्ञान संकाय की 188 छात्राओं की पढ़ाई केवल एक रसायन विज्ञान शिक्षक के भरोसे चल रही है. विद्यालय में वर्षों से भौतिकी और जीव विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं, ऐसे में छात्राओं को विज्ञान की समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है. छात्रा साम्या वत्स का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में नियमित कक्षाएं प्रभावित हैं. प्रयोगात्मक शिक्षा लगभग ठप है और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है.
"अच्छी पढ़ाई की उम्मीद से इस विद्यालय में दाखिला लिया था लेकिन कई विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं होतीं ऐसे में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना काफी मुश्किल हो गया है."- साम्या वत्स, 12वीं की छात्रा

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना नहीं हो रहा संभव: विद्यालय में हर वर्ष विज्ञान संकाय में छात्राओं का नामांकन होता है.अधिकांश छात्राएं डॉक्टर, इंजीनियर, फार्मासिस्ट, नर्स या वैज्ञानिक बनने का सपना लेकर विषय के तौर पर विज्ञान का चयन करती हैं. लेकिन, जब तीन प्रमुख विषयों में से दो विषयों के शिक्षक ही नहीं हों तो छात्राओं की पढ़ाई किस तरह होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है. पूरे साइंस स्ट्रीम की जिम्मेदारी सिर्फ एक केमेस्ट्री टीचर के कंधों पर है. शिक्षक विनय कुमार झा का कहना है कि ऐसे में सभी छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है.

लैब का उपयोग लगभग बंद: छात्रा प्रेरणा पांडेय ने बताया कि सबसे गंभीर स्थिति विद्यालय की विज्ञान प्रयोगशाला की है. विद्यालय में प्रयोगशाला मौजूद है और उसमें आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध हैं लेकिन विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण लैब का उपयोग लगभग बंद हो चुका है. प्रेरणा के मुताबिक छात्राओं को प्रयोग करके सीखने का अवसर नहीं मिल रहा है.

"विज्ञान विषय में प्रयोगशाला का बहुत महत्व होता है लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण नियमित प्रैक्टिकल नहीं कराया जाता परीक्षा के समय इसका नुकसान उठाना पड़ता है और कई प्रयोग केवल किताबों में पढ़कर ही समझने पड़ते हैं."- प्रेरणा पांडेय, 12वीं की छात्रा
प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर असर: प्रेरणा पांडेय के मुताबिक छात्राएं केवल किताबों और नोट्स के सहारे पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि विज्ञान की पढ़ाई में प्रैक्टिकल का उतना ही महत्व होता है जितना थ्योरी का. बिना प्रयोगात्मक ज्ञान के छात्राओं की समझ अधूरी रह जाती है. अब तो बोर्ड परीक्षा के प्रैक्टिकल के साथ-साथ मेडिकल एवं इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है.

समय पर सिलेबस पूरे नहीं: छात्रा रानी कुमारी का कहना है कि शिक्षक नहीं होने के कारण सिलेबस समय पर पूरे नहीं हो पाते. कई बार उन्हें स्वयं पढ़कर परीक्षा की तैयारी करनी पड़ती है.ऐसे में जिन परिवारों की आर्थिक स्थिति अच्छी है वे निजी कोचिंग का सहारा ले लेते हैं, लेकिन गरीब परिवारों की छात्राओं के लिए यह संभव नहीं है. ऐसे में सरकारी विद्यालय ही उनकी एकमात्र उम्मीद है लेकिन वहां भी विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी उनके सपनों के सामने बड़ी बाधा बन रही है.

"विद्यालय में भौतिकी और जीव विज्ञान के शिक्षक नहीं होने से पढ़ाई पूरी नहीं हो पा रही है, निजी कोचिंग का खर्च हर परिवार नहीं उठा सकता ऐसे में सरकारी विद्यालय में अच्छी पढ़ाई ही उनकी उम्मीद है."- रानी कुमारी, 12वीं की छात्रा
शिक्षा पदाधिकारियों को कई बार दी गई जानकारी: विद्यालय के प्रधानाध्यापक नागेंद्र प्रसाद सिंह ने भी विज्ञान शिक्षकों की कमी स्वीकार की है. उनका कहना है कि विद्यालय में विज्ञान संकाय में शिक्षकों का अभाव है छात्राएं प्रतिदिन विषयवार शिक्षकों की मांग करती हैं. इस संबंध में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी बेतिया को कई बार पत्र भेजा जा चुका है लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है.

जमीनी स्तर पर हालात विपरीत: सरकार लगातार शिक्षा को बढ़ावा देने और बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इसके विपरीत नजर आ रहे हैं. सवाल यह है कि जब 11वीं और 12वीं विज्ञान संकाय की 188 छात्राओं की पढ़ाई केवल एक शिक्षक के भरोसे होगी और प्रयोगशाला शोपीस बनी रहेगी और विषय विशेषज्ञ ही उपलब्ध नहीं होंगे तो फिर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण विज्ञान शिक्षा देने का दावा कैसे पूरा होगा.

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