बेगूसराय में जमींदारी बांध का तटबंध टूटा, तीन पंचायतों में घुसा गंगा का पानी, बाढ़ के हालात
बछवाड़ा में जमींदारी बांध टूटने से रानी की तीन पंचायतों में पानी घुसा, फसलें डूबीं और ग्रामीण सुरक्षित स्थानों की ओर निकले. रिपोर्ट- नीलेश

Published : August 24, 2026 at 2:16 PM IST
बेगूसराय : बिहार के बेगूसराय स्थित बछवाड़ा में गंगा-बाया नदी का जमींदारी बांध एक बार फिर टूट गया. सोमवार तड़के करीब 3 से 4 बजे झमटिया के पास ONS चिमनी के पीछे लगभग 30 मीटर हिस्से में बांध टूटने से पानी तेजी से रानी-1, रानी-2 और रानी-3 पंचायत की ओर फैलने लगा.
खेतों के बाद घरों तक पहुंचा बाढ़ का पानी : बांध टूटते ही बड़ी मात्रा में पानी खेतों में फैल गया और खड़ी फसलें जलमग्न हो गईं. कई इलाकों में पानी घरों तक पहुंच चुका है. ग्रामीण मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं. रानी-3 पंचायत में हालात सबसे गंभीर बताए जा रहे हैं.
सड़कों और गलियों में भी बाढ़ का पानी : ग्रामीणों के मुताबिक पानी लगातार नए टोले और मोहल्लों की तरफ बढ़ रहा है. रानी-1 में कृषि भूमि डूब गई है, जबकि रानी-2 के खेतों में भी पानी फैल चुका है. रानी-3 में पानी आबादी की ओर बढ़ने से लोगों में दहशत है.
मौके पर पहुंचा प्रशासन : घटना की सूचना मिलते ही बछवाड़ा सीओ प्रीतम कुमार गौतम, बीडीओ डॉ. अमित कुमार, जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार, जेई समेत विभागीय अधिकारी मौके पर पहुंचे. टूटे हिस्से को बंद करने और पानी के बहाव को नियंत्रित करने का प्रयास शुरू किया गया.

'रात में हुई थी बांध की पेट्रोलिंग' : जल संसाधन विभाग के एसडीओ मनीष कुमार के मुताबिक- ''रात करीब 12 से 1 बजे के बीच बांध की पेट्रोलिंग की गई थी. इसके बाद करीब 3 बजे बांध कमजोर होने और पानी का दबाव बढ़ने की सूचना मिली. विभाग की टीम लगातार मौके पर मौजूद रही.''
हर साल टूटता है बांध, सवाल स्थायी समाधान का : मुखिया अमरजीत कुमार राय का कहना है कि- ''हर साल गंगा-बाया नदी में बांध टूटने की समस्या सामने आती है. आपदा के समय प्रशासन सक्रिय रहता है, लेकिन पानी घटने के बाद स्थायी समाधान पर काम नहीं होता. ग्रामीण अब स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं.''

विस्थापन का डर : बीजेपी के स्थानीय नेता रॉबिन्स राज के मुताबिक- ''यह आपदा हर साल ग्रामीणों को परेशान करती है. किसानों को फसल के साथ जान-माल की चिंता रहती है और कई लोग अब यहां से विस्थापित होने तक की आशंका जता रहे हैं.''
किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट : बाढ़ के पानी ने किसानों की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाया है. ग्रामीणों के सामने अब खेत, घर, मवेशी और जरूरी सामान बचाने की चुनौती है. अगर पानी का बहाव जल्द नियंत्रित नहीं हुआ तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है.

स्थायी सुरक्षा की मांग : ग्रामीणों का सवाल है कि संवेदनशील हिस्सों की पहले से पहचान कर बांध को मजबूत क्यों नहीं किया जाता. उनकी मांग है कि आपदा के बाद राहत देने के बजाय बांध की नियमित निगरानी और स्थायी मजबूती पर काम किया जाए.
जमींदारी बांध बना जिंदगी की सुरक्षा दीवार : बछवाड़ा के ग्रामीणों के लिए जमींदारी बांध सिर्फ पानी रोकने वाली संरचना नहीं, बल्कि घर, खेती और संपत्ति की सुरक्षा की अहम दीवार है. अब देखना होगा कि इस बार प्रशासन महज अस्थायी मरम्मत तक सीमित रहता है या स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाता है.

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