विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर जागरूकता रैली, शिक्षण संस्थानों के बाहर तंबाकू बिक्री पर रोक की मांग
रांची में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के मौके पर जागरूकता रैली निकाली गई.

Published : May 31, 2026 at 11:11 AM IST
रांची: विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी रांची में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इस वर्ष विश्व तंबाकू निषेध दिवस की थीम 'निकोटिन और तंबाकू की लत का आकर्षण बेनकाब करें' रखी गई है. इसी कड़ी में रांची विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में जागरूकता रैली निकालकर लोगों को तंबाकू और निकोटिन के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया.
लोगों से तंबाकू छोड़ने की अपील
रैली के माध्यम से युवाओं और आम लोगों को तंबाकू सेवन से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य खतरों की जानकारी दी गई. रैली में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और एनएसएस स्वयंसेवक शामिल हुए. विद्यार्थियों ने हाथों में बैनर, पोस्टर और जागरूकता संदेशों वाली तख्तियां लेकर लोगों से तंबाकू का सेवन छोड़ने की अपील की.
रैली के दौरान 'तंबाकू छोड़ो, जीवन जोड़ो', स्वस्थ युवा, स्वस्थ भारत और "कैंसर से बचना है तो तंबाकू छोड़ना है" जैसे नारों के जरिए लोगों को जागरूक किया गया. छात्रों ने कहा कि तंबाकू और निकोटिन आधारित उत्पाद युवाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं. सिगरेट, गुटखा, खैनी और अन्य तंबाकू उत्पादों के सेवन से कैंसर, हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, उच्च रक्तचाप और कई अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इसकी लत का शिकार हो रहे हैं. ऐसे में समाज के हर वर्ग तक जागरूकता पहुंचाना जरूरी है.
छात्रों ने राज्य सरकार से की मांग
रैली में शामिल विद्यार्थियों ने विशेष रूप से युवाओं को तंबाकू की लत से बचाने पर जोर दिया. उनका कहना था कि विद्यालयों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता युवाओं को इसकी ओर आकर्षित करती है. छात्रों ने राज्य सरकार से मांग की कि सभी शैक्षणिक संस्थानों के बाहर तंबाकू और सिगरेट की दुकानों को हटाया जाए तथा इस संबंध में सख्त नियम लागू किए जाएं.
उनका मानना है कि इससे युवा पीढ़ी को तंबाकू की लत से बचाने में मदद मिलेगी. इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में तंबाकू के दुष्प्रभावों पर चर्चा भी की गई. वक्ताओं ने कहा कि तंबाकू न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी प्रतिकूल असर डालता है. तंबाकू से होने वाली बीमारियों के इलाज पर भारी खर्च आता है, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है.

जागरूकता से तंबाकू सेवन रोका जा सकता है: डॉक्टर
रांची विश्वविद्यालय के एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ. किशोर सुरीन ने कहा कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस का उद्देश्य लोगों को तंबाकू और निकोटिन के खतरों के प्रति जागरूक करना है. उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी प्रकार के तंबाकू उत्पाद से दूर रहना चाहिए और स्वस्थ जीवनशैली अपनानी चाहिए.
डॉ. सुरीन ने कहा कि जागरूकता ही तंबाकू सेवन को रोकने का सबसे प्रभावी माध्यम है. उन्होंने समाज के सभी वर्गों से तंबाकू मुक्त वातावरण बनाने में सहयोग करने की अपील की. साथ ही उन्होंने कहा कि यदि युवा जागरूक होंगे तो आने वाली पीढ़ियां भी तंबाकू की लत से बच सकेंगी और एक स्वस्थ समाज का निर्माण संभव होगा.
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