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'बिहार में बच्चा चोरी की अफवाहों से बचें, तुरंत पुलिस को दें सूचना', ADG का संदेश

एडीजी अमित कुमार जैन ने कहा कि दो दिनों में पांच शिकायतें मिली. जांच में सभी अफवाह निकली. मॉब लिंचिंग की स्थिति से बचनी चाहिए.

अमित कुमार जैन, एडीजी (कमजोर वर्ग)
अमित कुमार जैन, एडीजी (कमजोर वर्ग) (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 25, 2026 at 8:49 PM IST

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पटना : बच्चा चोरी की अफवाहों को लेकर बिहार पुलिस मुख्यालय ने लोगों से सतर्क रहने और कानून हाथ में नहीं लेने की अपील की है. अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने बुधवार को कहा कि बच्चा चोरी की किसी भी आशंका या शिकायत की सूचना तुरंत पुलिस को दें. पुलिस हर मामले की गंभीरता से जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगी.

'सभी शिकायतें अफवाह साबित हुईं' : एडीजी ने बताया कि बीते दो दिनों में बच्चा चोरी की पांच शिकायतें सामने आई थीं. इनमें जमुई, पूर्णिया, नालंदा और मुजफ्फरपुर जिले के दो मामले शामिल थे. पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर जब इन सभी मामलों की जांच कराई गई तो सभी शिकायतें अफवाह साबित हुईं.

''इस तरह की अफवाहें तेजी से फैलती हैं और देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो जाती है, जिससे मॉब लिंचिंग जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो जाती है. कई बार निर्दोष लोग भीड़ का शिकार बन जाते हैं.''- अमित कुमार जैन, एडीजी (कमजोर वर्ग)

'अफवाहों पर ध्यान न दें' : अमित कुमार जैन ने आम लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध स्थिति में खुद कार्रवाई करने के बजाय तुरंत डायल 112 या स्थानीय थाना को सूचना दें. पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह जांच कर सच्चाई सामने लाए. अफवाहों पर ध्यान देने से समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बनता है.

पिछले वर्ष 14,699 गुमशुदगी के मामले : एडीजी अमित कुमार जैन ने वर्ष 2025 के गुमशुदगी के आंकड़े भी साझा किए. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में कुल 14,699 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए थे. इनमें 12,526 बालिकाएं और 2,173 बालक शामिल थे. पुलिस की सक्रियता के कारण 7,772 बच्चों को बरामद कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है. हालांकि 6,927 बच्चे अब भी गुमशुदा हैं, जिनकी तलाश जारी है.

''बच्चा गुम होने की सूचना मिलते ही सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को तत्काल जांच शुरू करने का निर्देश दिया गया है. यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक गुम रहता है तो संबंधित मामले में प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य है. इसके अलावा यदि कोई बच्चा चार माह तक बरामद नहीं होता है तो मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को स्थानांतरित कर दिया जाता है. यह यूनिट राज्य के सभी जिलों में कार्यरत है और विशेष रूप से बच्चों एवं महिलाओं से जुड़े मामलों की जांच करती है.''- अमित कुमार जैन, एडीजी (कमजोर वर्ग)

गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि : एडीजी ने कहा कि हाल के वर्षों में गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है. हालांकि बच्चा चोरी से जुड़े कई संगठित गिरोहों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है और कई बच्चों को सकुशल बरामद किया गया है. बिहार पुलिस इस तरह के मामलों में निर्धारित एसओपी का सख्ती से पालन करती है.

'वात्सल्य पोर्टल' का जिक्र : अमित कुमार जैन ने यह भी बताया कि भारत सरकार के 'वात्सल्य पोर्टल' से देशभर के थाने जुड़े हुए हैं. यदि बिहार से गुम हुआ कोई बच्चा दूसरे राज्य में बरामद होता है तो इसकी सूचना संबंधित राज्य की पुलिस को मिल जाती है. इसके बाद समन्वय स्थापित कर बच्चे को सुरक्षित वापस लाकर परिजनों को सौंप दिया जाता है.

''समाज की जागरूकता और पुलिस की तत्परता से ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है. अफवाहों से दूर रहें, सोशल मीडिया पर अपुष्ट खबरें साझा न करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके.''- अमित कुमार जैन, एडीजी (कमजोर वर्ग)

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