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हिमाचल के इस जिले में नए और मॉडर्न तरीके से होगी गाड़ियों की पासिंग, जानिए कैसे?

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू होने से गाड़ियों की पासिंग नए और आधुनिक दौर में प्रवेश करेगी.

Automated Testing Station
सिरमौर में बन रहा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : February 11, 2026 at 12:47 PM IST

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सिरमौर: हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर में वाहन मालिकों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर है. जिले में वाहनों की पासिंग व्यवस्था अब पारंपरिक प्रणाली से निकलकर आधुनिक तकनीक के दौर में प्रवेश करने जा रही है. अप्रैल माह से जिला सिरमौर में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के शुरू होने की पूरी संभावना है, जिससे वाहन पासिंग की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाएगी और वाहन मालिकों को लंबे इंतजार से निजात मिलेगी.

कब शुरू होगा ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन ?

क्षेत्रीय परिवहन विभाग के नियंत्रण में निजी क्षेत्र के जरिए स्थापित किया जा रहा यह ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन नाहन विधानसभा क्षेत्र के कोलर में बनाया जा रहा है. चयनित भूमि पर निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है. विभाग के अनुसार 15 मार्च तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा, ताकि अप्रैल माह से यह सुविधा आम जनता के लिए शुरू की जा सके. ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन के शुरू होने के बाद वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह आधुनिक मशीनों के जरिए की जाएगी. इससे जहां मानवीय हस्तक्षेप और त्रुटियों की संभावना समाप्त होगी. वहीं, पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेगी. वाहन मालिक अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी दिन वाहन की पासिंग करवा सकेंगे, जो मौजूदा व्यवस्था से बड़ा बदलाव माना जा रहा है.

क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी सिरमौर सोना चंदेल ने बताया "कोलर में परिवहन विभाग के नियंत्रण में निजी क्षेत्र में ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है. उम्मीद है कि संबंधित कंपनी 15 मार्च तक कार्य पूरा कर लेगी. इसके बाद अप्रैल माह में स्टेशन को शुरू कर दिया जाएगा."

वर्तमान में ऐसे होती है गाड़ियों की पासिंग

गौरतलब है कि वर्तमान व्यवस्था में वाहनों की पासिंग मैन्युअल रूप से की जाती है, जिसके लिए मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर का शेड्यूल जारी होता है. सब डिविजन स्तर पर तय तिथियों पर ही पासिंग संभव हो पाती है. अगर कोई वाहन मालिक निर्धारित दिन पर गाड़ी की पासिंग नहीं करवा पाता, तो उसे अगली तारीख तक लंबा इंतजार करना पड़ता है. ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू होने से यह समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी.

क्या हैं ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन ?

ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन ऐसे आधुनिक केंद्र होते हैं, जहां मोटर वाहनों की फिटनेस जांच स्वचालित मशीनों के माध्यम से की जाती है. इनका उद्देश्य परिवहन विभाग के कार्यभार को कम करना, फिटनेस जांच में पारदर्शिता लाना और प्रदूषण फैलाने वाले या असुरक्षित वाहनों की पहचान करना है. इन केंद्रों में वाहन के प्रदूषण स्तर, ब्रेक सिस्टम, हेडलाइट्स, इंडिकेटर, टायर, सस्पेंशन सहित अन्य सुरक्षा मानकों की जांच मशीनों से की जाती है. स्वचालित प्रक्रिया के कारण मानवीय हस्तक्षेप कम होता है, जिससे जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, भरोसेमंद और पारदर्शी बनती है.

"मैन्युअल पासिंग व्यवस्था में कई बार मानवीय त्रुटियां रह जाती हैं. इन्हीं त्रुटियों को समाप्त करने और पासिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से यह ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन स्थापित किया जा रहा है. इसके शुरू होने के बाद पूरे महीने वाहनों की टेस्टिंग की सुविधा उपलब्ध रहेगी और वाहन मालिकों को पासिंग के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा." - सोना चंदेल, आरटीओ सिरमौर

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