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बाल वाहिनियों पर सख्ती: पैनिक बटन-जीपीएस-सीसीटीवी और ड्राइवर-कंडक्टर का वेरिफिकेशन होगा अनिवार्य!

स्कूलों को जिम्मेदारी लेनी होगी कि उनके विद्यार्थी किन वाहनों से आ-जा रहे हैं.

Strict measures on school Vehicle
बाल वाहिनियों पर सख्ती की तैयारी (ETV Bharat Jaipur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 3, 2026 at 7:02 PM IST

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Updated : January 3, 2026 at 7:09 PM IST

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जयपुर: शहर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी है. जयपुर में संचालित बाल वाहिनियों (स्कूल बस, वैन और ऑटो) में पैनिक बटन, स्पीड गवर्नर, जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य करने की योजना है. तय मानकों की पालना नहीं करने वाली बाल वाहिनियों पर कार्रवाई के साथ सीज (जब्त) भी किया जाएगा. खास बात है कि इन नियमों की निगरानी और पालना सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन को भी सौंपी जाएगी. इसके साथ ही बाल वाहिनियों के ड्राइवर और कंडक्टर का पुलिस वेरिफिकेशन, आई-टेस्टिंग और कैरेक्टर टेस्टिंग अनिवार्य करने की तैयारी है, ताकि घर से स्कूल और स्कूल से घर तक छात्रों का आवागमन पूरी तरह सुरक्षित हो सके.

बाल वाहिनियों पर लागू होंगे कड़े नियम: जयपुर की सड़कों पर रोजाना हजारों स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने वाली बाल वाहिनियों को अब सुरक्षा के नए और कड़े दायरे में लाने की तैयारी है. शिक्षा शासन सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि बाल वाहिनियों का फिटनेस टेस्ट आरटीओ से अपडेटेड रहना चाहिए. ड्राइवर का आई-टेस्ट और कैरेक्टर टेस्टिंग बेहद जरूरी है, क्योंकि वे बच्चों को लेकर सफर करते हैं. उन्होंने कहा कि स्कूलों को भी ये जिम्मेदारी लेनी होगी कि उनके छात्र किन वाहनों से आ-जा रहे हैं. ट्रैफिक पुलिस, एनजीओ और शिक्षा विभाग मिलकर बाल वाहिनियों का कैपेसिटी रिव्यू करेंगे. डिसऑर्डर और ट्रैफिक से जुड़े मुद्दों पर ट्रैफिक कंट्रोल बोर्ड की बैठक में चर्चा होगी.

सुरक्षा नियमों पर बोले... (ETV Bharat Jaipur)

पढ़ें:स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर शिक्षा विभाग सख्त, बाल वाहिनियों की निगरानी के आदेश

कुणाल ने कहा कि अधिकांश बाल वाहिनियां निजी स्कूलों से जुड़ी होती हैं, ऐसे में छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को भी ठोस कदम उठाने होंगे. इसके लिए आने वाले समय में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे. संसाधनों को लेकर जहां जरूरत होगी, वहां विभाग सहयोग करेगा और स्कूल प्रशासन को भी आगे आना पड़ेगा.

शहर में बाल वाहिनियों की मौजूदा स्थिति

• स्कूल बसें-लगभग 1985

• वैन-करीब 550

• ऑटो-लगभग 9980

स्कूलों की सामाजिक जिम्मेदारी : एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षाविद् डॉ संजय पाराशर ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जितने भी कारगर उपाय हैं, उन्हें सभी शिक्षण संस्थानों को अपने स्तर पर लागू करना चाहिए. अभिभावकों को भी स्कूलों के संपर्क में रहना चाहिए. बाल वाहिनियों से जुड़ी ऑटो ड्राइवर यूनियन को राजस्थान आरटीओ की ओर से समय-समय पर जारी सभी गाइडलाइंस की सख्ती से पालना करनी चाहिए. उन्होंने बताया कि छात्रों की संख्या, जीपीएस, स्पीड गवर्नर और पैनिक बटन जैसे कई इनोवेटिव उपाय पहले से गाइडलाइंस में शामिल हैं. इसे लेकर सामूहिक प्रयास जरूरी हैं. बच्चों को लेने से लेकर छोड़ने तक किसी भी स्तर पर असुविधा न हो, यह सभी की सामाजिक जिम्मेदारी है. पाराशर ने बताया कि वो खुद जागरूकता अभियान चला रहे हैं, जिसमें छात्रों, अभिभावकों और बाल वाहिनी चालकों को सेशन के जरिए जागरूक किया जा रहा है. इसके अलावा ड्राइवरों से शपथ पत्र भी भरवाए गए हैं.

पढ़ें:नियमों को ताक में रख सड़कों पर दौड़ रही सैंकड़ों बाल वाहिनियां, 450 की आरसी निरस्त

ऑटो चालकों की आपत्ति: हालांकि ऑटो चालक दीपक गुप्ता ने जीपीएस और कैमरे लगाने के निर्णय पर व्यावहारिक आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि ऑटो रिक्शा खुले में खड़े रहते हैं, ऐसे में डिवाइस टूटने या चोरी होने का खतरा रहता है. बच्चों की सुरक्षा के लिए वे गेट, जाली समेत अन्य इंतजाम पहले से करते हैं, जबकि अन्य ऑटो चालक दीपक पंवार ने कहा कि ऑटो चालक इतने संपन्न नहीं हैं कि महंगी डिवाइस खुद लगवा सकें. यदि सरकार या प्रशासन निशुल्क व्यवस्था करे तो कोई आपत्ति नहीं है. उन्होंने कहा कि इस तरह की व्यवस्था नए सत्र तक ही व्यवहारिक रूप से लागू हो पाएगी.

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समाधान यह: बहरहाल, जयपुर में बाल वाहिनियों की सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर मजबूत करने की दिशा में पहल की जा रही है. हालांकि इसे लागू करने में आर्थिक और व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने हैं. इनका समाधान सरकार, प्रशासन और स्कूलों को मिलकर निकालना होगा.

Last Updated : January 3, 2026 at 7:09 PM IST