गुरुओं के अपमान मामला: भाजपा MP बांसुरी स्वराज बोलीं- 'आखिर कहां हैं आतिशी, उन्हें तुरंत माफी मांगनी चाहिए.'
FSL रिपोर्ट में सदन की रिकॉर्डिंग को सही पाया गया है और इसमें कोई छेड़छाड़ नहीं हुई.

Published : January 18, 2026 at 5:26 PM IST
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच सियासी बयानबाजी जारी है. अब नई दिल्ली से भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने रविवार को प्रेस कांफ्रेंस कर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा गुरुओं के लिए दिए अपमानित बयान पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि दिल्ली विधानसभा में दिए गए अगर किसी भी बयान की जांच हो सकती है तो वह सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष का कानूनी अधिकार है. लेकिन अफरातफरी में आतिशी को बचाने के लिए पंजाब पुलिस का दुरुपयोग कर इसकी जाँच के आदेश दे दिए गए, जो पंजाब पुलिस के अधिकार क्षेत्र में भी नहीं आता.
सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि आम आदमी पार्टी का एक पैटर्न बन गया है, जब वह गवर्मेंट मशीनरी का दुरुपयोग करके लोकतंत्र का, मीडिया का और किसी भी प्रकार के आलोचना का दमन कर रही है. लेकिन जब बात अपनी गलती पर आती है तो वह और ज्यादा उदंडता से पेश आने लगते हैं. उन्होंने बतया कि 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर जी के 350वें जन्मजयंती को लेकर एक तीन दिवसीय समागम का आयोजन किया गया था, उस पर चर्चा चल रही थी.
लेकिन, चर्चा के दौरान ही आतिशी ने जिस प्रकार से गुरुओं को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया. वह माफी मांगने के बजाए गायब हो गई. बांसुरी स्वराज ने कहा कि धारा 194 जो विधानसभा अध्यक्ष को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी विधानसभा के सदस्य के बयान की जांच करा सकते हैं. जब फॉरेंसिंक रिपोर्ट आई तो उसमें भी यह पाया गया कि जिस वीडियों को लेकर आपत्ति जताई गई है, उस वीडियों के साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ नहीं किया गया है.
आतिशी ने विधानसभा के पटल पर गुरुओं का अपमान किया है. बांसुरी स्वराज ने आतिशी से सवाल करते हुए कहा कि आखिर वह कहां है? उन्होंने कहा कि आश्चर्य इस बात का है कि 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा में गुरुओं का अपमान आतिशी करती हैं. 7 जनवरी को मंत्री कपिल मिश्रा ने ट्वीट किया और ठीक उसी दिन पंजाब पुलिस ने उन पर एफआईआर कर दिया. आखिर दिल्ली विधानसभा से पंजाब पुलिस का क्या लेना देना है?
नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा, ''जलंधर केस का सच यह है कि केस सिर्फ सोशल मीडिया मेटा के खिलाफ दर्ज किया गया है. इसमें कपिल मिश्रा औऱ किसी अन्य व्यक्ति को पार्टी नहीं बनाया गया है. इसलिए जो रिपोर्ट विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने प्रस्तुत की वह साफ बताती है कि वीडियो से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की गई है. आतिशी को तुरंत माफी मांगनी चाहिए.''
FSL रिपोर्ट में 'वीडियो और वर्बेटिम' में कोई अंतर नहीं
बता दें कि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने शनिवार को अपने निवास पर प्रेस कांफ्रेंस कहा था कि दिल्ली फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट ने 'गुरुओं के अपमान' वाले वीडियो सही बताया. स्पीकर ने बताया, "FSL की रिपोर्ट पुष्टि करती है कि वीडियो और विधानसभा का लिखित रिकॉर्ड (वर्बेटिम) बिल्कुल एक समान हैं. वीडियो के विजुअल्स और ऑडियो के साथ किसी भी तरह की छेड़छाड़ या 'डॉक्टरिंग' नहीं की गई है." विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह रिपोर्ट उन दावों को खारिज करती है जिनमें कहा गया था कि वीडियो को एडिट करके नेता विपक्ष आतिशी की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, सदन के भीतर जो शब्द कहे गए, वीडियो ठीक उसी का प्रतिनिधित्व करता है.
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