आतिशी 'फर्जी वीडियो' मामला: पंजाब पुलिस ने दिल्ली विधानसभा को सौंपा जवाब; फॉरेंसिक रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा
आतिशी से जुड़े वीडियो के मामले में पंजाब पुलिस ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के नोटिस पर अपना जवाब दाखिल कर दिया है.

Published : January 23, 2026 at 10:31 AM IST
नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष आतिशी से जुड़े एक कथित विवादास्पद वीडियो के मामले में पंजाब पुलिस ने दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के नोटिस पर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल कर दिया है. पंजाब सरकार के गृह विभाग के अवर सचिव कैलाश गौतम ने दिल्ली विधानसभा के सचिव द्वारा भेजे गए नोटिस का जवाब भेजा है. पंजाब पुलिस ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि जिस वीडियो के आधार पर कार्रवाई की गई, वह पूरी तरह से 'एडिटेड' (संपादित) था और इसका उद्देश्य समाज में वैमनस्य फैलाना था.
फॉरेंसिक रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
पंजाब पुलिस ने विधानसभा को भेजी अपनी रिपोर्ट में तकनीकी और वैज्ञानिक तथ्यों का हवाला दिया है. पुलिस के अनुसार, संबंधित वीडियो की गहन फॉरेंसिक जांच कराई गई. रिपोर्ट में यह साबित हुआ है कि वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी. पुलिस ने अपने जवाब में विशेष रूप से उल्लेख किया कि "फॉरेंसिक विश्लेषण से यह स्पष्ट रूप से सिद्ध हो गया है कि मूल वीडियो में कहीं भी 'गुरु' शब्द का प्रयोग नहीं किया गया था. इस शब्द को बाद में एडिटिंग के जरिए जोड़ा गया ताकि धार्मिक या सामाजिक भावनाओं को भड़काया जा सके."

माहौल खराब करने की साजिश का आरोप
पंजाब पुलिस ने अपनी कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह के फर्जी वीडियो को प्रसारित करना एक गंभीर अपराध है. जवाब में कहा गया कि यह वीडियो केवल सूचना साझा करने के लिए नहीं, बल्कि जानबूझकर माहौल खराब करने के उद्देश्य से पोस्ट किया गया था. पुलिस के अनुसार, इस तरह की भ्रामक सामग्री से कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था, जिसे रोकना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है.
एफआईआर और कानूनी प्रावधानों का हवाला
दिल्ली विधानसभा द्वारा की गई पूछताछ के जवाब में पंजाब पुलिस के डीजीपी ने स्पष्ट किया कि इस मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी पूरी तरह से कानून के दायरे में है. पुलिस ने कहा यह कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत की गई है. एडिटेड वीडियो पोस्ट करना 'डेटा हेरफेर' और 'सार्वजनिक शांति भंग करने' की श्रेणी में आता है. पुलिस ने प्रक्रिया का पालन करते हुए ही इस मामले की जांच को आगे बढ़ाया है. पंजाब पुलिस के डीजीपी ने बताया कि जालंधर के रहने वाले इकबाल सिंह की शिकायत पर पुलिस ने 7 जनवरी को मुकदमा दर्ज किया था.

क्षेत्राधिकार और जवाबदेही पर कड़ा रुख
एक महत्वपूर्ण संवैधानिक और प्रक्रियात्मक स्पष्टीकरण देते हुए पंजाब पुलिस ने विधानसभा की समिति को अपनी सीमाओं और जवाबदेही के बारे में भी अवगत कराया. पुलिस ने तर्क दिया कि किसी भी आपराधिक मामले में पुलिस की प्राथमिक जवाबदेही संबंधित न्यायालय और केस से संबंधित मजिस्ट्रेट के प्रति होती है. पुलिस ने संकेत दिया कि चूंकि मामला विचाराधीन है और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत आगे बढ़ रहा है, इसलिए इसकी विस्तृत केस डायरी और साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाते हैं.
जानिए इस मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ था जब दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र में 6 जनवरी को नेता विपक्ष आतिशी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने कुछ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है. इसके बाद पंजाब में इस मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी. दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने इस पर संज्ञान लेते हुए पंजाब पुलिस को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था कि उन्होंने किस आधार पर कार्रवाई की. हालांकि इस मामले में दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पिछले दिनों प्रेस कांफ्रेंस कर साफ कर दिया था कि विधानसभा में चर्चा के दौरान नेता विपक्ष ने सिख गुरू के संबंध में जो बातें कहीं थी, उस वीडियो की दिल्ली में कराई गई फॉरेंसिक जांच में कोई भी छेड़छाड़ की बात सामने नहीं आई है. इस मामले में आगे की कार्यवाही विधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी.

आतिशी पर यह बोलने पर मचा है हंगामा
यह विवाद 6 जनवरी को दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान शुरू हुआ था. भाजपा विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष का आरोप है कि प्रदूषण पर चर्चा के दौरान आतिशी ने सिख गुरुओं के बलिदान के संदर्भ में कुछ 'अमर्यादित' टिप्पणियां की थीं. इसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ था. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसे 'आप' ने 'डॉक्टर्ड' यानी छेड़छाड़ किया हुआ बताया.
अब पंजाब पुलिस के इस जवाब ने अब इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है. फॉरेंसिक रिपोर्ट के दावों ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में इस वीडियो को फैलाने वाले लोगों पर कानूनी शिकंजा और कस सकता है. वहीं, दिल्ली विधानसभा और पंजाब पुलिस के बीच यह पत्राचार संवैधानिक शक्तियों और पुलिसिया कार्रवाई के बीच एक नई बहस को जन्म दे सकता है.
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