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विशेषाधिकार हनन नोटिस: आतिशी ने आरोपों को बताया निराधार, विधानसभा सचिव से मांगे साक्ष्य

आतिशी ने अपने जवाब में कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं.

आतिशी ने आरोपों को बताया निराधार
आतिशी ने आरोपों को बताया निराधार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : January 20, 2026 at 11:31 AM IST

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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में नेता विपक्ष और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने अपने खिलाफ जारी विशेषाधिकार हनन के नोटिस पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. इस मामले में विधानसभा सचिव को भेजे अपने औपचारिक जवाब में उन्होंने न केवल इन आरोपों को सिरे से खारिज किया, बल्कि यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने सदन के भीतर या बाहर कभी भी सिख गुरुओं के प्रति कोई अपमानजनक टिप्पणी नहीं की है.

आतिशी ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को 'अस्पष्ट' और 'तथ्यहीन' करार देते हुए मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज, शिकायत की प्रति और सदन की कार्यवाही की प्रमाणित अनएडिटेड वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग की है.

गुरुओं का अपमान कभी नहीं कियाआतिशी ने अपने जवाब में कहा कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार हैं. उन्होंने पत्र में लिखा, "मैंने अपने जीवन में कभी भी सिख गुरुओं के प्रति किसी भी प्रकार का अनादर नहीं दिखाया है. 6 जनवरी को सदन में हुई चर्चा के दौरान मेरा संदर्भ प्रदूषण और शासन व्यवस्था से था, उसमें सिख गुरुओं का कोई जिक्र या संदर्भ तक नहीं था." उन्होंने आगे कहा कि,

"नोटिस में 'सदन की कार्यवाही बाधित करने' जैसे शब्दों का उपयोग तो किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके द्वारा कहे गए किन शब्दों को आपत्तिजनक माना गया है."



प्रक्रियात्मक खामियों पर उठाए सवाल
नेता विपक्ष ने विधानसभा की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए पहले कोई संदेश या बुलावा नहीं मिला, जैसा कि नोटिस में दावा किया गया है. उन्होंने इसे नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि बिना ठोस साक्ष्यों और विशिष्ट आरोपों के उन पर कार्रवाई करना अनुचित है.

जानिए क्या है पूरा मामला
यह विवाद 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान शुरू हुआ था. भाजपा विधायकों और विधानसभा अध्यक्ष का आरोप है कि प्रदूषण पर चर्चा के दौरान आतिशी ने सिख गुरुओं के बलिदान के संदर्भ में कुछ 'अमर्यादित' टिप्पणियां की थीं. इसके बाद सदन में भारी हंगामा हुआ था. इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसे 'आप' ने 'डॉक्टर्ड' यानी छेड़छाड़ किया हुआ बताया.

फॉरेंसिक रिपोर्ट और राजनीतिक खींचतान
जहां एक ओर दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने आतिशी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है, वहीं दूसरी ओर पंजाब पुलिस और दिल्ली पुलिस के बीच भी इस वीडियो को लेकर कानूनी जंग छिड़ी हुई है. विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हाल ही में दावा किया था कि दिल्ली की फॉरेंसिक लैब रिपोर्ट के अनुसार वीडियो सही है, जबकि 'आप' का कहना है कि रिपोर्ट में कहीं भी यह साबित नहीं हुआ कि आतिशी ने 'गुरु' शब्द का इस्तेमाल अपमानजनक संदर्भ में किया. विशेषाधिकार समिति अब आतिशी के इस जवाब और उनके द्वारा मांगे गए दस्तावेजों पर विचार करेगी. फिलहाल, इस मामले ने दिल्ली की सियासत में सिख भावनाओं और सदन की गरिमा को लेकर एक बड़ी बहस छेड़ दी है और इस पर विराम लगता नहीं दिखाई दे रहा है.

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