मध्य प्रदेश में 82 प्रजातियों के जलीय पक्षियों की खोज, प्रवासी परिंदों ने बढ़ाया रोमांच
एशियन वाटर बर्ड्स सेंसस 2026 के तहत सागर के दक्षिण वनमंडल में 82 जलीय पक्षियों की हुई पहचान, प्रवासी और दुर्लभ प्रजातियों का मिला प्रमाण.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 7, 2026 at 12:05 PM IST
|Updated : January 7, 2026 at 12:14 PM IST
सागर: अंतरराष्ट्रीय परियोजना के तहत मध्य प्रदेश में पहली बार एशियन वाटर बर्ड्स सेंसस 2026 का आयोजन किया गया. पक्षी गणना के इस कार्यक्रम के तहत सागर के दक्षिण वन मंडल में भी दो दिनों तक आयोजन हुआ. इस गणना में करीब 82 प्रकार के जलीय पक्षी पाए गए. इसके अलावा यहां पर प्रवासी एशियाई जलीय पक्षी भी काफी संख्या में देखे गए हैं. इस गणना का उद्देश्य एशियाई जलीय पक्षियों के संरक्षण की योजना तैयार करना है. गणना के तहत वनमंडल, संरक्षित वन और दूसरे जलस्त्रोतों में पक्षियों की गणना की गयी. उनके प्राकृतिक आवास, प्रजाति, विविधता का आकलन किया गया.
दक्षिण वनमंडल के 9 जलस्त्रोतों में सर्वेक्षण
दक्षिण वनमंडल सागर की एसडीओ रेखा पटेल ने बताया कि, ''दक्षिण वनमंडल में पहली बार 3 और 4 जनवरी 2026 को एशियन वाटर बर्ड्स सेंसस 2026 का आयोजन किया गया. इस गणना में नदियों, झीलों और तालाबों के अलावा दूसरे जलस्त्रोतों में पाये जाने वाले पक्षियों की गणना की गयी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किए गए सर्वेक्षण का उद्देश्य जलीय पक्षियों की संख्या के साथ उनकी प्रजाति, विविधता और जल स्त्रोतों की पारिस्थितिक स्थिति का आंकलन करना था.

इस गणना के आधार पर जलीय पक्षियों के संरक्षण और प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक आधार पर रणनीति तैयार की जाएगी. दक्षिण वनमंडल में एशियन वाटर बर्ड्स सेंसस 2026 के तहत 9 तालाबों का सर्वेक्षण 4 दलों और वन अधिकारी कर्मचारियों द्वारा किया गया. गणना में लगे सर्वेक्षण दलों ने तालाबों के किनारे जलीय पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियां, उनके प्राकृतिक आवास, गतिविधियों और संख्या को दर्ज किया.

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82 जलीय पक्षियों की पहचान
दक्षिण वन मंडल सागर के डीएफओ वरुण यादव ने बताया कि, ''सर्वेक्षण के दक्षिण वनमंडल में करीब 82 जलीय पक्षियों की अलग-अलग प्रजातियों की पहचान की गई. खास बात ये है कि इस गणना के दौरान प्रवासी एशियाई जलीय पक्षियों की कुछ दुर्लभ प्रजातियां भी सर्वेक्षण दल को मिली हैं. जिनमें बुलीनेक स्टॉर्क, रिवर टर्न, लिटिल रिंग्ड प्लोवर,रूडी सेल डक, साइवेरियन स्टोन चेट, ब्लैक रेड स्टार्ट, रेड नेप्ड आईविस और ब्लेक हेडिड आईविस को देखा गया. इस गणना के आधार पर जली पक्षियों के संरक्षण के लिए रणनीति तैयार की जाएगी. हमारे सर्वेक्षण दलों द्वारा किए गए सर्वे की रिपोर्ट तैयार की जा रही है और जल्दी ही इसको मुख्यालय को भेज दिया जाएगा.''

