निकाय-पंचायत चुनाव 2026 : टिकट वितरण पर गहलोत बोले- सिफारिश नहीं जमीनी हकीकत के आधार पर तय हो उम्मीदवार
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- अगर निकाय-पंचायत चुनाव में एक भी टिकट सिफारिश पर दिया तो उम्मीदवार हार जाएगा.

Published : August 18, 2026 at 3:19 PM IST
जयपुर: निकाय-पंचायत चुनाव में प्रत्याशी चयन को लेकर चल रही कवायद के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पार्टी के तमाम नेताओं को दो टूक नसीहत दी है. गहलोत ने कहा है कि सिफारिश से किसी को भी टिकट नहीं दिया जाए. सिफारिश से टिकट दिया गया तो वो चुनाव हार जाएगा.
गहलोत ने मंगलवार को कांग्रेस वॉर रूम में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में अच्छा माहौल है. लोगों में सरकार के प्रति भयंकर गुस्सा है, अगर टिकट वितरण ढंग से हो जाए तो कांग्रेस चुनाव जीतेगी. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रदेश कांग्रेस पर्यवेक्षकों को पूरे अधिकार देकर भेजेगी. फैसला वहां की स्थिति और मेरिट के आधार पर किया जाना चाहिए, न कि सिफारिश के आधार पर.
मैं भी सिफारिश करूं तो टिकट मत देना : पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि टिकट वास्तविक कार्यकर्ताओं को मिलना चाहिए. मेरे पास भी जयपुर, भरतपुर, बीकानेर कहीं से भी कोई सिफारिश के लिए लोग आते हैं, मैं भी किसी की सिफारिश करूं तो टिकट मत देना. क्योंकि मुझे क्या पता कि वहां पर जमीनी हकीकत क्या है. बिना जमीनी हकीकत जाने टिकट दिया तो वो कैसे चुनाव जीतेगा. इसलिए प्रत्याशियों का चयन जमीनी हकीकत के आधार पर होना चाहिए.
युवा और अनुभव को साथ लेकर चलें : गहलोत ने कहा कि टिकट वितरण में युवाओं और अनुभव को साथ लेकर चलना चाहिए. आज जेन-जी का जमाना है. उन्होंने माहौल बदला है. नई पीढ़ी आगे आ रही है, लेकिन उसके साथ में वरिष्ठ लोगों को भी काम में लो. उन्हें भी युवाओं के साथ रखो. हालांकि, जेन-जी की भूमिका से कोई इनकार नहीं कर सकता है. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि जंतर-मंतर पर Gen-Z ने आंदोलन किया था. राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री के आवास के बाद धरना दिया था. देश के सभी राज्यों में आंदोलन हुए थे. मैं भी दो बार जयपुर में प्रदर्शन में भाग लिया था. उसके बाद माहौल बन गया है.
हमें युवाओं की भावना को समझना चाहिए. युवाओं को भी मौके देना चाहिए. मेरा मानना है कि 50% टिकट युवाओं को भी दिए जाने चाहिए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां तक कांग्रेस की नीतियों की बात है तो हमारे सिद्धांत और नीतियां महात्मा गांधी के समय से हैं. डॉ. आंबेडकर के संविधान के तहत हैं. पंडित नेहरू, मौलाना आजाद, सरदार पटेल बड़े-बड़े नेताओं का योगदान हमारी पार्टी में है.
वंदे मातरम और कांग्रेस का 90 साल से साथ : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वंदे मातरम को लेकर उपजे विवाद को लेकर भी मोदी सरकार और भाजपा पर हमला बोला. गहलोत ने कहा कि वंदे मातरम और कांग्रेस का 90 साल का साथ है. हम लोग 90 साल से वंदे मातरम गाते आ रहे हैं, लेकिन अब भाजपा के लोग वंदे मातरम को लेकर हल्ला कर रहे हैं. इनका वंदे मातरम से क्या मतलब है. जिन लोगों ने 50 साल तक आरएसएस के मुख्यालय पर तिरंगा झंडा नहीं फहराया, वो आज हमें वंदे मातरम का पाठ पढ़ा रहे हैं.
आज प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम में निकाय चुनावों को लेकर आयोजित बैठक में शामिल हुआ और आगामी रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) August 18, 2026
प्रदेश में भाजपा सरकार के कुशासन से जनता में भारी आक्रोश है। भाजपा ने जो सपने दिखाए थे, वे सब जुमले साबित हुए।
जनता अब बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है और आने वाले… pic.twitter.com/LSoHokiOzU
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार अब एक बिल लेकर आई है, यह लोग अपराध बोध से ग्रसित हैं कि हमने वंदे मातरम पर 90 साल तक कांग्रेस का साथ क्यों नहीं दिया. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के आंदोलन के समय संघ के लोग अंग्रेजों से मिले हुए थे. वंदे मातरम अंग्रेजों के खिलाफ था, इसलिए अंग्रेज भी वंदे मातरम पर भड़क गए थे. आरएसएस ने तब अंग्रेजों का साथ दिया था. इन्होंने अपना एक नया गीत बनाया था, जिसे अपनी शाखा में गाते हैं. दुनिया जानती है कि इनका वो गीत क्या है.
भाजपा-आरएसएस ने तब वंदे मातरम की बात नहीं की और अब वंदे मातरम को लेकर बिल लेकर के आ रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने अमित शाह के राजस्थान दौरे पर दिए गए बयान की निंदा करते हुए कहा कि उन्हें सोनिया गांधी पर बोलने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि सोनिया गांधी ने अपने आप को इस देश की संस्कृति और कल्चर में ढाला है. वंदे मातरम पर भाजपा ने कानून बनाया है और कांग्रेस पार्टी 90 साल से वंदे मातरम को अपने हर कार्यक्रम में गाती हुई आ रही है. उन्होंने कहा कि 90 साल पहले रविंद्र नाथ टैगोर के सानिध्य में एक कमेटी बनी थी, जिसमें सुभाष चंद्र बोस और पंडित नेहरू भी थे.
सबने मिलकर तय किया कि हमें वंदे मातरम में क्या गाना है और यह कल परसों की बात करते-करते अब विवाद पैदा कर रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री बच्चों को दिमागी नक्सली बोल रहे हैं और अब उनके मंत्री किरण रिजीजू उस पर सफाई देते फिर रहे हैं. भाजपा और आरएसएस के लोग पूरी तरीके से एक्सपोज हो चुके हैं और इनका ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है.
हमारी सरकार में ऐतिहासिक काम हुए : पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपनी सरकार के दौरान गांवों और शहरों में किए गए विकास के कार्य को लेकर भी पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल की तारीफ की और कहा कि हमारे कार्यकाल में ऐतिहासिक काम हुए थे. भाजपा के सरकार के ढाई साल के शासन में विकास के कोई काम नहीं हुए हैं. लोग परेशान हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने हमारी सरकार में 12 लाख पट्टे बांट दिए थे. यह सरकार बार-बार अभियान शुरू करती है, लेकिन हर बार अभियान फेल हो जाता है.
अशोक गहलोत ने कहा कि हमने गांव में मनरेगा की तर्ज पर शहरों में रोजगार गारंटी योजना शुरू की थी. इस योजना को इस सरकार ने बंद कर दिया. आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान ऐसा एक मात्र राज्य था जहां पर इस क्रांतिकारी योजना को शुरू किया गया था. पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि एसएमएस अस्पताल में बन रहे आईपीडी टावर को भी स्मार्ट सिटी के तहत बनाया जा रहा है. गहलोत ने कहा कि जितने ऐतिहासिक काम हमारी सरकार में हो रहे थे, उन सब कामों को इस सरकार ने बर्बाद कर दिया है. यूडीएच मंत्रालय एक महत्वपूर्ण मंत्रालय है, लेकिन यह सरकार उस पर कोई ध्यान नहीं दे रही है.
स्कूलों में पाबंदी का फैसला वापस ले सरकार : वहीं, स्कूलों में मीडिया और आमजन की पाबंदी को लेकर जारी आदेशों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय सरकार को तत्काल वापस लेना चाहिए, क्योंकि यह राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है. एक तरफ जेन-जी जंतर मंतर पर धरने पर बैठे, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाद धरना दिए दे दिया. पूरे देश में मुद्दा बन गया. कांग्रेस कमेटी ने धरने दिए, शिक्षा का सिस्टम है उसमें आमूल-चूल परिवर्तन होना चाहिए. पेपर लीक नहीं हो, शिक्षा की नई अप्रोच बने, जिससे कि देश दुनिया में ऐसा संदेश जाए कि हिंदुस्तान शिक्षा के क्षेत्र में तवज्जो दे रहा है.
शिक्षा और स्वास्थ्य दो ही ऐसी बातें हैं जो आम आदमी चाहता है कि स्वास्थ्य अच्छा बना रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई अच्छी हो. गहलोत ने कहा कि राजीव गांधी ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय बनाया था. तब पीवी नरसिम्हा राव को उसका मंत्री बनाया था जो बाद में प्रधानमंत्री भी रहे. एक नरसिम्हा राव उस मंत्रालय के मंत्री थे और एक धर्मेंद्र प्रधान उस मंत्रालय के मंत्री थे. इसी बहस के बीच अब भाजपा सरकार ने स्कूलों में इस तरह के आदेश लागू कर दिए हैं. क्या यह आदेश पूरे मंत्रिमंडल से पूछ कर लिया गया है, क्या मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर यह फैसला किया है. स्कूल जाने के लिए भी अब परमिशन लेनी होगी. उन्होंने कहा कि राजस्थान में शिक्षा विभाग और सरकार दोनों का मजाक बनकर रह गया है. सरकार को यह आदेश वापस लेने चाहिए.

