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बाड़मेर-बालोतरा की सीमा में किए गए फेरबदल को गहलोत ने बताया तुगलकी फरमान

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की भजनलाल सरकार पर निशाना साधा है.

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (photo credit-Social media (ashok Gehlot X handle))
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : January 4, 2026 at 11:29 AM IST

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जयपुर. बायतु विधानसभा क्षेत्र को बाड़मेर और गुड़ामालानी धोरीमन्ना क्षेत्र को बायतु में शामिल करने के सरकार के फैसले को लेकर अब विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं. कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर सरकार पर सियासी रोटियां सीखने के आरोप लगाए हैं.

एक ओर जहां इसे लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध हो रहा है तो वहीं अब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस पर सवाल खड़े करते हुए सरकार के इस फैसले की निंदा की है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि यह स्पष्ट है कि यह निर्णय जनता की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए लिया गया है.

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पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रविवार को लिखा कि बाड़मेर और बालोतरा जिलों की सीमाओं में 31 दिसंबर की मध्यरात्रि को आनन-फानन में किया गया फेरबदल राज्य सरकार का एक और 'तुगलकी फरमान' है. बायतु को बाड़मेर और गुड़ामालानी-धोरीमन्ना को बालोतरा में शामिल करने का फैसला प्रशासनिक दृष्टि से कतई तर्कसंगत नहीं है. इससे गुड़ामालानी क्षेत्र की जनता के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय और बढ़ गई है, जो आमजन के साथ घोर अन्याय है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि यह स्पष्ट है कि यह निर्णय जनता की सहूलियत के लिए नहीं, बल्कि आगामी परिसीमन और सियासी समीकरणों को साधने के लिए लिया गया है. हमारी सरकार ने प्रशासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने की मंशा से नए जिले बनाए थे, लेकिन मौजूदा भाजपा सरकार जनभावनाओं को दरकिनार कर केवल 'सियासी रोटियां' सेकने में व्यस्त है. हम इस जनविरोधी निर्णय की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं.