पटना के AN कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर बने मंत्री अशोक चौधरी
जेडीयू के तेज तर्रार नेता अशोक चौधरी अब बच्चों को राजनीति विज्ञान पढ़ाने वाले हैं. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय को यह मौका मिलेगा. पढ़ें खबर


Published : February 16, 2026 at 5:50 PM IST
पटना : बिहार सरकार के भवन निर्माण मंत्री और जदयू के वरिष्ठ नेता अशोक चौधरी ने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी है. उन्होंने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में औपचारिक रूप से कार्यभार संभाल लिया है. एक ओर जहां वह राज्य सरकार में मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे हैं, वहीं अब वह कक्षा में छात्रों को राजनीति विज्ञान का पाठ पढ़ाते नजर आएंगे. वर्तमान में वह बिहार विधान परिषद यानी राज्य के उच्च सदन के सदस्य भी हैं.
असिस्टेंट प्रोफेसर बने मंत्री अशोक चौधरी : इस अवसर पर उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कहा कि यह उनके लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण है. नई जिम्मेदारी और नया संकल्प लेकर वे विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं प्रारंभ कर रहे हैं.
नई जिम्मेदारी, नया संकल्प 🙏
— Dr. Ashok Choudhary (@AshokChoudhaary) February 16, 2026
आज मेरे लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का क्षण है कि मैं #पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) के रूप में अपनी सेवाएँ प्रारम्भ करने जा रहा हूँ। मैं विशेष रूप से हमारे मित्र प्रो. एस. पी. शाही जी, कुलपति, मगध विश्वविद्यालय के… pic.twitter.com/PLoLI6GOBP
उन्होंने अपने संदेश में मगध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस. पी. शाही के प्रति आभार जताया और कहा कि उनके मार्गदर्शन और सहयोग ने उन्हें हमेशा प्रेरित किया है. इसके साथ ही पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेंद्र कुमार और कुलसचिव अबू बकर रिजवी का भी धन्यवाद दिया, जिनके सान्निध्य में उन्हें कार्य करने का अवसर मिला है.
डॉक्टरेट हैं अशोक चौधरी : दरअसल, अशोक चौधरी ने राजनीति विज्ञान में शोध कार्य पूरा कर पीएचडी की उपाधि हासिल की है. इसके अतिरिक्त उन्होंने बिहार में जाति सर्वेक्षण की प्रासंगिकता विषय पर डी. लिट की उपाधि भी प्राप्त की है. उनकी उच्च शिक्षा और शोध का आधार मगध विश्वविद्यालय रहा है, जहां से उन्होंने अपनी डिग्री पूरी की. शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक विषयों पर विचार रखे हैं.
2020 में निकली थी वैकेंसी, 2025 में चयन : अशोक चौधरी ने वर्ष 2020 में बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक पदों पर निकली बहाली के लिए आवेदन किया था. चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जून 2025 में उनका चयन हुआ. इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय में योगदान देने की औपचारिकता पूरी की.
बीते वर्ष ही उन्हें डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त हुई थी, जिससे उनके अकादमिक सफर को नई पहचान मिली. पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान के शिक्षक के रूप में उनकी नियुक्ति को छात्रों और शिक्षकों के बीच खास महत्व दिया जा रहा है.
'छात्रों को राजनीतिशास्त्र में व्यवहारिक ज्ञान भी मिलेगा' : जदयू नेता अभिषेक झा का है कि प्रशासनिक अनुभव और संसदीय प्रक्रिया की प्रत्यक्ष समझ के कारण मंत्री अशोक चौधरी छात्रों को व्यवहारिक दृष्टिकोण से राजनीति को समझाने में सक्षम होंगे. कक्षा में संविधान, लोकतंत्र, शासन व्यवस्था और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों को वे अपने अनुभव के साथ जोड़कर पढ़ा सकते हैं.
''राजनीति में सक्रिय रहते हुए विश्वविद्यालय में पढ़ाना एक दुर्लभ उदाहरण है. इससे छात्रों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक राजनीति में किस तरह का संबंध होता है. इससे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक छवि को भी मजबूती मिलेगी और छात्रों को प्रेरणा मिलेगी कि वे पढ़ाई के साथ समाज और लोकतंत्र में अपनी भूमिका तय करें.''- अभिषेक झा, जदयू नेता
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