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अशोक चौधरी असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति विवाद: शिक्षा मंत्री बोले- गड़बड़ी पायी गई है, जांच हो रही है

बिहार के शिक्षा मंत्री ने बड़ी बात कही है. अशोक चौधरी के ज्वानिंग को लेकर विवाद के बीच उन्होंने बयान दिया.

ASHOK CHOUDHARY
अशोक चौधरी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : December 29, 2025 at 4:24 PM IST

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पटना : बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य विभाग मंत्री और जदयू के कद्दावर नेता अशोक चौधरी की मुश्किल इन दिनों बढ़ी हुई है. दरअसल, अशोक चौधरी ने पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अप्लाई किया था. वो सलेक्ट भी हो गए. राजनीति शास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में उनकी नियुक्ति होनी थी. यूनिवर्सिटी ने 18 लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिया लेकिन, अशोक चौधरी को नियुक्ति नहीं दी गई. बताया गया कि उनकी डिग्री में कुछ गड़बड़ी है, इसलिए उन्हें यह नियुक्ति नहीं दी गई है.

शिक्षा मंत्री की दो टूक : विश्वविद्यालय के सूत्रों ने बताया कि अशोक चौधरी के सर्टिफिकेट में गड़बड़ी होने की वजह से उनको नियुक्ति नहीं दी गई है. सूत्रों के मुताबिक अशोक चौधरी के सर्टिफिकेट में नाम में गड़बड़ी होने की बात कही गई है. यह बातें अभी तक सूत्रों पर ही चल रही थी लेकिन, सोमवार को बिहार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बताया कि ''कमीशन को इस मामले को भेजा गया है. हमलोगों ने समीक्षा किया है. उसमें कुछ कमी है. इस मामले को गहराई से हमलोग देख रहें है. उनके सर्टिफिकेट में कुछ डिफरेंस पाए गए हैं.''

शिक्षा मंत्री सुनील कुमार का बयान (ETV Bharat)

नाम में गड़बड़ी : बताया जा रहा है कि अशोक चौधरी के चुनावी हलफनामे, डी. लिट् के सर्टिफिकेट और उनके बाकी के सर्टिफिकेट के नाम में डिफरेंसेज मिले हैं. इसलिए सर्टिफिकेट जांच के बाद उनकी नियुक्ति रोक दी गई. 18 उम्मीदवारों में से 17 उम्मीदवारों को कॉलेज आवंटित कर दिया गया. लेकिन, अशोक चौधरी की नियुक्ति पर रोक लगा दी गई.

दरअसल, 57 साल के अशोक चौधरी ने पिछले जून महीने में पॉलिटिकल साइंस प्रोफेसर के लिए इंटरव्यू दिया था. 274 उम्मीदवार में से वह एक थे. ये वैकेंसी 2020 की थी. इस नियुक्ति पर विवाद भी हुए थे. लेकिन 2025 में नियुक्ति शुरू हुई तो, ये अशोक चौधरी का विवाद हो गया.

जाति सर्वेक्षण पर डी. लिट् : इसी साल नवंबर में अशोक चौधरी ने मगध विश्वविद्यालय के 22वें दीक्षांत समारोह में दिल्ली डी. लीट यानी डॉक्टर ऑफ लिटरेचर की उपाधि ली थी. बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने उन्हें यह सम्मान दिया था.

अशोक चौधरी ने अपनी शोध विषय में बिहार के सबसे ज्वलंत मुद्दे जाति सर्वेक्षण की प्रासंगिकता: बिहार में एक सामाजिक-राजनीतिक अध्ययन को चुना था. डी. लिट् के बाद उन्होंने पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अप्लाई किया था. अशोक चौधरी इसके लिए सिलेक्ट भी कर लिए गए थे लेकिन, मामला उनके सर्टिफिकेट जांच में फंस गया. हालांकि वो पहले भी पीएचडी कर चुके थे.

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