राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जनसुनवाई में नहीं पहुंचे जामताड़ा के डीसी और एसपी, आशा लकड़ा ने कहा - दिल्ली जाकर करेंगे समन
दुमका में जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान जामताड़ा के डीसी और एसपी मौजूद नहीं रहे. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्य आशा लकड़ा ने नाराजगी जताई.


Published : June 1, 2026 at 8:30 PM IST
दुमका : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की मेंबर आशा लकड़ा ने जामताड़ा के डीसी और एसपी को समन करने की बात कही है. दरअसल, आशा लकड़ा को जामताड़ा के लोगों से पूर्व में शिकायत मिली थी कि उनकी भूमि पर कब्रिस्तान बना लिया गया है. इसे खाली कराया जाए.
इस बाबत आशा लकड़ा ने प्रेसवार्ता कर जानकारी दी कि इस विषय पर बात करने के लिए आयोग की तरफ से दुमका के जनसुनवाई कार्यक्रम में जामताड़ा के डीसी और एसपी को नोटिस देकर बुलाया गया था पर दोनों अनुपस्थित रहे. इधर, आज की जनसुनवाई कार्यक्रम में जामताड़ा के लोगों ने आयोग को बताया कि उस कब्रिस्तान में अभी भी लोगों को दफन करने का काम जारी है. आज डीसी और एसपी की अनुपस्थिति को गम्भीरता से लिया गया है. अब दिल्ली जाकर उन्हें समन भेजा जाएगा और आयोग के समक्ष उन्हें उपस्थित कर अनुसूचित जनजाति के लोगों को न्याय दिलाने का काम किया जाएगा. साथ ही उन्होंने संथाल परगना में आदिवासी समाज की स्थिति को बदहाल को बताया है. उनका कहना है कि यहां रोटी-माटी-बेटी असुरक्षित हैं. राज्य सरकार इस पर ध्यान दें.
दो दिवसीय दौरे पर हैं आशा लकड़ा
एसटी आयोग की मेंबर आशा लकड़ा अपने दो दिवसीय दौरे पर दुमका आई हुई हैं. आज दुमका परिसदन में उन्होंने जनसुनवाई की. जिसमें पूरे प्रमंडल से काफी संख्या में एसटी समाज के लोगों ने भाग लिया और अपनी-अपनी समस्याओं को उनके समक्ष रखा. आशा लकड़ा ने कई लोगों की समस्या का ऑन स्पॉट समाधान किया तो कुछ के निदान के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी. इसमें ज्यादातर मामले घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद और भूमि से संबंधित मुआवजे के थे.
एसटी महिलाओं को बनाया जा रहा है निशाना
दुमका परिसदन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए आशा लकड़ा ने कहा कि आज संथाल परगना प्रमंडल के साहिबगंज, पाकुड़, जामताड़ा जैसे जिलों में एसटी समाज की महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है. उनसे गलत ढंग से चंगुल में फंसा कर शादी कर ली जा रही है और फिर उनकी जमीन पर कब्जा किया जा रहा है. इससे डेमोग्राफी चेंज हो रही है.
उन्होंने कहा कि इसे रोकना काफी आवश्यक है और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने इसके लिए उचित कार्रवाई भी शुरू कर दी है. इससे संबंधित रिपोर्ट राष्ट्रपति को भी सौंपी गयी है. आशा लकड़ा ने कहा कि इस समाज के लोगों का विश्वास एसटी आयोग के प्रति बढ़ा है और लगातार आयोग के सामने इससे जुड़े मामलों की संख्या बढ़ रही है.
एसटी लोगों के प्रति राज्य सरकार ध्यान दें
आशा लकड़ा ने कहा कि साहिबगंज, जामताड़ा में कुछ ऐसे मामले आए जब आदिवासी समाज की जमीन को दूसरे धर्म के लोगों ने कब्जा करने का प्रयास किया. इसका साफ अर्थ है कि सरकार और प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं है. उन्होंने झारखंड सरकार को कहा कि इस राज्य का निर्माण के पीछे एसटी समाज की बेहतरी भी थी. ऐसे में आप इस समाज के लोगों के प्रति ज्यादा गंभीर होकर कार्य करें. उन्हें जागरूक करें, शिक्षित करें ताकि कोई भी उनका शोषण न कर सके.
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